कविता

दूर गगन में उड़ते पंछी

पंछी उड़ते दूर गगन में सभी सीमाओं से बहुत दूर यह मेरा है यह तेरा है की चिंता नहीं बस मंजिल पर पहुंचना है ज़रूर यह पूरा गगन है मेरा हौसलों से मेरी उड़ान है एक पेड़ नहीं है मेरा घर मेरा तो अपना सारा जहान है पूर्ब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण कोई […]

कविता

हर कोई लपेटे में आता

काश ऐसी कोई मशीन आ जाती दिल में छुपी बात जो पढ़ पाती फिर तो कोई नहीं बच पाता हर कोई लपेटे में आ जाता कितने गुनाह किये किसी ने कितने किसी ने झूठ बोले किस किस के घर में आग लगाई भेद यह सारे एक मिनट में खोले नेताओं की तो नाक ही कट […]

कविता

हर कोई लपेटे में आता

काश ऐसी कोई मशीन आ जाती दिल में छुपी बात जो पढ़ पाती फिर तो कोई नहीं बच पाता हर कोई लपेटे में आ जाता कितने गुनाह किये किसी ने कितने किसी ने झूठ बोले किस किस के घर में आग लगाई भेद यह सारे एक मिनट में खोले नेताओं की तो नाक ही कट […]

कविता

प्रकृति की हर शय में नज़र आता हूँ

मैं रंग हूँ जिस रंग में ढालोगे ढल जाऊंगा चेहरे पर सबके खुशियां मैं ले आऊंगा लहु में दिखता हूँ तो लाल बन जाता हूँ होली में खेलो तो गुलाल नज़र आता हूँ नारी की बिंदिया में भी लाल नज़र आता हूँ मांग उसकी मैं लाल रंग से सजाता हूँ गुलाब के फूल में देखो […]

कविता

भारत का तिरंगा झुकना नहीं चाहिए

नक्सलियों ने फिर एक बार सरकार को ललकारा है अपने देश की सुरक्षा में लगे 22 जवानों को धोखे से मारा है बीजापुर के गांव में नक्सलियों का डेरा था हिडमा की देख रेख में जवानों को यू शेप में चारों ओर से घेरा था गोलियां चलाई थी नक्सलियों ने रॉकेट लांचर थे दागे जवानों […]

कविता

नारी अब बेड़ियों से मुक्त हो गई है

गांव की बेटियों का रहा जलवा शहर पीछे रह गए कल तक जिन्हें पूछता नहीं था कोई आज वो वीआईपी हो गए जहां देखो अपनी बेटियां आज कमाल कर रही किसी भी फील्ड में आने से बिल्कुल नहीं डर रही चूल्हे चौके से निकलकर जा पहुंची आसमान अब किसी की मोहताज नहीं खुद की हो […]

कविता

खूब नाचेंगे सबके संग

आओ सब मिल कर खेलें होली पिचकारी से निकली रंगों की गोली गले मिलते हैं प्यार से एक दूसरे के निकली है मस्त मतवालों की टोली कोई पीले रंग में रंगा है कोई हुआ है लाल कोई फैंक रहा रंग पानी में डाल कर कोई फैंक रहा सूखा गुलाल उड़ रहा गुलाल छाई है मस्ती […]

कविता

वही लिखती है कलम जो लिखवाया जाता है

कलम अब बूढ़ी हो गई है न कलम में अब वो ताकत है झुक गए वो सर जो अकड़ के चलते थे समय की यही तो नज़ाकत है कलम अब अपने मन की नहीं लिखती वही लिखती है जो लिखवाया जाता है हकीकत में वो सब नहीं है होता जो वास्तव में दिखाया जाता है […]

कविता

मुश्किलों का सामना करो मत घबराओ तुम

कैसे लेते होंगे फैसला इतना कठोर कैसे इतना हौसला लेते होंगे बटोर न बीबी बच्चों की सोचते हैं न अपनों का क्या होगा जो मन में थे उन सपनों का गले में जब फंदा डालते होंगे कुछ पल तो अपने आप को संभालते होंगे ज़िन्दगी का अनमोल तोहफा देता है भगवान कैसे करते हैं फिर […]

कविता

स्त्री की व्यथा

हाँ मैं नारी हूँ नारी की पीड़ा कैसे समझाऊं मन में छुपे हैं भेद गहरे कैसे में इनको तुम्हें बतलाऊँ सीता बन कर जन्म लिया था महलों की मैं रानी थी दर दर भटकी बन बन घूमी ज़र्रे ज़र्रे की खाक छानी थी लौटी जब बनवास काट कर परीक्षा मुझे फिर भी देनी पड़ी मेरी […]