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  • //  पाठ  //

    // पाठ //

    // पाठ // हर जगह यह क्या एक दूसरे पर चढ़ते हैं, पैरवी के जमाने में काले मुख हैं कितने अपना अखड़ दिखाते । बलवानों की दुनिया में वर्ण – वर्ग, जाति -धर्म की है बड़ी...

  • // स्वतंत्रता  //

    // स्वतंत्रता //

    // स्वतंत्रता // खिलने दो अपने आप इन नन्हें सुमनों को हाथ न जोड़ो ये मुरझा जाएँगे ये प्रकृति की भव्य संपदा, हर फूल में है अपार सुगंध खुलकर बाहर आने दो सारे जग में फैलाने...

  • // इंतजार में .. //

    // इंतजार में .. //

    // इंतजार में.. // संसार के ये घने बादल घुमड़ – घुमड़कर घेरे मुझे, गर्जन करते हैं बरसात की अविचल धारा बन बिगोते चले जाते हैं मैदान भूमि में,डटे रहते जिंदगी का खेल खेलते अविश्रांत खिलाड़ी...

  • // यादें .. //

    // यादें .. //

    // यादें…// कैसे सोता हूँ मैं आँखभरी नींद में आराम से.. सुखभरे इस पलंग पर! वो यादें हैं अतीत की अभी भी डबडबाई इन आँखों में चलचित्र है ईस्टमन रंग का। निर्जीव-जीव थे हम उस झोंपड़ी...


  • // यह क्यों…? //

    // यह क्यों…? //

    // यह क्यों…? // दलितों की उन्नति पर व्यंगय, परिहास क्यों ? आक्रोश, जलन है नित्य आरक्षण के खिलाफ ? हजारों सालों से जाति, धर्म, सांप्रदाय के नाम पर वर्ण, जाति, वर्ग की नीति सवर्ण के...



  • ये मेरे अक्षर..!

    ये मेरे अक्षर..!

    सौरभ के नहीं ये अक्षर, मैले जीवन का है । धूलि-धूसरित होते हैं, ये अभाग्यों का है ।। हंसी खुशी इसमें नहीं, ये सिर का बोझ है । पीड़ामय जीवगति में, अश्रुजल का वेज़ है ।।...