गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

कोयल का गीत एकांत में पुकारता है शायद अपनों की मौजुदगी तलाशता है . डाली अम्बुज पर काली बैठी झांकती है दूर तक दृष्टि फैला हर क्षण आंकती है. खालीपन ख़ामोशी में पेडो का दायरा सा यही सब यादे अपनों की खोज ताकती है. कही कोई गुजरी घटना दर्द की वजा है लगता अकेलापन ही […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

मेरा दिल अजव प्रेम दर्पण दिमाग सांचा बशीभूत अर्पण नेक स्पर्श में हलचल स्पंदन बोझ जोश में भरा  रूखापन. हर्ष और गम सदा उलझाते सभी भावों अभिव्यक्ति बंदन. क्रोध में तन्दूर मन  मंथन रच शांत पाता धर्म निरंजन. दूध उफान सा उग्र पाता मिल दिल दिमाग संतुलन. लिखने लिए न जमीर सौदा “मैत्री”हासिल हो सभी […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

पीने को जल कमी है, होठों को मल रहे है हम रोज़ थोड़ा थोड़ा साँचों में ढल रहे हैं| रहने को ज़मी कमी है, हाथों को मल रहे हैं इक दूजे के दिलों से, फिर क्यों निकल रहे हैं| क्या अदब सा दिखा है , लोगों में हुनर लिया सा मंजिल खड़े निकट ही , […]

कविता

बीत रहा…

बीत रहा जाने वाला साल , आया कुछ यादो का ख्याल। बीते दिन जा रहे भूले ख्याल से , है आमद में बचे ले सवाल से। चिड़ियाँ चहक रही पेड़ों पर, ज़िन्दगी महक रही घेरो पर। आशा में रही तन्हाई देरो से , उदय ना सूरज तम के फेरों से। भोर हुआ दिल ना कभी […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

जिंदगी गाकर सजाकर देखिए बंदगी बनकर निखर कर देखिए जब लिये मकसद नये से आएगी चाह हो तो सर झुकाकर देखिए है अगर जीना तो मरकर देखिये और जुड़ना तो बिखरकर देखिये शिद्दते-एहसास क्या शै है बढ़े दान दामन से लिपटकर देखिये हार में तब्दील सारी आरज़ू हुई और ना अब रग जगाकर देखिये नूर […]

लघुकथा

लघुकथा – जीवन-चाहत

जीवन सिंह घर के बाहर किसी बुरी आशंका में खड़ा भयभीत था| “प्रेरणा का आज नतीज़ा आना था, कुछ बुरा न होवे, अभी तक घर नहीं आई| वाहर हालात भी ठीक नहीं रव सुख करें|” उसी समय एक मोटरसाईकल से खुशी से कूदती प्रेरणा पापा से लिपट गयी| प्रेरणा, “पापा, मैं क्लास में प्रथम आई […]

लघुकथा

लघुकथा आरोप–प्रत्यारोप

सास दूसरे शहर से नौकरी कर आये बेटे विनय को बहू के बारे में अनाप-शनाप कह रहा थी। अभी विवाह को महीना भर ही हुआ था| बहू घर के कायदे-ढंग सही से जान भी नहीं पाई थी| रात को विनय नौकरी से आया और पत्नी ने अपने हिसाब से रसोई में काम किया| सुवह सास […]

लघुकथा

लघुकथा -नया रास्ता

अखिलेश प्राईवेट नौकरी में काम अधिक और कम वेतन से बहुत परेशान रहता था|हर समय परिवार में पैसे को लेकर खीछ –खीछ होतीं रहती थी,कभी अखिलेश दुखी होकर नाराज़ होकर आपा खो बैठता था | पत्नी मोना यूँ तो बहुत किफायत से घर चलाती थी पर बच्चों को अच्छें स्कूलों में पढ़ाने के कारण फरमाईशों […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

माँ की दुआ से जीवन कश्ती में बैठा हूँ कश्ती की किस्मत में अब तूफ़ान कहाँ, लाखो तूफान “रेखा” जीवन सिंधु में आए तूफान से निकलना हो था  नादान कहाँ, बेल मछलियाँ हुई पानी के दरमियान जाल बिछाए बैठे मछेरे लगे हैवान कहाँ, ऊँची –ऊँची लहरों में ताकत भरे निशान, इंसानों से दुनिया को कर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

फूल सा तो जीवन खिलाना गम कांटे हमेशा छिपाना. मृदु बातों को सुनते जाना अपनी राहें सुगम बनाना . हर रिश्ते को खूब निभाना सीखो सबको सदा हंसाना. नातो में तूम महक लाना मुश्किलों में ना हार जाना . लोग खुश जान हंसी बढाना बात मजाक से मत चिढाना. दिन ढले ही प्रभु गीत गाना […]