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  • “मुखपोथी पर लोग”

    “मुखपोथी पर लोग”

    मुखपोथी के झाड़ में, कच्चे-पक्के बेर। जिन्हें न आती शायरी, वो भी कहते शेर।। सिद्ध हो रही साधना, सफल हुआ उद्योग। अपनी बातें लिख रहे, मुखपोथी पर लोग।। भाई-भाई में नहीं, पहले जैसा प्यार। उजड़ रहा...