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  • “सावन में”

    “सावन में”

    सपनों में ही पेंग बढ़ाते, झूला झूलें सावन में। मेघ-मल्हारों के गानें भी, हमने भूलें सावन में।। — मँहगाई की मार पड़ी है, घी और तेल हुए महँगे, कैसे तलें पकौड़ी अब, पापड़ क्या भूनें सावन...




  • “होती है बरसात”

    “होती है बरसात”

    होती है बरसात की, धूप बहुत विकराल। स्वेद पोंछते-पोंछते, गीला हुआ रुमाल।। — धूप-छाँव हैं खेलते, आँखमिचौली खेल। सूरज-बादल का हुआ, नभ में अनुपम मेल।। — चौमासे में हो रहे, जगह-जगह सत्संग। सब के मन को...