गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

नशा दम्भ तो प्रबल बहुत है गलत राह पर लाये, धन, सत्ता के मोह अनूठे चाहत मन की दौड़ाये मान जान के कभी मिला ये अवसर सब भूले असल कौन दीन की चिंता करता निज हित में खो जाये पहन धवल महगे से कपड़े उजले दीखते घूरी ले मन मैला काले से तरीके सोच किसी […]

कविता

समर्पण -कविता

घर बार बच्चे देखती भुल गई अपनी स्वतंत्रता नहीं याद मुझे क्या जीना करूँ बस हर पल मंत्रणा। मेरा नाम और रिश्ता भी सब के सामने निरर्थक सा कोई मेरी कीमत नहीं जान एक सुबिधा हमदर्दी करुणा। तुमसे सीखे तौर-तरीके, क्या तुम मेरे सीखोगे। हर पल मुझसे जीतते आए, अब और कितना सहना| अपने छोड़े […]

गीतिका/ग़ज़ल

मुश्किल

मुश्किल तो जीवन में आती रहती है अपना वास्ता हमसे बनाती रहती है| ये हमारी नियत है सामना करें बचें, ये तो नया राह सा दिखाती रहती है| कोई मुश्किल राह रोक नहीं सकती, दया हमारा दिल तोड़ ज़ताती रहती है| दुखी बेआसरा, मजबूरी या बुढ़ापा, जीना तेरा, देता हमें दर्द दया भाती है| . […]

गीतिका/ग़ज़ल

दोहागजल

सावन महिना आ गया,बरसे जल खुब जोर पेड़ों पर फल लद गये, नाचे मन का मोर|१ रिमझिम रिमझिम हो रही,लिये घटा संगीत तडपे गोरी रात भर, पास नही जब मीत|२ धरती हर्षित हो रही,दिखें घटा घनघोर पुरवायी भी कर रही,मधुर मनोहर ओर|३ सावन का मौसम सदा, होता बड़ा हसीन लगती है इस मास में, कुदरत […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

महका महका मधुबन जैसा कोरा मन है दरपन जैसा काली मतवाली अँखियों में घिर आया कुछ सावन जैसा इतना अपनापन है दिल में लगता है घर आँगन जैसा अँगड़ाई लेता है यौवन रूप सजा कर दुल्हन जैसा सौ बल खाता लहरा कर तन दम – दम दमके कंचन जैसा आँखों में ये क्या छलका है […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

तुम सदा हो प्रिये और मैं हूँ नमन । मानकर भी हमारा न होगा मिलन। पल दिखा  मौज मस्ती  फिर सूनापन जो मिला भी हमें हो हँस में यूँ चलन . आज़ दुनिया दिखी साथ में हो सजन सोचते जो खला बात में ये चलन . हम डरी चाहतों का न होगा शगुन . पल […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

आधार छंद : महा लक्ष्मी /मापनी – 2122 1212 22(112) आपको  खुशी की आस रहे ज़िन्दगी तेरे आस-पास रहे| मायुसी की  ठहर रास न हो रोज थोड़ी नयी  आस रहे| होश खोकर न वो निराश रहे मन छुपे  ज्ञान तलाश रहे | जिये तो सब्र विकास लिये हर खुशी में बसे पास रहे | पल भर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका प्रदत्‍त छंद

  छंद- चामर (वार्णिक) मापनी- 212 121 212 1,21 212 पदांत- हो गया. समांत- आन 212 121 212 1,21 212 राम राज का समाज ले निशान हो गया। आज ये सभी कहें भला मकान हो गया।। जान शरण के करीब सा मुरीद हो गया। करन आस में ढला बना महान हो गया।। एक बुढा तड़फ […]

लघुकथा

लघुकथा – “ऊर्जावान सुख”

विधार्थी निमित का अपने प्रोफैसर को फोन, “मैम्, मैं लांकडाउन में बहुत खाली बैठा दुखी हो रहा हूँ. घर में सारा दिन संगीत सुन कर भी तंग आ गया हूँ, क्या करें.” प्रोफैसर प्रेरणा, “ ओफ ! इस वायरस की वजह से सलाना परीक्षा तो हो नहीं सकती. वो तो जैसे हमें आदेश होंगे आप […]

कविता

ए मेरे मन

ए मेरे मन तू जिंदगी को जी, उसे समझने की कोशिश न कर। सुन्दर सपनों के ताने बाने बुन, उसमे उलझने की कोशिश न कर। चलते वक़्त के साथ तू भी चल, उसमें सिमटने की कोशिश न कर। अपने हाथो को फैला,खुल कर साँस ले, अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर। मन में […]