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  • चारा

    चारा

    बाजार से  गुजर रहा था, देखा एक व्यक्ति पक्षियों को खिलाने वाला दाना खरीद रहा था  ।  देखकर दिल खुश हो गया । कहाँ तो किसी व्यक्ति को किसी के बारे सोचने की फुर्सत नहीं और...

  • हमारी प्रगति की दास्तान

    हमारी प्रगति की दास्तान

    हमने कुछ वर्षों में इतनी उन्नति कर ली है की यदि आज रावण दुर्योधन कंस आ जाएँ तो हमारी उन्नति देखकर दांतों तले उंगलिया दबा लेंगें । वो बहुत इतराते थे की हमारे जैसा कौन होगा...

  • रंगों की कहानी

    रंगों की कहानी

    इक खरगोश था चिट्टा राम यार उसका, कौआ कालीराम ॥ खाना पीना और सो जाना सिवा इसके कोई और न काम ॥ इक दिन कालू कौआराम बोला चिट्टा राम से ॥ मैं काला तू चिट्टा गोरा...

  • अपनी भूख पराई भूख

    अपनी भूख पराई भूख

    सदर बाज़ार में कुछ काम था। काम करते करते काफी समय हो गया । भूख लगी थी सोचा काफी हाउस में बैठ कर कुछ खा लूँ। खाने के बाद एक छोटी पगडण्डी से होता हुआ मैं...