मुक्तक/दोहा

कैसा दौर आया है-ताजा मुक्तक

यह कैसा दौर आया है यहाँ निर्दोष मरते हैं जहाँ देखो उधर ही रोज बम गोले बरसते हैं धरा भी रक्त रंजित है गगन भी रो रहा देखो चहु दिश चीखें ही चीखें रुदन पक्षी भी करते हैं । डॉ रमा द्विवेदी

मुक्तक/दोहा

मंदिर में मनमीत-ताजा मुक्तक

1-मनुआं में है गहन अंधेरा मंदिर में हैं मनमीत पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ मिला न अगम अतीत मिले न काबा -काशी में मिले न अलख जगाय ढाई आखर प्रेम पढ़े तो मिले कृष्ण की प्रीत । —————————————————- 2-मंदिर में मनमीत बिठाया मन उपवन है सूना आडम्बर से नाम कमाते, पाप करत वें दूना । […]

मुक्तक/दोहा

नेह का उपहार-मुक्तक

1-कितनी सुहानी ईद यह, चहु ओर ही गुलजार है प्रकृति दुल्हन मुस्कराई, मेघों का यह इकरार है सूरज भी कुछ मद्धम हुआ अम्बर लगे प्यारा हमें बचपन गले से मिल रहा यह नेह का उपहार है | ——————————— 2-होली ,दीवाली , ईद सब ये खुशियों के त्योहार हैं सबहि यहाँ मिल कर रहें इस बात […]

लघुकथा

लघुकथा : शिक्षा-शिरोमणि

आज फिर स्थानीय संस्था के वयोवृद्ध सम्मानित व्यक्ति सत्यदेव ने विभा को फोन किया- ”महोदया, आप एक बार फिर सोच लीजिए। आप यकीन नहीं करेंगी, लेकिन यह सच है कि ‘शिक्षा शिरोमणि ‘ सम्मान के लिए कई शिक्षाविद खुशामद कर रहे हैं। लेकिन हमारी संस्था सिर्फ सुपात्रों का सम्मान करती है। आपने बतौर प्राध्यापिका बड़ी ही […]

मुक्तक/दोहा

सदा बदनाम होते जो ~ मुक्तक ~

1-जो करते वायदे झूठे सदा बदनाम होते जो उसे ही पूजती दुनिया कि आसाराम होते जो गुनाहों के देवों को ये दुनिया क्यूँ नमन करती ? हजारों पाप करके भी सदा सतनाम होते जो । ————————————————– 2- एक नाव में हो सवार तू ये जीवन है दिन चार दो नावो में पैर न रखना डूबोगे […]

मुक्तक/दोहा

अजब कैसा चलन देखो -मुक्तक

1-सुरा अरु सुंदरी का यह अजब कैसा चलन देखो नहीं कुछ सोच पाते हैं यह कैसा है व्यसन देखो थिरकतीं बार-बालाएं बनाती सबको दीवाना कि तन-मन डूब जाते हैं हुआ कैसा पतन देखो | ————————– 2- सुरा और सुंदरी पा के वो सब कुछ भूल जाते हैं है इसमें ऐसा मद यारो कि घर-बर डूब […]

हाइकु/सेदोका

पांच हाइकु

1 -कैसी बेढंग ज़िंदगी की कहानी मृत्यु रंगीन । 2 – टिका लूं पैर ठोस धरातल पे तब तो उडूं | 3 -शादी रचा ली माडर्न समझौता खतरे भरी । 4 -कुंडली मिली शहनाई की गूंज करम जली । 5 -उघड़ा तन आधुनिक फ़ैशन यश की सीढ़ी । डॉ रमा द्विवेदी

मुक्तक/दोहा

तीन मुक्तक

1 – जो भी मिल जाता है तकदीर मान लेती हैं रूठे नसीब को भी ये तदवीर मान लेती हैं दुआएं मांगती अपनों की हर खुशी के लिए लेकिन ये खुद के लिए पीर मांग लेती हैं || 2 – जहाँ पर रोप दो, ये वहीं लग जाती हैं ये तो तुलसी हैं हर आंगन […]

लघुकथा

लक्ष्मी की माया -लघुकथा ——————————-

“नमस्ते लक्ष्मी ! किधर जा रही हो ?” “बस संस्था के काम से जा रही हूँ लक्ष्मी ने विद्या से कहा ।” “विद्या ने कहा ,अगर तुम बुरा न मानो तो एक बात पूछू ”? “हाँ हाँ पूछो ”। “विद्या ने कहा ,सखी तुम्हारी संस्था `साहित्य सेवा ‘ का तो बड़ा नाम है ,लोग चुम्बक […]

लघुकथा

तंग दिल अमीर भाई -लघु कथा

पंडित रामू काका के तीन संतानें थीं । एक पुत्र दो पुत्रियां । छोटे काश्तकार और स्वतंत्रता आंदोलन में जेल जा चुके थे । पुत्र सिद्धार्थ माँ का बड़ा आज्ञाकारी और पढ़ने में बहुत मेधावी हर परीक्षा में अव्वल आता था । काका बहुत खुश थे कि उनका बेटा बहुत नाम कमाएगा लेकिन शादी होते […]