गीत/नवगीत

गीत “प्रीत का व्याकरण”

घूमते शब्द कानन में उन्मुक्त से,जान पाये नहीं प्रीत का व्याकरण।बस दिशाहीन सी चल रही लेखिनीकण्टकाकीर्ण पथ नापते हैं चरण।।—ताल बनती नहीं, राग कैसे सजे,बेसुरे हो गये साज-संगीत हैं।ढाई-आखर बिना है अधूरी ग़ज़ल,प्यार के बिन अधूरे प्रणयगीत हैंनेह के स्रोत सूखे हुए हैं सभी,खो गये हैं सभी आजकल आचरण।कण्टकाकीर्ण पथ नापते हैं चरण।।—सूदखोरों की आबाद […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल “फूल हो गये अंगारों से”

कहना है ये दरबारों सेपेट नहीं भरता नारों से—सूरज-चन्दा में उजास हैकाम नहीं चलता तारों से—आम आदमी ऊब गया हैआज दोगले किरदारों से—दरिया पार नहीं होता हैटूटी-फूटी पतवारों से—कोरोना की बीमारी मेंरौनक गायब बाजारों से—ईँधन पर महँगाई क्यों हैलोग पूछते सरकारों से—जनसेवक मनमानी करतेवंचित जनता अधिकारों से—नहीं पिघलता दिल दुनिया कामजदूरों की मनुहारों से—क्या होती […]

बाल कविता

बालगीत “चौमासे ने अलख जगाई”

रिमझिम-रिमझिम पड़ीं फुहारे।बारिश आई अपने द्वारे।।—तन-मन में थी भरी पिपासा,धरती का था आँचल प्यासा,झुलस रहे थे पौधे प्यारे।बारिश आई अपने द्वारे।।—आँधी आई, बिजली कड़की,जोर-जोर से छाती धड़की,अँधियारे ने पाँव पसारे।बारिश आई अपने द्वारे।।—जल की मोटी बूँदें आयी,चौमासे ने अलख जगाई,खुशी मनाते बालक सारे।बारिश आई अपने द्वारे।।—अब मौसम हो गया सुहाना,आम रसीले जमकर खाना,पर्वत से बह […]

मुक्तक/दोहा

दोहे “सच्चाई का अंश”

जब भी लड़ने के लिए, लहरें हों तैयार।कस कर तब मैं थामता, हाथों में पतवार।।—बैरी के हर ख्वाब को, कर दूँ चकनाचूर।जब अपने हो सामने, हो जाता मजबूर।।—जब भी लड़ने के लिए, होता हूँ तैयार।धोखा दे जाते तभी, मेरे सब हथियार।।—साधन हो पैसा भले, मगर नहीं है साध्य।हिरती-फिरती छाँव को, मत समझो आराध्य।।—राज़-राज़ जब तक […]

बाल कविता

बालकविता “पेड़ों पर पकती हैं बेल”

जो शिव-शंकर को भाती हैबेल वही तो कहलाती है—तापमान जब बढ़ता जातापारा ऊपर चढ़ता जाता—अनल भास्कर जब बरसातालू से तन-मन जलता जाता—तब पेड़ों पर पकती बेलगर्मी को कर देती फेल—इस फल की है महिमा न्यारीगूदा इसका है गुणकारी—पानी में कुछ देर भिगाओघोटो-छानो और पी जाओ—ये शर्बत सन्ताप हरेगातन-मन में उल्लास भरेगा—(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

गीत/नवगीत

गीत “किसलय कहलाते हैं”

कोमल, कोंपल, नवपल्लव,चंचलता से लहराते हैं।नाजुक हरे मुलायम कल्ले,ही किसलय कहलाते हैं।।—चलना कहलाता है जीवन,सरिताएँ ये कहती हैं,इसीलिए अनवरत चाल से,कल-कल करके बहती हैं,सूरज और चन्द्रमा हमको,पाठ यही सिखलाते हैं।नाजुक हरे मुलायम कल्ले,ही किसलय कहलाते हैं।।—आने के ही साथ हुआ तय,कब किसको दुनिया से जाना,खग-मृग, वानर-नर को जग में,श्रम से चुगना पड़ता दाना.जो मौसम की […]

बाल कविता

बालगीत “गुलमोहर पर छाई लाली”

लाल रंग के सुमन सुहाते।लोगों को हैं खूब लुभाते।।—रूप अनोखा, गन्ध नहीं है,कागज-कलम निबन्ध नहीं है,उपवन से सम्बन्ध नहीं है,गरमी में हैं खिलते जाते।लोगों को हैं खूब लुभाते।।—भँवरों की गुंजार नहीं है,शीतल-सुखद बयार नहीं है,खिलने का आधार नहीं है,केवल लोकाचार निभाते।लोगों को हैं खूब लुभाते।।—कुदरत की है शान निराली,गुलमोहर पर छाई लाली,वनमाली करता रखवाली,पथिक तुम्हारी […]

बाल कविता

“गर्मी में खीरा वरदान”

तन-मन की जो हरता पीरावो ही कहलाता है खीरा—चाहे इसका रस पी जाओचाहे नमक लगाकर खाओ—हर मौसम में ये गुणकारीदूर भगाता है बीमारी—आधा कड़ुआ, आधा मीठासंकर खीरा हरा पपीता—जिनका रंग पीला होता हैदो देशी खीरा होता है—अन्दर से होता है कच्चास्वाद बहुत है इसका अच्छा—जब खाओ रायता-सलादखीरे को भी करना याद—खीरा गर्मी में वरदानइसके गुण […]

बाल कविता

बालगीत “सबके मन को भाते आम”

एक साल में आते आम।सबके मन को भाते आम।।—जब वर्षा से आँगन भरता,स्वाद बदलने को जी करता,तब पेड़ों पर आते आम।सबके मन को भाते आम।।—चटनी और अचार बनाओ,पक जाने पर काटो-खाओ,आम सभी के होते आम।सबके मन को भाते आम।।—कच्चा सबसे खट्टा होता,पक जाने पर मीठा होता,लंगड़ा वो कहलाते आम।सबके मन को भाते आम।।—बम्बइया की शान […]

बाल कविता

बालगीत “नरेन्द्र मोदी”

दामोदर नरेन्द्र मोदी ने,सादा जीवन अपनाया।भारत भाग्य विधाता बनकर,पथ समाज को दिखलाया।।—छोड़ सभी आराम-ऐश को,संघं शरणम् में आया।मोह छोड़कर घर-गृहस्थ का,पथरीला पथ अपनाया।भारत भाग्य विधाता बनकर,पथ समाज को दिखलाया।।—केशर की क्यारी को जिसने,संविधान में बाँध दिया।आजादी के परवानों का,भारत में सम्मान किया।उग्रवाद-आतंकवाद से,कभी नहीं जो घबराया।भारत भाग्य विधाता बनकर,पथ समाज को दिखलाया।।—दागे नहीं खयाली गोले,कूटनीति […]