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  • गज़ल

    गज़ल

    वो खत के पुर्जे उडा रहा था हवाओ का रुख दिखा रहा था बन लत ये नशा बढा रहा था सदाओं का हस्र दिखा रहा था मिला जो अपने हिसाब मन जो बफाओ का रुख दिखा...

  • गीतिका

    गीतिका

    सूरज छिपा तो जब अँधेरा भी बढ़ाता आ गया आभास होते ही लगा रोशन जमाना आ गया जीवन सदा बीता लगा चाहत निशाना हो बना अब कर रंज मन में लिया सा जो सुनाना आ गया...

  • लघुकथा : ऊँची उड़ान

    लघुकथा : ऊँची उड़ान

    रीना को नौकरी करते पन्द्रह साल हो गये थे, न कोई तरक्की मिली ना ही तनखाह बढ़ी| आखिर उसने मन कडा कर नौकरी बदलने का फैसला कर लिया| जब ये बात अपनी एक सहेली से शेयर...

  • गीतिका

    गीतिका

    बहरा भी सुन रहा है, गूंगा भी गा रहा है जब कान्हा सुनी बंसी मन बुला रहा है वो जोश दोस्ती की पल पल घटा रहा है अनजान हो ज्ञान प्रभु को भुला रहा है उम्मीद...

  • स्वैच्छिक गीतिका

    स्वैच्छिक गीतिका

    चाहतें पूरी हों तो इसके लिए मानने वाला भी अच्छा चाहिए कौन सा सबको बगीचा चाहिए सर छुपाने को तरीका चाहिए आस पानी की सभी को है लगी हर किसी को ही नदिया चाहिए मिल हटाये...

  • मुक्तक/दोहा

    मुक्तक/दोहा

    ★ दो दोहा मुक्तक ★ १ जरा बदल माँ तकदीर, नित पूजे तश्बीर चिन्ता हटा मन अधीर ,काम में कर्मबीर. हम तेरी लगन में खो मांगे जीवन आज रिपु को जन्मभूमि मिटा लगे जग रणधीर. २...

  • गज़ल

    गज़ल

    2122 2122 212 आपका शिकवा पुराना हो गया आज मौसम भी सुहाना हो गया | महज खोजें जो खुशी अब ले बढ़े बस सुना गीतों हँसाना हो गया | खायशे पाये जो बड़ी कह लव खुले...

  • लघुकथा – अकेली औरत

    लघुकथा – अकेली औरत

    धनदेबी क्षोभ की प्रतिमा बनी एक औरत पेड़ के नीचे लाठी पकड़ी चुपचाप बैठी थी| अनजान दो आंखे उसे कुछ दूरी पर खडी उसे देख रही थी | वो अजनबी को अपने निकट आते देख कर...

  • गज़ल

    गज़ल

    अब चमन नया बनाएँगे फूल न यहाँ मुरझाएँगे| सच को थामे जग में ही भ्रम को सब हटाएँगे | सात रंगो की ले चाहत खिलते लव मुसकाएँगे| जब मुश्किल की आहट हो पीछे हट ना पाएँगे|...

  • जिंदगी खवाब है.

    जिंदगी खवाब है.

    आरजू संयुक्त परिवार में पलकर बड़ी हुई ,उसे सबका खूब प्रेम मिला था| आज विवाह के बाद भी हंसते-खेलते परिवार की तमन्ना लेकर आई थी| आरजू स्वाभाव की भली, हंसमुख और सबसे मिलनसार रहती | सब...