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  • नसीब अपना अपना

    नसीब अपना अपना

    “नसीब अपना हो या अपनों का कभी एक सा नहीं होता कभी किसी कि ख्वाइशें पूरी होती हैं तो कभी बस जरूरतें किसी के हसरतों में बच्चों की किलकारियाॅ॑ होती हैं तो किसी के आॅ॑खों में...

  • मैं अभी बच्चा हूॅ॑

    मैं अभी बच्चा हूॅ॑

    मैं बहुत अच्छा हूॅ॑ क्योंकि अभी सच्चा हूॅ॑ मुझें क ख ग घ नहीं आता क्योंकि मैं अभी बच्चा हूॅ॑। एक से सौं तक की गिनती मुझको नहीं आती हैं। इंग्लिश की ए, बी, सी, डी...

  • कसक

    कसक

    “व्यक्ति के अंदर स्वयं से टकराने की अहम  भावना जो उसके उत्तेजित स्वर द्वारा व्यक्त होती हैं वह हैं ‘कसक’  मनुष्य के असमर्थता का भाव  समर्थता में प्रदर्शित करने की गतिविधि की क्रियान्वित विधि हैं ‘कसक’...

  • स्वप्न दीप

    स्वप्न दीप

    दीप जला एक सपने में, वह सपना चंचल भोला था  मृग नयनों ने जब पाला तो, मृदु अधरों ने भी बोला था । पंख ना तो तुम इसको रश्मि ,इसे अम्बर तक अभी जाना हैं फिर...


  • कविता – ‘प्रभु की माया’

    कविता – ‘प्रभु की माया’

    हे! जगतगुरू जब –जब तुम्हें पुकारूं तब–तब तुम बहरे क्यों?हो जाते हो। क्या हवा लगी हैं इस दुनिया की जो तुम अंधे भी बन जाते हो।। आनाकानी जब–जब करते हो मेरा साहस क्षीण होता हैं। लाख...


  • कविता – स्मृतियां

    कविता – स्मृतियां

    दर्द का सा नशा हैं स्मृतियों में, जो अधरों पर अदा रूप में आता हैं। इन्द्रधनुष सा रंग दिखाता, औ वीणा सी झनकार दे जाता हैं।। जिसके आंसू कल तक घड़ियाले थे, अब वह गंगाजल सा...