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  • गीतिका

    गीतिका

    मापनी- 221 2121 1221 212 घर को नये निर्माण दिखाती हैं नारियाँ हर क्षेत्र में रुझान जगाती हैं नारियाँ। अरमान से बना के पकवान गा रही हर पर्व खुशी से बहलाती हैं नारियाँ। मुश्किल घड़ी लगे...

  • लघुकथा – उत्सव

    लघुकथा – उत्सव

    ज़मींदार करतार सिंह के बड़े बेटे के लड़का हुआ| सारा परिवार बहुत खुश था| करतार सिंह की तो बात ही अलग थी| घर में लड्डुओ के डिब्बे ला रख दिए| सब बधाई देने वालों को खाली...


  • लघुकथा – अजीब दास्तान

    लघुकथा – अजीब दास्तान

    निशा की सहेली मीनू को कुछ समय बाद मिलना हुआ ,उसे देख होश उड़ गए| निशा ने उसकी उदास सूरत बिखरी पर्सनाल्टी का कारण पूछा”,पहले तो बातों में टालती रही फिर रोने लगी बोली”,मेंटल डिसोर्डर’ हो...

  • गज़ल

    गज़ल

    अजीब नशा मुझी पर मुख्तसर गया देखा कहीं अजीब शक्ल रात डर गया हर ले नक़्श तमन्ना का हो गया लगा धुंधला सा था ज़ख्म मेरे दिल का भर गया जीवन बना दूभर जो पाया असर...


  • लघुकथा : तमाचा

    लघुकथा : तमाचा

    “नवल, मुझे आज प्रिसिपल के घर ज़ा कुछ पेपर पर दस्तखत करवाने हैं, फिर नई जगह हाजरी देनी है| नहीं तो मेरी पिछले मास की तनखाह रुक जायेगी|” नवल और नमिता के विवाह को थोडा समय...

  • गीतिका : गुरु –महिमा

    गीतिका : गुरु –महिमा

    मान गुरु कहना सफल होते हैं ज्ञान महिमा से कुशल होते हैं | रोज़ हो गुरु मान दृढ़ हो सीखे पथ दिखाने में प्रबल होते हैं | हैं खज़ाना दान जो कम होते प्रेम पाये से...

  • गज़ल

    गज़ल

    बनी अब जिंदगी हो भार तय है अदालत में हमारी हार तय है| लगा ये आदते में सोच फ़ानी मिला जो भी भला किरदार तय है | पहन कर जो दिखे दस्तार सर पे असल नेता...

  • गज़ल

    गज़ल

    वो खत के पुर्जे उडा रहा था हवाओ का रुख दिखा रहा था बन लत ये नशा बढा रहा था सदाओं का हस्र दिखा रहा था मिला जो अपने हिसाब मन जो बफाओ का रुख दिखा...