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  • मुक्तक

    मुक्तक

    अब तो जूठन भी नसीब नहीं होती पेट के मारो को सारे जलसे ऊँची इमारतों के फानूस में टंगे होते हैं -राज सिंह परिचय - राज सिंह रघुवंशी बक्सर, बिहार से कवि-लेखक पिन-802101 raajsingh1996@gmail.comMail | Facebook...