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  • पत्थर को टूटना होगा

    पत्थर को टूटना होगा

    समुन्दर की गहराई में मुझे ढूँढना होगा मैं पत्थर हूँ मुझे तरसना होगा कहते हैं पत्थर से भी कठोर होते हैं लोग सच्चे प्यार से उन्हें पिघलना होगा तुम कहाँ हो ये पूछते रहते हैं लोग...

  • दुनियाँ….

    दुनियाँ….

      ये दुनियाँ हमें कहाँ से कहाँ ले जाती है खुशी और गम दो हिस्सों में बांट जाती है हमें तो देना पड़ता है हरदम इम्तहान जिंदगी हमें यही समझा के जाती है कहते हैं दुनियाँ...

  • वो नूर हो गई…

    वो नूर हो गई…

    दुःख से जिंदगी सराबोर हो गई अब तो आँसुओ की बौछार हो गई जिनकी यादों का बनाया आशियाना वो भी अब कोई गैर हो गई सारे सपने टूट गए हैं अब मेरे मोहब्बत भी चकनाचूर हो...

  • अज़नबी

    अज़नबी

    मैं तो एक अज़नबी हूँ आता रहता हूँ ख़्वावों में करती हो मेरा इंतजार क्यों क्यों देखती हो राहों में मांगती हो हरदम ख़ुदा से आता हूं तुम्हारी दुआओं में कहती नहीं हो किसी से तुम...


  • रे ! पंछी

    रे ! पंछी

    रे ! पंछी अब उड़ चल सूख गए हैं डाल पात ढूँढ ठिकाना और कहीं बची है केवल राख रे ! पंछी अब उड़ चल मेघ की आस लिए हुए बीत गई हैं कई रात नीड़...

  • याद आते हो तुम

    याद आते हो तुम

    कभी-कभी तो याद आते हो तुम इस दुनिया में न जाने कहाँ हो तुम क्यों आते हो मेरे सपनों में आकर कहीं दूर चले जाते हो तुम जब आते हो तुम मेरे ख़्वावों में इस दिल...

  • “सच्चा दोस्त”

    “सच्चा दोस्त”

    मैं जो हूँ वही रहने दो मुझे तू समन्दर है दरिया रहने दो मुझे मुझे नहीं है चाहत गैरों की अपने साये में रहने दो मुझे नहीं दिया तुमने साथ मेरा तो सिर्फ़ तन्हा ही रहने...

  • ग़म क्यों है

    ग़म क्यों है

    दुनियाँ में इतने गम क्यों है हर आदमी परेशान क्यों हैं यूँ तो हंसते हुए मिलते हैं लोग फिर अंदर से मायूस क्यों हैं देखे थे मैंने जो सुंदर सपने आज वही बेकार क्यों हैं करते...