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  • अधूरापन

    अधूरापन

    जिन्दगी का हर पहलू लगता मुझे अधूरा मिलकर एकपल खुशी कभी होता नहीं पूरा क्या गम क्या हंसी है हंसी कितनी सजी हैं दुल्हन बनकर आती है जनाज़ा तरह जाती है कौन काटें ये दर्द कैसे...

  • हे मानव !

    हे मानव !

    हे मानव !! क्यों झूठ का गठरी लिए सर्वत्र घूम रहा है क्यों मानव होकर दे रहा मानव को ठोकर गलत भावनाओं से ग्रसित द्वेष्यता की आग में मानवता को जला डाला क्यों बनाता मानवीय आकार...


  • सरस्वती वंदना

    सरस्वती वंदना

    वीणावादिनी ज्ञान दायिनी ज्ञानवान कर दे…. माँ रूपसौभग्यदायिनी नव रुप भर दे…. जीवन में नव रस नव गीत नव स्वर भर दे… हंसवाहिनी श्वेतांबरी जग उज्ज्वल कर दे….. वीणापाणिनि शब्ददायिनी शब्दों से भर दे…. ज्योतिर्मय जीवन...


  • चाहत

    चाहत

    चाँदनी चमक लिए,चाहने की चाह लिए दिल में चाहत भरा,क्यों लिये चल रहीं। बाल तेरे काले काले,चाल तेरे हैं निराले नयनों में दिखे मुझे,ख्वाबो में पल रहीं। ओठ हैं गुलाबी रंग,बाल छूए गोर गाल भरा मन...


  • क्षणिका

    क्षणिका

    धन्यवाद क्यों दे रहे हो मुझे, इसके पात्र तो वे हैं जो तेरे साथ किसी समय कुछ पल गुजारें थे। © रमेश कुमार सिंह ‘रुद्र’ परिचय - रमेश कुमार सिंह 'रुद्र' रमेश कुमार सिंह (हिंदी शिक्षक...