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  • कविता – सोच रहा हूँ

    कविता – सोच रहा हूँ

    एक दिन मेरे दोस्त को, मैं लगा गुमसुम बोला वो, क्या सोच रहे हो तुम बातें बहुत सी हैं सोच रहा हूँ, क्या सोचूँ, बोला मैं। अलग-अलग हैं कितनी बातें क्या-क्या हैं नये सन्दर्भ विषयों की...




  • मचलती तमन्नाओं ने

    मचलती तमन्नाओं ने

    मचलती तमन्नाओं ने आज़माया भी होगा बदलती रुत में ये अक्स शरमाया भी होगा पलट के मिलेंगे अब भी रूठ जाने के बाद लड़ते रहे पर प्यार कहीं छुपाया भी होगा अंजाम-ए-वफ़ा हसीं हो यही दुआ...

  • पाने की चाह

    पाने की चाह

    पाने की चाह में खोने का डर सताता है बिना कुछ पाए ही दिल सहम जाता है फ़ितरत१ में जुड़ा है ये डर जाना सहम जाना रुका था न रुकेगा इंसाँ का बहक जाना लाख दुआएँ...