कविता

मेरे दिल में ख्याल आया है ।

अभी अभी मेरे दिल में ख्याल आया है, क़ि ख्याल दिल में क्यूँ आया दिमाग में क्यों नहीं आया है? लोग दरवाजे में खड़े होकर बात करते है, पीछे देखने के लिए भगवान् ने एक आँख को पीछे क्यों नहीं बनाया है? मेरे दिल में ख्याल आया है, प्याज टमाटर क्या भाव, कितने लाये? पूछकर, […]

राजनीति

भारत की छवि जिसमें सच्चाई है ।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी एक रिपोर्ट में खुलकर मोदी सरकार की आलोचना की। इसमें कहा गया है कि पिछले कुछ सालों के दौरान भारत में गोरक्षा के नाम पर अल्पसंख्यकों पर हिंदू संगठनों ने हमले किए। 2015 से 2017 के बीच देश में साम्प्रदायिक घटनाएं 9% बढ़ गईं। यह रिपोर्ट शनिवार को […]

बोधकथा

तीन प्रश्न और नानक जी के उत्तर

बग़दाद के एक शहर में पीर दस्तगीर का महल था । दस्तगीर अक्सर अपने में ही मगन रहते थे । एक दिन उनकी बेगम ने कहा की आप किसी गहरी सोच में डूबे रहते हैं आखिर ऐसी क्या बात है ? क्या बताऊँ बेगम कुछ अनसुलझी पहेलियों को सुलझाने में लगा रहता हूँ । पता […]

लघुकथा

कन्या पूजन

नवरात्रि समाप्त हुई और उस दिन कन्या पूजन था । नगर के विख्यात व्यवसायी धरमदास जी ने शहर के गरीब मोहल्ले से १०० से अधिक कन्याओं के कन्यापूजन के लिए एक बड़े पंडाल का प्रबंध किया था । जब हवन किया जाने लगा तो कन्याओं को एक लाइन में खड़े कर दिया गया और एक […]

ब्लॉग/परिचर्चा

कुमार विश्वास और सिख चुटकुले

‘पहले बात को तोलो फिर बोलो’ यह बात आम आदमी पार्टी से दरकिनार कर दिए गए कुमार विश्वास पर सही साबित हुई। भाजपा विधायक सीमा त्रिखा ने फरीदाबाद में काव्यांजलि नाम से यह कार्यक्रम पुलवामा शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित किया था जिसमें कुमार विश्वास को आमंत्रित किया गया था। विश्वास जी […]

इतिहास

सिख गुरुओं की शहीदी (अंतिम भाग-5)

उसी शाम सरहिंद का एक जौहरी दीवान टोडर मल, नवाब वजीर खान के दरबार में दो साहिबजादों और माता गुरुजी के शवों के अंतिम संस्कार के लिए उनके शवों को लेने के लिए पहुंचा। नवाब इस शर्त पर सहमत हुआ कि जितनी जमीन चाहिए उतने सोने के सिक्के जमीन पर बिछा कर जमीन ले सकते […]

इतिहास

सिख गुरुओं की शहीदी (भाग-4)

मुगलों से लड़ना है या नहीं इसी भ्रम में कई सिख मारे गए स्वयं गुरु गोविंद सिंह अपने तीन सिखों के साथ मालवा के जंगल में पहुँच गए । उनके दो मुस्लिम भक्त गनी खान और नबी खान ने उन्हें वहां से निकलने में बहुत मदद की । गुरु गोबिंद सिंह के दो छोटे बेटे, […]

इतिहास

सिख गुरुओं की शहीदी (भाग-3)

गुरु गोबिंद सिंह जी अपने पिता, नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर जी की शहादत के बाद ग्यारह साल की उम्र में 24 नवंबर, 1675 को गुरु बने। उन्होंने ने घोषणा की कि वह एक ऐसा पंथ बनाएंगे, जो न्याय, समानता और शांति बहाल करने के लिए जीवन के हर क्षेत्र में तानाशाह शासकों को चुनौती […]

इतिहास

सिख गुरुओं की शहीदी (भाग-2)

मुगल सम्राट जहाँगीर द्वारा अपने पिता, पांचवें गुरु श्री अर्जन जी के शहीद होने के बाद गुरु हरगोबिंद ग्यारह वर्ष की आयु में गुरु बनाये गए । सिक्ख धर्म के दस गुरुओं में से वह छठे नानक के रूप में प्रतिष्ठित थे। गुरु हरगोबिंद (19 जून 1595 – 3 मार्च 1644) ने सिख धर्म के […]

इतिहास

सिख गुरुओं की शहादत (भाग-१)

कट्टरपंथियों  द्वारा क्रूर हत्याएं कोई नई बात नहीं है । इतिहास के पन्नो से मैंने कट्टरपंथियों द्वारा सिख गुरुओं के साथ किये गए अत्याचार और उनकी शहादत के किस्से ढून्ढ निकाले हैं । मुग़ल सम्राट बाबर के समय गुरु नानक जी के पश्चात, गुरु परंपरा में चौथे उत्तराधिकारी गुरु राम दास जी थे । उनके […]