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  • सरस्वती वंदना

    सरस्वती वंदना

    वीणावादिनी ज्ञान दायिनी ज्ञानवान कर दे…. माँ रूपसौभग्यदायिनी नव रुप भर दे…. जीवन में नव रस नव गीत नव स्वर भर दे… हंसवाहिनी श्वेतांबरी जग उज्ज्वल कर दे….. वीणापाणिनि शब्ददायिनी शब्दों से भर दे…. ज्योतिर्मय जीवन...


  • चाहत

    चाहत

    चाँदनी चमक लिए,चाहने की चाह लिए दिल में चाहत भरा,क्यों लिये चल रहीं। बाल तेरे काले काले,चाल तेरे हैं निराले नयनों में दिखे मुझे,ख्वाबो में पल रहीं। ओठ हैं गुलाबी रंग,बाल छूए गोर गाल भरा मन...


  • क्षणिका

    क्षणिका

    धन्यवाद क्यों दे रहे हो मुझे, इसके पात्र तो वे हैं जो तेरे साथ किसी समय कुछ पल गुजारें थे। © रमेश कुमार सिंह ‘रुद्र’ परिचय - रमेश कुमार सिंह 'रुद्र' रमेश कुमार सिंह (हिंदी शिक्षक...



  • पिता

    पिता

    बच्चों का पालनहार पिता है। भविष्य का आधार पिता है। सुखमय दिये संसार पिता ही, जीवन के कर्णधार पिता है। मार्ग का निर्माण पिता है। ख्वाबों के उड़ान पिता है। हर उद्देश्य पूर्ण करने वाले, लक्ष्य...

  • पुतले,पुतले

    पुतले,पुतले

    पुतले,पुतले चहूँ ओर पुतले निर्जीव की भेष में सजीव के भेष में लेकिन दोनों कहलाते पुतले करते कार्य अजीबोग़रीब निर्जीव ने जो दिखाया सजीव ने नहीं कर पाया निर्जीव का चमत्कार सजीव नहीं कर पाया पुतले...

  • साहित्य की आवाज़

    साहित्य की आवाज़

    अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग के नाम पर कहते हैं लोग- पैसा दीजिएगा रचना को जगह मिलेगी नहीं दीजिएगा प्रकाशित नहीं होगी समझ नहीं आता साहित्य से पैसा या पैसा से सहित्य यह कैसा अद्भुत खेल साहित्यिक...