कुण्डली/छंद

मनहरण घनाक्षरी छंद

रोज़ – रोज़ करो योग , भागें दूर सभी रोग , तन मन रहे खुश , ताज़गी ले आइये । योग मतलब जोड़ , लस तुम दो छोड़ , लगाओ तुम रोज़ दौड़ , योग अपनाइये । अनुलोम विलोम भी , रोज़ जपो तुम ओम , योग बनता है सोम , पीते बस जाइये । […]

कविता

शालिनी छंद

मीठी बोली, आज से बोलनी है। जो भी बोलो, बात तो तोलनी है।। आओ आओ, आज तो गीत गायें। खेलें साथी, मीत सारे बनायें।। ज्ञानी तो हैं, ज्ञान देते सदा ही। लेना जो भी आज वो तो बंदा ही।। बाधाएँ जो, राह रोके तनी हैं। वो ही देखो, राह देने बनी हैं।। चट्टानें तो, हैं […]

शिशुगीत

लोरी

चंदा के झूले पर चढ़कर , वही निंदिया फिर आयेगी सपनों के देश में अभी ही , हिंडोले वही झुलायेगी ….. चाँदी की कटोरी में सुनो , खाना तुझको खिलायेगी फूलों की शय्या पर तुझको , बिटिया अब तो सुलायेगी परियाँ मिल कर सारी ही तो , तुझे नाच भी दिखायेंगी ….. सपनों के देश […]

कुण्डली/छंद

कुण्डलिया छंद : कोरोना

कोरोना से डर नहीं , भीड़ में नहीं काम । कोरोना से बच रहो , लेना प्रभु का नाम ।। लेना प्रभु का नाम , करें कष्ट दूर सारे । घर के अंदर रहो , सभी बंद करो द्वारे ।। छूना जो कुछ सुनो , तभी रगड़ हाथ धोना । मज़ाल जो अब छुए , […]

कविता

उज्ज्वला छंद

प्यार से तुम लगा लो गले । पाप से हूँ भरा मैं भले ।। बाँह मेरी थाम लीजिए । दर्श अपना दिखा दीजिए ।। मत किनारा करो आज तो । आशीष दे करो राज तो ।। भक्ति साज तो देना हमें । कष्ट से अब उतारो हमें ।। थाम कश्ती को लो न कभी । […]

कुण्डली/छंद

मनहरण घनाक्षरी छंद

आई देखो है लोहड़ी,  खुशियाँ नहीं हैं थोड़ी, बना बनाकर जोड़ी , खुशियाँ मनाइये । तिल गुड़ लाओ सभी ,  पूजा करो सब अभी , मिलजुल कर सभी ,  आग तो जलाइये । झूम – झूम नाच कर , दिलों को भी बाँच कर, मन सदा साँच कर , एकता जगाइये । संक्रांति तो महान […]

सामाजिक

जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन वैसी

तुलसीदास जी की चौपाई की ये पंक्तियाँ विचारणीय हैं , जिन पर काफी कुछ लिखा जा सकता है । इन पंक्तियों का अर्थ हुआ कि किसी भी चीज़ के प्रति मनुष्य की जो भावना होती या वह उसे चाहे किसी रूप में दिखे या उसकी अंतर्दृष्टि उसे जो आदेश देती है , तो वह उसे […]

कविता

मन निर्मल

प्रथम वर्षा पर बहुत गंदा था पानी कचरा – मिट्टी  , गंदगी समेटे बिल्कुल भूरे रंग में । बह रहा था पर  , धीरे – धीरे प्रतिपल , प्रतिदिन छनता गया पानी और निर्मल हो गया एकदम पारदर्शी । इसी तरह जीवन में जब होती है , सद्विचारों की वर्षा तन – मन निर्मल होकर […]

गीत/नवगीत

गीत – बेटी

बाबुल के आँगन की बेटी , न हुई कभी परायी है जुदा होने की जो सोच लूँ , दिल दे तभी दुहाई है ….. छोटी गुड़िया है यह बेटी , यह कितनी भोली है सुन अँगना में खेली है यह तो , गुड़ की भेली है सुन वह खुशी अभी घर – आँगन में , […]

कुण्डली/छंद

मनहरण घनाक्षरी – दान

दान होता महादान, करो वस्तु तुम दान, धन दान, रक्त दान, दान कुछ कीजिए। दान देना नेक काम, करे कोई जलपान, अन्न दान बड़ा काम, क्षुधा शांत कीजिए। सब अधिकार जान, करो तुम मतदान, दान का महत्व जान, दान सदा दीजिए। नीच – ऊँच का न भेद, देता तुम्हें सदा देव, सदा हो ही सत्यमेव, […]