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  • लघुकथा –सम्मोहन

    लघुकथा –सम्मोहन

    हर्ष और मीता विवाह के बाद हनीमून पर घूमने अपनी कार में शिमला जा रहे थे| दोनों बहुत खुश मुड में गुनगुनाते और मुस्कराते जा  रहे थे| हर्ष को जम्हाई सी आने लगी बोला, “कुछ खा...

  • गज़ल

    गज़ल

    गज़ल १२२ १२२ १२२ १२२ खिलाफत लगी यूँ कि उलझा रही है गुलो में सियासत घुली ज़ा रही है. सियासत लियाकत कही भा रही है सियासत में नफरत उकसा रही है. लगी जिन्दगी रोष सी ज़ा...

  • गज़ल

    गज़ल

    दिखाई दिए यूँ कि बेख़ुद किया 🌀वज़्न–122 122 122 12 बढाओ न तुम इतनी भी दूरियाँ कि आने लगे  याद में  सिसकियाँ.   रहो दूर चाहत लिखे चिट्ठियाँ हुई जो कमी माफ गलतियाँ. उदासी भरी मोसमी...

  • बाल -गीत

    बाल -गीत

    जो चादर देख पाँव पसारते, जरूरतो में कभी न हारते . न मुश्किल में हाथ पसारते , न रिश्तों में कभी धन तलाशते. बिना सोचे जो करते खर्चा , उनका बिलो का घना पर्चा . मेहनत...

  • गीतिका

    गीतिका

    माँ 2122 1212 22 हर मुसीबत समय खड़ी है माँ आह सुन गम लगा बढ़ी है माँ| चेहरा झलक नूर छाया सा चाँद सूरज सी रौशनी है माँ | तू भवानी सदा निभानी है शष्ट मिली...


  • गीतिका

    गीतिका

    2122 1212 22 (112) प्यार के दीप जो जलाते हैं लव शिकायत वही भगाते हैं. लाख हो ऐब अपने बच्चों मे। माँ कि आंखों सदा समाते है। किस तरह आसमाँ घुमे आये जग नया कारवां दिखाते...

  • गज़ल

    गज़ल

    मोसमी दाब है बयानों से बात बनती नहीं सितारों से जुर्म है ये तरस किनारों से हो गई दुश्मनी नजारों से हाल दिल का ज़ुबाँ नही कहना बात फैले कही दीवारों से दूर तक कुछ नजर...

  • लघुकथा – इन्तजार

    लघुकथा – इन्तजार

    कुम्भ के मेले में बिछड़ एक बुढिया सीढियों पर बैठी अपने परिवार का इन्तजार कर रही थी| तभी एक सज्जन की नज़र उस पर पड़ी और पूछा, “माताजी, अब कोई नहीं आएगा, तुम्हारा परिवार तुम्हें छोड़...

  • लघुकथा – फैंसी ड्रैस

    लघुकथा – फैंसी ड्रैस

    सलाना समारोह बाद कालिज में फैंसी ड्रैस प्रोग्राम होना था| रीना और सुरिंदर दोनों अपनी टूयूटर के पास नाम लिखवाने गयीं| टूयूटर बोली, “पहले आना था अब प्रतियोगी गिनती पूरी हो गई है|” दोनों ने बहुत...