समाचार

सृजन के अंकुर काव्यगोष्ठी

12/05/2019 – मातृदिवस पर काव्यमयी संस्था “सृजन के अंकुर” द्वारा आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने नारी के सशक्तिकरण और मां की महिमा का बखान किया। इस दौरान मां को भगवान का रूप बताया गया। वहीं बेटियों को शिक्षित और प्रोत्साहित कर आगे बढाने की बात कही। मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्जवलित […]

समाचार

स्त्री ही दोषी क्यो पुस्तक का लोकार्पण

उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के शिक्षाशास्त्र विभाग में अध्ययनरत छात्राध्यापिका “दीपा दिवाकर” द्वारा रचित वर्तमान समाज में स्त्रियों के परिस्थिति को दर्शाती हुई “स्त्री ही दोषी क्यों” नामक पुस्तक का लोकार्पण आज विश्वविद्यालय में सम्पन्न हुआ।। उपरोक्त पुस्तक में लेखिका द्वारा उन सभी तथ्यों को उद्धृत करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है ,जो […]

अन्य

चित् तरंगिणी का भव्य विमोचन ।

21/04/19 को उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय में युवा महोत्सव के अवसर पर हिन्दी और संस्कृत काव्य जगत में अपनी पहचान बना रही चित् तरंगिणी पत्रिका के द्वितीय अंक का विमोचन उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति देवी प्रसाद त्रिपाठी, निर्वाणी आखाडे के महामण्डलेश्वर स्वामी प्रेमानन्द जी महाराज, संस्कृत विश्वाविद्यालय के पूर्व कुलपति एवं पतञ्जलि विश्वविद्यालय के वर्तमान […]

कविता

अनमेल प्रेमकथा

मैं काला कोयला पर्वतों का तू सागर की मोती है, मैं क्रोधानल शंकर की तू ज्वाला जी की ज्योति है। मैं सागर की गहराई तू हिम शिखर की ऊचांई है, मैं पानी नाले का तू गंगा सी शिव जटा को धोती है।1। तू शीत हवा पुरुवाई की मैं पछावा का राही हूँ, तू माता पिता […]

गीतिका/ग़ज़ल

भक्ति में शक्ति

भक्ति में शक्ति मिले जिन्दगी में पुरस्कार तेरे, दिवाकर सितारे कलमकार तेरे मुसाफिर सभी जिंदगी की खुशी के, सदा देखते है चमत्कार तेरे। सभी है यहाँ यार दो तीन पल के , सदा सुख मिला ईश उपकार तेरे। प्रभो देख लो मैं शरण आ गया हूँ, सदा ही करूँ मै अलंकार तेरे। जमाना करे याद […]

गीतिका/ग़ज़ल

जीवन चक्र

मुसाफिर चलो आज रब देखने को मिलेगा नहीं वक्त फिर सोचने को। अरे देख लो सब गए रंक राजा भजो राम को पल नही खेलने को। गया बाल पन खेलने कूदने में युवा पन गया बीत जग जाँचने को। सदा ही जरूरत मुझे अर्थ की थी कभी ना निगाहें गयी जानने को। वयो वृध्द सारे […]

कविता

भ्रष्टाचार पर प्रहार

कह दो कह दो लोभी, जल्लादो, मक्कारों से , कह दो कह दो इन क्षेत्रहित के ठेकेदारो से, कह दो कह दो सारे विकास वादी झूठे नारों से , कह दो कह दो चोर चक्कारों जनहित के पहरेदारों से, ग्रह,नक्षत्र अब युवाओं के अनुकूल दिखाई देते है, नष्ट,भ्रष्ट नेताओं के पेट में अब शूल दिखाई […]

कुण्डली/छंद

पकवान (मनहरण घनाक्षरी)

बना कर पकवान, गरीबों को करो दान, भूख से न जाये जान, भारत महान है । पकवान बनाकर, अपना भी पेट भर, खाना वो जो हितकर, मुनियों का गान है। क्षीर से पनीर खीर, छानकर पीना नीर भुखमरी देना चीर, बने पकवान है । चाईनीज भोज खाये, पेट भर रोग पाये, वैद्य मन हरषाये, निकट […]

मुक्तक/दोहा

कुम्भ पर दोहे

सुधा गिरा जब कुम्भ से, माया पुरी प्रयाग। उज्जैन नासिक तब से, है पावन भू भाग ॥ सागर से निकला सुधा , ये मंथन का सार। सुधा कैसे पान करे, सभी किये विचार॥ गंगा यमुना शारदा, है साथ में प्रयाग। करने स्नान कुंभ चले, जप दान पुण्य याग॥ माघ सुपावन मास है, कुम्भ करे स्नान॥ […]