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  • मचलती तमन्नाओं ने

    मचलती तमन्नाओं ने

    मचलती तमन्नाओं ने आज़माया भी होगा बदलती रुत में ये अक्स शरमाया भी होगा पलट के मिलेंगे अब भी रूठ जाने के बाद लड़ते रहे पर प्यार कहीं छुपाया भी होगा अंजाम-ए-वफ़ा हसीं हो यही दुआ...

  • पाने की चाह

    पाने की चाह

    पाने की चाह में खोने का डर सताता है बिना कुछ पाए ही दिल सहम जाता है फ़ितरत१ में जुड़ा है ये डर जाना सहम जाना रुका था न रुकेगा इंसाँ का बहक जाना लाख दुआएँ...





  • ग़ज़ल – बूढ़े दरख़्त

    ग़ज़ल – बूढ़े दरख़्त

    बूढ़े दरख़्त१ पहले से ज़्यादा हवादार हो गए इश्क़ में हम पहले से ज़्यादा वफ़ादार हो गए उनसे दिल की बात कहने का हुनर सीख लिया लब-ए-इज़हार२ पहले से ज़्यादा असरदार हो गए मालूम चला मिट्टी...