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  • कदम-कदम आगेे… ।

    कदम-कदम आगेे… ।

    वर्तमान कहता मुझे सुखमय जीवन का राह दिखाते हुए भूल जाओ अतीत की यादें। आइने में अपने सुंदर छवि को देखते मधुमय उपवन में आराम लेते चमक-धमकों के जग में तुम मशगूल होते अपने को धन्यभागी...

  • ।। दलित दलितहि लखै ।।

    ।। दलित दलितहि लखै ।।

    किसने देखा मुझे..? फटे-चीथड़ों में मनु-मरूभूमि में अधनंगे भटकता था मैं रेगिस्तान की रेत चहुँओर कड़ी धूप में भूख और प्यास के दरद में जीवन मरर्म की तलाश आग की ज्वाला रही हरपल मेरे अंदर। किसने...

  • जला देंगे…।

    जला देंगे…।

    ।। जला देंगे..।। यही था हमारा सर्वश्रेष्ठ मध्यम मार्ग जो अनादि काल का उन्नायक जीवन एक दूसरे के साथ जिस किसी की निंदा व स्तुति कहीं न रही.. इसी महान शीतल छाया में दिव्य योग साधना...

  • एक दिन अवश्य ऐसा हो

    एक दिन अवश्य ऐसा हो

    एक दिन अवश्य ऐसा हो… श्रमधन का मूल्य जन मानस में दिव्य शोभा बनेगा श्रम बिंदु मोती बनकर मानवता के शिरोमुकुट में जगमग-जगमग चमकेगा । एक दिन अवश्य ऐसा हो… संकुचित कुटिल मन पीड़ा का जाल...


  • कविता : पहला कदम

    कविता : पहला कदम

    घेरे हुए थे मुझे चारों ओर से पीड़ामय जग के सारे बादल काले अपनी अँधेरी झोंपड़ी में अकेले बैठा मैं देख रहा था आशा में अंबर की हर चमक कि अब खुल जायेगा जीवन का रास्ता...