गीतिका/ग़ज़ल

जिंदगी

जीने की एक ही ख्वाहिश थी वो भी जला दी हमने जब आज हँसके तुम्हारी ‘हां’ में ‘हां’ मिला दी हमने वैसे तो हम भी तन्हा थे और तुम भी तन्हा मिली थी पर दोस्ती से प्यार तक जाते जिंदगी  दिला दी हमने कभी कभी तुम्हे बेबकूफियाँ करके रुलाया तो लगा हँसानी थी जो जिंदगी […]

कविता

नारी की माया

धरती से लेकर अम्बर तक नारी की ही माया है देव दनुज मानव दानव सब नारी की ही छाया है जो भी भू पर आया उसको नारी ने ही जाया है सृष्टि के कण कण में होता नारी का ही साया है चीर हरण पर मौन साधकर नारी का अपमान किया उसी समय से कौरव […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

लगती है रुखसार से वो मुझको नूरी सी जिस्म को सांसे है वैसे ही वो जरूरी सी उसको खोजता फिरता हूँ इस जमाने में मगर वो तो बसती है मुझमें कस्तूरी सी उसके अहसास से खिल उठती है मेरी ये जिंदगी जो अधूरी है होकर पूरी सी उसके बिन हालत ऐसी हो जाती मेरी लगती […]

गीत/नवगीत

शौर्य की प्रतिमा

शौर्य की प्रतिमा तुम्हें, है मेरा शत-शत नमन। देह को अमरत्व दे, बौना किया तुमने गगन।। छोड़ कर  घर  द्वार, रत सीमा  सुरक्षा में रहे राम सा  ग्रह त्याग,जीवन  की परीक्षा  में रहे सर्दी गर्मी  बारिशें, करते रहे  नितदिन सहन यूँ सभी कर्तव्य को  उनने किया हँसके वहन शौर्य की प्रतिमा तुम्हें, है मेरा शत- […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

कदम नेह के पथ पे रखना संभलकर नहीं तो किसी पग गिरोगे फिसलकर। ये तुम्हें रोकना, चाहता जग है सारा, बढ़ो आगे सबके मनसूबे कुचलकर। न मिल पाये तो भी कहे जग तुम्हारी, दिखा दो सभी को किस्मत बदलकर। लड़ के भला जीत जाना भी क्या है, ह्रदय जीत के तुम बनो तो सिकंदर। मोहब्बत […]

कविता

पीड़ा में प्रकृति का मन

छिन्न भिन्न कर डाला उसको प्रकृति के भींगे है नयन तभी कोरोना तभी अधियाँ आफत आई है ये गहन मिली अमानत में हमको थी सतरंगी प्रकृति प्यारी छेड़खान कर कर के हमने रंगों का कर दिया दमन स्वर्ग से सुंदर धरती थी ये कल्पवृक्ष हर जंगल थे काट काट के जंगल हमने सुंदरता का किया […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

जिनकी राहों में पलके बिछाये है हम सारी गजलों में उनको ही गाये है हम उनकी तस्वीर की कुछ जरूरत नही उनको ह्रदय में अपने छिपाये है हम शायद कपड़े सुखाने को आएगी वो छत पे सुबहा से नजरें गढ़ाये है हम वो प्यार से बोलेगी प्यारे ढाई आखर आश ये ही तो दिल मे […]

कविता

बेजुबान हथिनी

प्रेम, दया, करुणा रखने का  तुम कैसा पाठ पढ़ाते हो या फिर आत्म क़सीदे गढ़के खुद को श्रेष्ठ बताते हो हे मानव! तेरी निष्ठुरता से ये मानवता शर्मसार हुई जितने कुछ भी पुण्य कर्म थे वो सारी पुंजी बेकार हुई मेरे सृजित सभी जीवो में श्रेष्ठ कैसे कहलाते हो या फिर आत्मक़सीदे गढ़के खुद को […]

गीत/नवगीत

खुली रहेंगी मधुशाला

बन्द रहेंगे मंदिर – मस्जिद , खुली रहेंगी मधुशाला। गांधी जी के देश मे देखो, क्या होता है गोपाला । हर जगहा त्राहि त्राहि है , पल पल संकट बढ़ता है। रक्त बीज असुर कोरोना, दिन प्रतिदिन ये बढ़ता है। इस आलम में निर्णय ऐसा, समझ नही आने वाला। बन्द रहेंगे मंदिर मस्जिद, खुली रहेगी मधुशाला। महामारी ले काल रूप […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

गर हूँ दर – बदर तो हुआ क्या है इश्क में जख्मों  के  सिवा क्या है बातो में ख्याबो में सांसो में वो है उसके सिवा  मुझमें  बचा क्या है अजीब बीमारी फैली है इश्क सी सभी पूछते है इसकी दवा क्या है प्रेमी , पागलो और शायरों के पास फाका मस्ती के सिवा मिला […]