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  • // यह क्यों…? //

    // यह क्यों…? //

    // यह क्यों…? // दलितों की उन्नति पर व्यंगय, परिहास क्यों ? आक्रोश, जलन है नित्य आरक्षण के खिलाफ ? हजारों सालों से जाति, धर्म, सांप्रदाय के नाम पर वर्ण, जाति, वर्ग की नीति सवर्ण के...



  • ये मेरे अक्षर..!

    ये मेरे अक्षर..!

    सौरभ के नहीं ये अक्षर, मैले जीवन का है । धूलि-धूसरित होते हैं, ये अभाग्यों का है ।। हंसी खुशी इसमें नहीं, ये सिर का बोझ है । पीड़ामय जीवगति में, अश्रुजल का वेज़ है ।।...


  • // अहा ! जीवन..//

    // अहा ! जीवन..//

    हे जीवन ! तुम मन हो ! मानसिक क्रीड़ा हो ! प्राकृतिक नियमों को कभी तिरस्कार करते हो तो कभी स्वीकार कभी स्वीकार करते हो तो कभी तिरस्कार तुम्हारी सोच – समझ में रच पाते हो...

  • // जीवन पथ में…//

    // जीवन पथ में…//

    ये जरूरतें हैं, हमारे बीच में एक दूसरे को मिलती बंधु – बाँधव – मित्र – शत्रु, छल,कपट सभी जीवन में वो चलाती हैं ये जरूरते हैं जो अपना जाल बिछाते भोग लालसता की ओर खींचते...


  • // मैं भी…//

    // मैं भी…//

    मैं मनुष्य हूँ मेरा भी जीवन है मानवता का है विचार मेरा अच्छे समाज की परिकल्पना में आगे बढ़ना मैं अपना धर्म मानकर कदम-कदम बढ़ाता हूँ साहित्य के साथ नये विचारों को लेकर अनंत आकाश में...

  • हम भूले हैं..!

    हम भूले हैं..!

    हम भूले हैंं..! प्रश्न हैं कितने हमारे जीवन में अनादि से.. प्रश्न प्रश्न ही रह रहे हैं निज खोज के अभाव में धार्मिक विचार हैं अनेक पोथी पुराणों से जुड़कर अपने-अपने बढ़प्पन दिखाते इन प्रश्नों का...