बाल कविता

बालगीत “जोकर खूब हँसाये”

जो काम नही कर पायें दूसरे,वो जोकर कर जाये।सरकस मे जोकर ही,दर्शक-गण को खूब रिझाये।—नाक नुकीली, चड्ढी ढीली,लम्बी टोपी पहने,उछल-कूद कर जोकर राजा,सबको खूब हँसाये।—चाँटा मारा साथी को,खुद रोता जोर-शोर से,हाव-भाव से, शैतानी से,सबका मन भरमाये।—लम्बा जोकर तो सीधा है,बौना बड़ा चतुर है,उल्टी-सीधी हरकत करके,बच्चों को ललचाये।—(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

गीत/नवगीत

गीत “नारी की तो कथा यही है”

अपने छोटे से जीवन मेंकितने सपने देखे मन में—इठलाना-बलखाना सीखाहँसना और हँसाना सीखासखियों के संग झूला-झूलामैंने इस प्यारे मधुबन मेंकितने सपने देखे मन में—भाँति-भाँति के सुमन खिले थेआपस में सब हिले-मिले थेप्यार-दुलार दिया था सबनेबचपन बीता इस गुलशन मेंकितने सपने देखे मन में—एक समय ऐसा भी आयाजब मेरा यौवन गदरायाविदा किया बाबुल ने मुझकोभेज दिया […]

बाल कविता

बालकविता “सबका ऊँचा नाम करूँ”

मैं अपनी मम्मी-पापा के,नयनों का हूँ नन्हा-तारा।मुझको लाकर देते हैं वो,रंग-बिरंगा सा गुब्बारा।।—मुझे कार में बैठाकर,वो रोज घुमाने जाते हैं।पापा जी मेरी खातिर,कुछ नये खिलौने लाते हैं।।—मैं जब चलता ठुमक-ठुमक,वो फूले नही समाते हैं।जग के स्वप्न सलोने,उनकी आँखों में छा जाते हैं।।—ममता की मूरत मम्मी-जी,पापा-जी प्यारे-प्यारे।मेरे दादा-दादी जी भी,हैं सारे जग से न्यारे।।—सपनों में सबके […]

गीत/नवगीत

“हर सिक्के के दो पहलू हैं”

“हर सिक्के के दो पहलू हैं”—हर सिक्के के दो पहलू हैं,उलट-पलटकर देख ज़रा।बिन परखे क्या पता चलेगा,किसमें कितना खोट भरा।।—हर पत्थर हीरा बन जाता,जब किस्मत नायाब हो,मोती-माणिक पत्थर लगता,उतर गई जब आब हो,इम्तिहान में पास हुआ वो,तपकर जिसका तन निखरा।बिन परखे क्या पता चलेगा,किसमें कितना खोट भरा।।—नंगे हैं अपने हमाम में,नागर हों या बनचारी,कपड़े ढकते […]

बाल कविता

बालगीत “साधारण जीवन अपनाना”

जननी-जन्मभूमि को अपनी,बच्चों कभी नहीं बिसराना।ठाठ-बाट को छोड़ हमेशा,साधारण जीवन अपनाना।।—रोज नियम से आप सींचना,अपनी बगिया की फुलवारी।मत-मजहब के गुलदस्ते सी,वसुन्धरा है प्यारी-प्यारी।अपनी इस पावन धरती पर,वैमनस्य को मत उपजाना।ठाठ-बाट को छोड़ हमेशा,साधारण जीवन अपनाना।।—सुख-दुख का सबके जीवन में,चक्र सदा है चलता रहता।वो महान जो दोनों को,सहजभाव से है हँसकर सहता।विपदाओं के कठिन काल में,कभी […]

हाइकु/सेदोका

“जीना पड़ेगा कोरोना के साथ”

कोरोना नेहमारे चारों ओरजाल बुन लिया है—जाल!हाँ जी!जाल तो जाल ही होता हैचाहे वह मकड़ी का जाल होया बहेलिए का जाल—नदी, सरोवर सिन्धु मेंचाहे मछलियाँ होंयामगरमच्छ होंकोई नहीं बच सकताजाल के फन्दे सेकिन्तु एक उपाय है—आज हमें संगठित होकर नहींबल्किअलग-अलग रहकरसावधानियों के साथइस जाल को काटना है—हवा मेंपहले प्रदूषण कीसमस्या थीआज उसके साथविषाणु ने भीडेरा […]

गीत/नवगीत

गीत “प्रीत का व्याकरण”

घूमते शब्द कानन में उन्मुक्त से,जान पाये नहीं प्रीत का व्याकरण।बस दिशाहीन सी चल रही लेखिनीकण्टकाकीर्ण पथ नापते हैं चरण।।—ताल बनती नहीं, राग कैसे सजे,बेसुरे हो गये साज-संगीत हैं।ढाई-आखर बिना है अधूरी ग़ज़ल,प्यार के बिन अधूरे प्रणयगीत हैंनेह के स्रोत सूखे हुए हैं सभी,खो गये हैं सभी आजकल आचरण।कण्टकाकीर्ण पथ नापते हैं चरण।।—सूदखोरों की आबाद […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल “फूल हो गये अंगारों से”

कहना है ये दरबारों सेपेट नहीं भरता नारों से—सूरज-चन्दा में उजास हैकाम नहीं चलता तारों से—आम आदमी ऊब गया हैआज दोगले किरदारों से—दरिया पार नहीं होता हैटूटी-फूटी पतवारों से—कोरोना की बीमारी मेंरौनक गायब बाजारों से—ईँधन पर महँगाई क्यों हैलोग पूछते सरकारों से—जनसेवक मनमानी करतेवंचित जनता अधिकारों से—नहीं पिघलता दिल दुनिया कामजदूरों की मनुहारों से—क्या होती […]

बाल कविता

बालगीत “चौमासे ने अलख जगाई”

रिमझिम-रिमझिम पड़ीं फुहारे।बारिश आई अपने द्वारे।।—तन-मन में थी भरी पिपासा,धरती का था आँचल प्यासा,झुलस रहे थे पौधे प्यारे।बारिश आई अपने द्वारे।।—आँधी आई, बिजली कड़की,जोर-जोर से छाती धड़की,अँधियारे ने पाँव पसारे।बारिश आई अपने द्वारे।।—जल की मोटी बूँदें आयी,चौमासे ने अलख जगाई,खुशी मनाते बालक सारे।बारिश आई अपने द्वारे।।—अब मौसम हो गया सुहाना,आम रसीले जमकर खाना,पर्वत से बह […]

मुक्तक/दोहा

दोहे “सच्चाई का अंश”

जब भी लड़ने के लिए, लहरें हों तैयार।कस कर तब मैं थामता, हाथों में पतवार।।—बैरी के हर ख्वाब को, कर दूँ चकनाचूर।जब अपने हो सामने, हो जाता मजबूर।।—जब भी लड़ने के लिए, होता हूँ तैयार।धोखा दे जाते तभी, मेरे सब हथियार।।—साधन हो पैसा भले, मगर नहीं है साध्य।हिरती-फिरती छाँव को, मत समझो आराध्य।।—राज़-राज़ जब तक […]