कथा साहित्य कहानी

आदर्श

कर्मों का खेल है सारा, जो लिखा होता है वही होता है। शर्मा जी सभी से यही तो कह रहे थे। बड़े आदर्शवादी बनते थे शर्मा जी।सारे आदर्श धरे के धरे रह गए थे। कितने अरमानों से पढ़ाया-लिखाया था बेटे को। पर आज उन्हें सब कुछ व्यर्थ लग रहा था।काम ही कुछ ऐसा हुआ था। […]

कथा साहित्य कहानी

लिव-इन

मानवी पिछले कई सप्ताह से घर नहीं आई थी।पहली बार ऐसा हुआ था। नहीं तो उसे हमेशा घर आने की जल्दी लगी रहती थी। रोज फोन पर घण्टों लगी रहती थी। उसे कई बार समझाया था कि अपने शहर में ही कोई अच्छी सी नौकरी ढूंढ ले। सैलरी कम होगी तो भी चलेगा। कम से […]

कथा साहित्य कहानी

क्षति पूर्ति

गीतू ऐसा क्या हो गया हैं?जो नौबत यहाँ तक पहुँच गई है। मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी,तुम्हारे साथ ऐसा हो सकता है।पति-पत्नी में कहा- सुनी होना कोई बड़ी बात नहीं है। हर घर में ऐसी स्थिति बन जाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि एक-दूसरे को छोड़ने को तैयार हो जाओ। तुम […]

कहानी

आशादीप

मालती का आज विद्यालय में पहला दिन था।वह पहले दिन ही देर से नहीं पहुँचना चाहती थीं।उसने एक रिक्शा वाले को धीरे से आवाज लगाई।हाँ मैडम जी कहाँ छोड़ दूँ,आपको?मुझें विद्यालय जाना हैं। विद्यालय, मैडम जी दस रुपए लगेंगे रिक्शा वाले ने गम्भीर होते हुए कहा।दस रुपए तो बहुत ज्यादा हैं,भईया।नहीं मैडम जी,कहाँ ज्यादा है […]

कहानी

जिम्मेदारी

घर पर खुशियों का माहौल था। सभी ओर से बधाई मिल रही थी। रमेश और सुरेश ने अपनी माँ का नाम रोशन कर दिया था। उनकी सफलता का श्रेय उनकी माँ को जाता था। आरती देवी स्वभाव से बड़ी ही शान्त थी। वह बच्चों की सफलता का श्रेय उनकी मेहनत को ही देती थी। सब […]

कहानी

शिखर

माला जी, आज आप कला के शिखर पर हैं। कृपया अपने चाहने वालों को भी बताएं।कैसा लगता है आपको इस शिखर पर पहुंचकर?अच्छा लगता है।आपकी कलाकृतियां सबको इतनी पसंद आती हैं। मैं तो आपका सबसे बड़ा चाहने वाला हूँ।पत्रकार ने मुस्कुराते हुए कहा।जी,आप सभी कला पारखियों का बहुत-बहुत धन्यवाद। अखबार में छपे माला के इंटरव्यू […]

कहानी

वनवास

अवनी आज अपनी माँ से लगातार सवाल पूछ रही थी। यह अंकल कौन थे? बताओ ना माँ,आखिर कब तक तुम यूं ही घुटती रहोगी? क्या तुम्हें अपनी अवनी पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है? पापा को गुजरे बीस साल हो गए। कब तक उनकी यादों में खुद को डुबोकर रखोगी?आखिर कुछ तो कहो, माँ।देखो माँ […]

कहानी

समझौता

बस स्टैंड पर बसों का आना-जाना लगा हुआ था। सीमा अपना समान संभालती किसी तरह बेटियों का हाथ पकड़कर खिंचती जा रही थी।उसे लगता था दिल्ली जैसे बड़े शहर में चोरी की बहुत घटनाएं होती है। पिछले ही साल की तो बात है, जब किसी ने उसका बैग चुरा लिया था।जब वह कैंटीन पर चाय […]

लघुकथा

रिश्ते

क्या ये भाई-भाई लगा रखा? अब क्या हुआ,भाग्यवान? हुआ तुम्हारा सिर। जब देखों, तुम्हें अपने भाई की चिन्ता लगी रहती हैं। नए कपड़े लाओगे,पहला जोड़ा भाई के लिए। मेरी समझ में नहीं आता। अरे भाग्यवान, मेरा एक ही तो भाई हैं। अच्छा जी,फिर सारा घर उन्हीं पर लुटा दो। अब चुप भी हों जाओ। आज […]

कहानी

मिलन

बेटा, तेरी डाक मेज पर रखी है।पता नहीं यह लड़का क्यों कागज काले करता रहता है?मेरी तो कुछ भी समझ में नहीं आता।डाकिया भी रोज ही घर के चक्कर लगाता रहता है। कल ही तो कह रहा था,माँ जी प्रकाश को पढ़ने- लिखने का बहुत शौक है।वह बहुत सुन्दर कहानी-कविताएं लिखता है। यह बहुत अच्छी […]