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  • पुतले,पुतले

    पुतले,पुतले

    पुतले,पुतले चहूँ ओर पुतले निर्जीव की भेष में सजीव के भेष में लेकिन दोनों कहलाते पुतले करते कार्य अजीबोग़रीब निर्जीव ने जो दिखाया सजीव ने नहीं कर पाया निर्जीव का चमत्कार सजीव नहीं कर पाया पुतले...

  • साहित्य की आवाज़

    साहित्य की आवाज़

    अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग के नाम पर कहते हैं लोग- पैसा दीजिएगा रचना को जगह मिलेगी नहीं दीजिएगा प्रकाशित नहीं होगी समझ नहीं आता साहित्य से पैसा या पैसा से सहित्य यह कैसा अद्भुत खेल साहित्यिक...


  • षड्यंत्र

    षड्यंत्र

    षड्यंत्र (छन्द मुक्त कविता) •••••• षड्यंत्र बिन नहीं काम चलता चाहे हो अपना भाई कोई भाई ही भाई को डसता कलयुगी इस दौर में षड्यंत्र करते कृष्ण भी अधर्म के विरोध में मरवा दिया भीष्म को...

  • भूला न देना

    भूला न देना

    तुम मुझको नहीं रिझाओ मुझे हमेशा डर लगता है ऐसे न तुम कभी हंसाओ खुशियों में भी गम दिखता है ऐसे न तुम प्रेम दिखाओ कभी टूटने का डर लगता है ख्वाबों में न तुम रोज...

  • एहसान

    एहसान

    जिन्दगी जीने के खेल में आगे बढ़ने की होड़ में लौटकर पीछे नहीं देखना चाहता हर पल अग्रसर रहना चाहता इसी भाग-दौड़ में भूल जाता है अपनी शक्तियों को होने लगता है कमजोर नहीं चलता उसका...

  • हिन्दी भाषा

    हिन्दी भाषा

    हिन्दी हिन्दू हिन्दुस्तान। देश की यही है पहचान। आओ मिलकर इन्हें बढाएँ, गाते चले इनका गुणगान॥ राष्ट्र भाषा का रुप दिखाए्ँ। निज भाषा सबको बतलाएँ। अभिलाषाएं यहाँ होगी पूरी, आओ इन्हें इन्साफ दिलाएँ॥ हिन्द देश की...


  • मुक्तक

    मुक्तक

    रखेगें सच्चाई मन में यही मेरा विश्वास है। तिरंगे की ओर से करोड़ो का आवाज है। नहीं झुकेगा कभी ये भारत,भारतीय लोग उस हरा केसरिया श्वेत रंग चक्र पर नाज है॥१॥ भारतीय अस्मिता को कभी भी...

  • आजादी का प्रतिफल

    आजादी का प्रतिफल

    कविता -: आजादी का प्रतिफल •••••••••••••••• पराधीन था अपना देश शोषित थे अपने लोग विवशता के आगोश में जकड़े हुए थे अपने ही धरती पर अपने स्तर से निर्णय नहीं ले पाना मजबूरियों को पनाह दिए...