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  • हकीकत

    हकीकत

    गर सच तुझमें ! झूठ के साथ, दोस्ताना कैसा ? है ! मुझमें ही फरेब । तो , ये निभाना है कैसा ? प्यार नहीं तो, दिखावा है क्यूँ ? चेहरें पे सतरंगी ये मुखोटा कैसा...






  • अज्ञानी

    अज्ञानी

    अधूरे ज्ञान पे , तुझे, अभिमान कैसा ?   अधंकार  मिटाती है चादँनी , फिर,सूरज को खुदपे  गुमान कैसा ?    बिक जाए कुछ टूकडो मे ,  लोगों का वो !   इमान कैसा ?  ...