कविता

कविता : प्यार है ये व्यापार नहीं

प्यार है ये व्यापार नहीं प्यार के बदले प्यार की चाह बेमायने थी ये दिल की राह , नासमझ थी न समझ पायी प्यार है ये व्यापार नहीं , पर अब जो आई है बात समझ मे तो रूह को आराम आया , सारे एहसास सारी तड़प सिमट गयी है तुझे प्यार देने की चाह […]

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तिरस्कार

मैं जानती हूँ जो  खूबसूरती ढूंढती हैं  तुम सब की नज़रें  वो नहीं मिलती मुझमे….. पर क्या इस से तुम्हे  मेरी अवहेलना करने का हक़ मिल जाता है ? या तो खुले आम कह दो या मुझे आज़ाद कर दो ऐसे रिश्तों से …….  नहीं सह सकती मैं और तिरस्कार उस बात के लिए जिसमे मेरा कोई […]

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वो शाम

तुम्हारी जादुई बातों ने फिर याद दिला दिया वो सिन्दूरी झील के किनारे की शाम , फिर एहसास हो आया उस मिलन का जिसमे सिर्फ मैं और तुम हाँथो मे कॉफ़ी लिए बस अपलक एक दूसरे को निहार रहे थे , उस दिन पता चला कुछ अधूरा था मुझमे जो तुमसे मिल कर पूरा हो […]

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कविता : सीली यादें

आहा ! प्यार भरी वो बारिश……. सदा याद रहेगी मुझको जी भरकर भींगे थे हम हर लम्हा हर पल जीया था हमने इन्द्रधनुषी सपने जैसा , पर बरसात के मौसम की तरह तुम भी अब गुम हो गए हो कहीं ………. कई मौसम आये गए पर तुम न आये , अब तो बस रह गयी है कुछ […]