कहानी

पवित्र रिश्ता

ट्रेन को भी आज ही लेट होना था। स्टेशन की भीड़ देखकर उसका मन और भी उचाट हो कर रहा था।वह जल्दी से जल्दी इस शहर से दूर हो जाना चाहती थीं।भारी भीड़ में भी वह खुद को बहुत अकेला महसूस कर रही थी। उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था।चारों ओर उसे लोग […]

कहानी

फेसबुक

फेसबुक चलाने में मुझें इतना मजा नहीं आता था। पर रोज फेसबुक पर कोई ना कोई रिक्वेस्ट आ जाती थी।मुझें बड़ा अजीब लगता था,अनजान लोगों से जुड़ना।कभी-कभी मन में आता था कि डिलीट कर दूँ फेसबुक को।पर आजकल फेसबुक पर एक्टिवेट ना होना भी—-। सहकर्मी पूछ ही लेते थे,सर आप भी फेसबुक पर हो क्या? […]

लघुकथा

सहाब कौन?

सहाब,दस रुपए दे दो। क्या करेंगा, दस रुपए का? सहाब,ने गरम चाय की चुस्की लेते हुए कहा। सहाब, मैं गरम चाय पी लूँगा। दस रुपए क्यों चाहिए, चाय पिला देता हूँ? सहाब,कहते-कहते, वह चुप हो गया। सहाब ने चाय वाले से कहा,इसे भी एक कप चाय दे दो। चाय वाले ने हाँ, में सिर हिलाया […]

लघुकथा

काबिल

आप भी कमाल कर रहे हो। इसमें कमाल की क्या बात है? समझतें क्यों नहीं,जिस आदमी की जात का पता नहीं, उसे अपनी इकलौती बेटी कहते-कहते वह कुछ गम्भीर हो गई? आखिर तुम कहना क्या चाहती हो? खुल कर कहो। सब कुछ मैं ही कहूँ। आप तो कुछ समझते ही नहीं हो। सारी दुनिया में […]

लघुकथा

स्वीकार

सविता,अब तुम ही समझाओ निलेश को उसे घर की मान- मर्यादा का कुछ भी ख्याल नहीं है। जब देखो उस सावली- सी लड़की के साथ घूमता रहता है। क्या उसे कोई और लड़की नहीं मिलती यही एक हूर रह गई थी उसके लिए इस दुनिया में। उसे तो छोड़ो उस लड़की के माता-पिता ने भी […]

लघुकथा

स्वर्ग

बेटे, मैं तुम्हारे मामा के घर जा रही हूँ।क्यों माँ, तुम आजकल मामा के घर बहुत जा रही हो? क्या आपको अपने परिवार की बहुत याद आती हैं?माँ चुप थी,वह माँ के चेहरे के भावों को देख कर बड़ा हैरान था।ठीक हैं, माँ अगर तुम्हारा मन मान रहा तो चली जाओ।माँ तुम्हारे पास पैसे तो […]

लघुकथा

प्रतियोगिता

माँ,मैं अभी शादी नहीं करना चाहतीं।क्यों,बेटी अब तो तुम्हारी शिक्षा भी पूरी हो चुकी हैं?तुम्हारी उम्र भी तो निकल रही हैं।देखों, गाँव में तुम से छोटी लड़कियों के हाथ पीले हो गए हैं।नहीं माँ अभी मेरी उम्र ही क्या है?क्यों कितने साल की हो गई हो तुम?माँ, अभी तो अठारह भी पूरा नहीं हुआ है।माँ […]

लघुकथा

कार्ड

वह जब से विदेश से लौटी थी।अपने कमरे में गुमसुम सी पड़ी रहती थी।उसे किसी बात का होश नहीं था।उसने रात अँधेरे में रो-रो कर काट दी थी।माँ ने सुबह से कई बार उसके कमरे पर दस्तक दी थी।उसने खुद को सँभालते हुए,यही कहा था आ रही हूँ,माँ।अभी सफर की थकान नहीं उतरी हैं। माँ,बार-बार […]

लघुकथा

प्रतिकार

अमिता,अपनी सफलता पर फूली नहीं समा रही थी।आज उसके पैर जमीन पर नहीं पड़ रहे थे।उसे अपनी इस कामयाबी पर पहले तो यकीन ही नहीं हुआ था।पर सामने पड़े लिफाफे ने उसे पूरी तरह यकीन दिला दिया था कि उसने एक बड़ी कंपनी में नौकरी पा ली हैं।पति ने उसकी सफलता पर उसे बधाई दी।वह […]

कहानी

जीवन के रंग

उमा बाग में बैठी अतीत में इस तरह खो जाती थी कि उसे समय का ध्यान ही नही रहता था। हमेशा घर की नौकरानी उसे दीदी-दीदी कहती तो वह वर्तमान में लौट आती।उमा को उसकी मीठी आवाज किसी की याद दिला जाती थी।वह हमेशा अपनी बेटी रूपा को याद करती थी,पर रूपा ने मुड़कर कभी […]