Author :


  • गज़ल

    गज़ल

    पानी यूँ बरसा हर कोना सा रहा तरसा जल-थल कही थोडा कही वेहिसाब गहरा कही तुफान सा तबाही भरा जलवा माना कुछ दिन अभी आये तो सहना होगा ठहरा सुमंदर का कतरा काफी हैं रंग जमाने...

  • जन्मदिन

    जन्मदिन

    रेणु के ससुराल में विवाह के बाद ही बेटे की रट सी लगी रहती थी| कई बार तो नौकरी और घर के काम के साथ, ये अनजाना सा भय उसे परेशान करता रहता था| प्रभु की...

  • गज़ल

    गज़ल

    क़ाफ़िया – आर रदीफ़ – निकले 122 122 122 122 मतलबी सियासत लिये कदम निकले जो गहरे में उतरे गुनहगार निकले| रहे दखल में जों इरादा भले सा बढ़ी आदतन तो तलबगार निकले। मिला  गम मुनासिब...

  • कविता

    कविता

    – तुलसी हमको बचपन से प्यारी तुलसी इस युग में है अवतारी तुलसी हर घर जन लगी दुलारी तुलसी | गमला धरती सब प्यारी तुलसी कार्तिक पूजन तैयारी तुलसी हर नारी पूजन वारी तुलसी | हर...

  • संस्मरण – मण्डप के नीचे

    संस्मरण – मण्डप के नीचे

    अभी कुछ साल पहले मेरी नन्द की बेटी की शादी फिरोजपुर जाकर करनी पड़ी |नन्द-नन्दोई इंतजाम के लिये पहले चले गये|हम नानका मेल और उनकी दो बेटियां और दामाद साथ थे| रास्ते भर गाडियों में बैठे...

  • लघुकथा – शादी-सम्मेलन

    लघुकथा – शादी-सम्मेलन

    श्रद्धा अपनी सहेलियों के साथ ट्रेन में परीक्षाके बाद विवाह के लिये घर आ रही थी| दोनों सहेलियों के साथ श्रदा अपनी बर्थ पर बैठी थकी सोने की तैयारी व्यस्त लगी| जब श्रदा को हिलते देखा...

  • कविता – अंतर्द्वंद्व

    कविता – अंतर्द्वंद्व

    कभी राह दुर्गम धोखा  सा बनाती है भर पथ में पाहन खड्डे से बताती है. मिला जो वाट हर पल बैरी डराते है उसकी  चालें अपनों में अंकुश सुनाती है. जिसे कुदरत सिखाती है जमी का...

  • कविता

    कविता

    कविता जीवन जलधाराओं सा चलता हो जाये हर पहलू सा हर्ष सा खिलता हो जाये | भीगू जल में बरसते कितना तपन हो मन समर्थता लिये हल मिलता हो जाये| नाचू कथकली थिरकते से लिये कदमो...

  • लघुकथा –सम्मोहन

    लघुकथा –सम्मोहन

    हर्ष और मीता विवाह के बाद हनीमून पर घूमने अपनी कार में शिमला जा रहे थे| दोनों बहुत खुश मुड में गुनगुनाते और मुस्कराते जा  रहे थे| हर्ष को जम्हाई सी आने लगी बोला, “कुछ खा...