राजनीति

पाकिस्तान में ननकाना साहिब पर हमला क्यूँ?

ननकाना साहब पाकिस्तान के प्रांत में स्थित एक शहर हैं जिसका वर्तमान नाम सिख धर्म के गुरु! गुरु नानक देव जी के नाम पर पड़ा जिसका पुराना नाम हैं ‘राय– भोई– दी तलवड़ी’ था यह लाहौर से 80 किलोमीटर दक्षिण –पश्चिम में स्थित हैं इसे महाराजा रणजीत सिंह ने गुरु नानक देवजी के जन्म स्थान […]

कविता

नसीब अपना अपना

“नसीब अपना हो या अपनों का कभी एक सा नहीं होता कभी किसी कि ख्वाइशें पूरी होती हैं तो कभी बस जरूरतें किसी के हसरतों में बच्चों की किलकारियाॅ॑ होती हैं तो किसी के आॅ॑खों में बच्चों के लिए अश्रु वह अश्रु दुःख,सुख के नहीं बल्कि बच्चों के दो जून की रोटी के लिए होते […]

बाल कविता

मैं अभी बच्चा हूॅ॑

मैं बहुत अच्छा हूॅ॑ क्योंकि अभी सच्चा हूॅ॑ मुझें क ख ग घ नहीं आता क्योंकि मैं अभी बच्चा हूॅ॑। एक से सौं तक की गिनती मुझको नहीं आती हैं। इंग्लिश की ए, बी, सी, डी मुझको बहुत पकाती है। सुबह– सुबह मम्मी कि डांट हर रोज उठते ही खाता हूॅ॑ पांच किलों का बैंग […]

कविता

कसक

“व्यक्ति के अंदर स्वयं से टकराने की अहम  भावना जो उसके उत्तेजित स्वर द्वारा व्यक्त होती हैं वह हैं ‘कसक’  मनुष्य के असमर्थता का भाव  समर्थता में प्रदर्शित करने की गतिविधि की क्रियान्वित विधि हैं ‘कसक’ वर्ग विहीन समाज की कल्पना में गतिशील मानव के विकास की बाधा में उत्पन्न होने वाले टकराव का भाव […]

कविता

स्वप्न दीप

दीप जला एक सपने में, वह सपना चंचल भोला था  मृग नयनों ने जब पाला तो, मृदु अधरों ने भी बोला था । पंख ना तो तुम इसको रश्मि ,इसे अम्बर तक अभी जाना हैं फिर संध्या हुई साॅ॑झ की रंगमयी, साॅ॑झ हुई सन्ध्या की करुणा ।  बना व्योम की पावन बेला ,  जुगनू से […]

भजन/भावगीत

ऐसी कृपा करो तुम हे प्रभुवर !

मन में हो उदासी तो ,खुशियों के दीप नहीं जलते  हो पूनम की रात, तो अंधकार नहीं रुकते आज धरा की चाहत हैं, मेहनत और संघर्षों की हर  मानव में दृश्य दिखें, मानवता के माला की  ऐसी कृपा करों तुम हें! प्रभुवर । उड़ जाए खग के जैंसें, मानव के अहंकार  राग द्वेष सब दूर […]

भजन/भावगीत

कविता – ‘प्रभु की माया’

हे! जगतगुरू जब –जब तुम्हें पुकारूं तब–तब तुम बहरे क्यों?हो जाते हो। क्या हवा लगी हैं इस दुनिया की जो तुम अंधे भी बन जाते हो।। आनाकानी जब–जब करते हो मेरा साहस क्षीण होता हैं। लाख जतन कर लूं  ऊपर उठने की फिर भी नीचे गिर जाता हूं। हें! जगतगुरु पुकार सुनों ह्रदय में ज्ञान […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

लेख – ‘राम’ शब्द की प्रासंगिकता

“राम नाम की एक आन्तरिक दुनिया हैं और एक बाहरी जो घटित हो रहा हैं इसका द्वंद्व ही वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता और साम्प्रदायिकता को बयां कर रहा हैं।हालांकि राम नाम शब्द की मनःस्थिति को भीतर और बाहर से व्यक्त करना एक नाटकीय घटनाक्रम सा प्रतीत होता हैं तब जब व्यक्ति संघन अंधकार में […]

कविता

कविता – स्मृतियां

दर्द का सा नशा हैं स्मृतियों में, जो अधरों पर अदा रूप में आता हैं। इन्द्रधनुष सा रंग दिखाता, औ वीणा सी झनकार दे जाता हैं।। जिसके आंसू कल तक घड़ियाले थे, अब वह गंगाजल सा पावन हैं। मन्दिर,मस्जिद, गुरुद्वारें सब उसके पग चिन्हों से अवगत हैं ।। सूने पथ का वह राही था, किन्तु […]