गीत/नवगीत

गीत

रिश्तों नातो के ढंग कमजोर से, टूट जाते हैं खींचे हम जोर से. पड़ी हैं इनमे मतलब की गांठे,अब खुलती नहीं ये प्रीति डोर से. पहले तो हममें शराफ़त थी, अब तो कामयाब से और हो गए, इसीलिए हमसे दूर होकर से , मन में भरे प्रश्न ले भीति हो गए. जब तक उनको हां […]

कविता

कविता – ममतामयी नारी

मैं नारी हूँ माँ,अम्माँ, जननी,मैया कहते मुझको बन ममतामयी चाह पद निभाना हैं सब मुझको। नवरात्रों में पुजा होती, कंजक की दुर्गा सी सबके, धन की देवी सी लक्ष्मी गान है अपनापन बनके। मातृभूमि की रक्षा हित हुई वीरांगना लक्ष्मी बाई, दुश्मनों विरोध में सबसे पहले अलख जगा छाई| मीरा बनकर कान्हा की भक्ति में […]

गीत/नवगीत

गीत

नशा नशा नशे गम में ज़िंदगी चली है धुँआ धुँआ बिखरे से हम यूँ ही मिली है. युवा की ज़न्नत यही उनकी ख़ुशी है , खोया खोया रोया दिखे ले मयकशी है अब तो इस मोड़ ही पाई सब ख़ुशी है.. नशा नशा। हो इसी ने जिन्दा रखा इसी ने ही मारा इसका चोली दामन […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

चपला सी वह चंचल है , लहरों सा पाना, माँ बाप की उसको दिल की धड़कन माना कन्या भ्रूण हत्या कर तू बनता अंजाना, बेटी मेरे सूनेपन के होठो का अफ़साना सुता तो कुदरत का अनुपम वरदान सी है, दुनियाँ के लिए भरपूर प्रेम मान निभाना माता-पिता के घर की शान होती है बेटी, दो […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

नशा दम्भ तो प्रबल बहुत है गलत राह पर लाये, धन, सत्ता के मोह अनूठे चाहत मन की दौड़ाये मान जान के कभी मिला ये अवसर सब भूले असल कौन दीन की चिंता करता निज हित में खो जाये पहन धवल महगे से कपड़े उजले दीखते घूरी ले मन मैला काले से तरीके सोच किसी […]

कविता

समर्पण -कविता

घर बार बच्चे देखती भुल गई अपनी स्वतंत्रता नहीं याद मुझे क्या जीना करूँ बस हर पल मंत्रणा। मेरा नाम और रिश्ता भी सब के सामने निरर्थक सा कोई मेरी कीमत नहीं जान एक सुबिधा हमदर्दी करुणा। तुमसे सीखे तौर-तरीके, क्या तुम मेरे सीखोगे। हर पल मुझसे जीतते आए, अब और कितना सहना| अपने छोड़े […]

गीतिका/ग़ज़ल

मुश्किल

मुश्किल तो जीवन में आती रहती है अपना वास्ता हमसे बनाती रहती है| ये हमारी नियत है सामना करें बचें, ये तो नया राह सा दिखाती रहती है| कोई मुश्किल राह रोक नहीं सकती, दया हमारा दिल तोड़ ज़ताती रहती है| दुखी बेआसरा, मजबूरी या बुढ़ापा, जीना तेरा, देता हमें दर्द दया भाती है| . […]

गीतिका/ग़ज़ल

दोहागजल

सावन महिना आ गया,बरसे जल खुब जोर पेड़ों पर फल लद गये, नाचे मन का मोर|१ रिमझिम रिमझिम हो रही,लिये घटा संगीत तडपे गोरी रात भर, पास नही जब मीत|२ धरती हर्षित हो रही,दिखें घटा घनघोर पुरवायी भी कर रही,मधुर मनोहर ओर|३ सावन का मौसम सदा, होता बड़ा हसीन लगती है इस मास में, कुदरत […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

महका महका मधुबन जैसा कोरा मन है दरपन जैसा काली मतवाली अँखियों में घिर आया कुछ सावन जैसा इतना अपनापन है दिल में लगता है घर आँगन जैसा अँगड़ाई लेता है यौवन रूप सजा कर दुल्हन जैसा सौ बल खाता लहरा कर तन दम – दम दमके कंचन जैसा आँखों में ये क्या छलका है […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

तुम सदा हो प्रिये और मैं हूँ नमन । मानकर भी हमारा न होगा मिलन। पल दिखा  मौज मस्ती  फिर सूनापन जो मिला भी हमें हो हँस में यूँ चलन . आज़ दुनिया दिखी साथ में हो सजन सोचते जो खला बात में ये चलन . हम डरी चाहतों का न होगा शगुन . पल […]