धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

राम जन्म भूमि

हिंदुओं को दावा है कि यह जगह भगवान राम की जन्मभूमि है साल 1528: मुगल बादशाह बाबर ने (विवादित जगह पर) मस्जिद का निर्माण कराया। यहां पहले एक मंदिर था। साल 1853-1949 तक: 1853 में इस जगह के आसपास पहली बार दंगे हुए। … साल 1949: असली विवाद शुरू हुआ 23 दिसंबर 1949 को, जब […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

लगाये पंख सपनों से गगन की हूर होती है चले जब वक़्त का चाबुक वही बेनूर होती है दिखे किरदार में आशा भरी सी नूर होती है ढले हालात मौको पे ठगी सी जरूर होती है न पाया संग न हर्ष खोजे भलाई ठौर ले चलना बनी पहिचान चाही उमंग हर बेनूर होती है सभी […]

लघुकथा

अवसरवादी

अवसर का लाभ उठाकर अपना काम सिद्ध कर लेने वाला ही अवसरवादी कहलाता है। इंसान को जीवन में बहुत से ऐसे अवसर मिलते हैं जिसमें वह अपने हित के काम साध सकता है और कुछ लोग साध भी लेते हैं। खास तौर पर सरकारी कार्यों में अपना हाथ जगन्नाथ करने का हर किसी का प्रयास […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

झूठें सब फसाने सुनाने से क्या फायदा बेवज़ह किसी को सताने में क्या फायदा. बड़े बोल को सुनाने से भला क्या फायदा दूसरें मसलों में टांग अड़ाने में क्या फायदा. हिम्मत है तो जाओ तुम मदद सुझाब को बातें उसकी बढ़-चढ़ फैलाने में क्या फायदा. दो अधिकार भी बेटी को भी बराबर का सा वरना […]

लघुकथा

लघुकथा – दरार

हेमा अपने पति के साथ लेटी नींद न आने के कारण दीवार की दरार को देख रही थी| ये दरार सिमिंट पर पड़ी थी जो कभी भर नहीं सकती थी| हेमा पति को बोली, “एक वर्ष हो गया हमारे विवाह को| आपने विदेश जाने के लिये अभी तक अपने कागज-पत्र ही नहीं बनवाये|” पति-पत्नी और […]

लघुकथा

लघुकथा “छबीस जनवरी”

लघुकथा “छबीस जनवरी” “गुरमीत, तुमने सारा समान खरीद लिया, लड़कियों के मेक-अप और कुंदन सैट बगैरा,” तरु ने पूछा| नहीं तो मैं बाजार जा रही हूँ कुछ ओर लाना है तो ले आऊंगी| कल २६ जनवरी को सुवह जल्दी आठ बजे स्कूल की लड़किया को स्टेडियम ले जाना है| ऑटोज का  इंतजाम भी कर आऊंगी| […]

इतिहास

पन्ना धाय के पुत्र बलिदान की कविता.

मेवाड़ के भावी शासक सहायक पन्ना पुत्र का बलिदान किया। पन्नाधाय ने अपनी ममता, स्नेह, रियात को कुर्वान किया। देहांत हुआ जब राणा सांगा का पुत्र उदय सिंह बनवीर कर सौंप दिया पालन पालन का अधिकार से बनवीर को क्षण जोंर दिया। नहीं पता था मन में कालुष बनवीर के एक दिन आएगा लोभ के […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

कोयल का गीत एकांत में पुकारता है शायद अपनों की मौजुदगी तलाशता है . डाली अम्बुज पर काली बैठी झांकती है दूर तक दृष्टि फैला हर क्षण आंकती है. खालीपन ख़ामोशी में पेडो का दायरा सा यही सब यादे अपनों की खोज ताकती है. कही कोई गुजरी घटना दर्द की वजा है लगता अकेलापन ही […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

मेरा दिल अजव प्रेम दर्पण दिमाग सांचा बशीभूत अर्पण नेक स्पर्श में हलचल स्पंदन बोझ जोश में भरा  रूखापन. हर्ष और गम सदा उलझाते सभी भावों अभिव्यक्ति बंदन. क्रोध में तन्दूर मन  मंथन रच शांत पाता धर्म निरंजन. दूध उफान सा उग्र पाता मिल दिल दिमाग संतुलन. लिखने लिए न जमीर सौदा “मैत्री”हासिल हो सभी […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल

पीने को जल कमी है, होठों को मल रहे है हम रोज़ थोड़ा थोड़ा साँचों में ढल रहे हैं| रहने को ज़मी कमी है, हाथों को मल रहे हैं इक दूजे के दिलों से, फिर क्यों निकल रहे हैं| क्या अदब सा दिखा है , लोगों में हुनर लिया सा मंजिल खड़े निकट ही , […]