कविता पद्य साहित्य

मानवता  

अधिकारों की बात सब करते हैं कर्तव्यों के विषय में भी थोड़ी चर्चा करें!   वाद विवाद करने की होड़ में, दिल-ओ-दिमाग भी थोड़ा खर्चा करें!   जीविकोपार्जन की तेज़ दौड़ में चलो मानवता की ओर भी थोड़ा बढ़ें!   उत्थान व पतन तो सृष्टि का नियम है समाधान और समन्वय की सोच धरें!   […]

कविता

अलविदा

ख्वाहिशों को संजों कर,  चलो अब दिल खोलकर जीएँ!   दिल के ग़ुबार को छोड़ कर, चलो थोड़ा खुशियों की ओर बढ़ें!   सारे दर्द और ग़म भुला कर, चलो अब थोड़ा खुलकर हँसे!   शिकवे-शिकायतें दूर कर चलो अब एक नया सफ़र चुने!   कोरोना ने जो सीख दी  चलो उससे सीखें और समझें! […]

कविता

अनिश्चितता  

आज मैं बड़े असमंजस में हूँ , सोचती हूँ क्या कहूँ, यही सोच रही हूँ कि हम अभावों को कैसे समझ पाते? कुछ प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष रूप से, कभी अनमने मन से, कभी वास्तविकता में, हम यादों के झरोखों से झाँक आते! ऐसा प्रतीत होता मानो अनिश्चितता ही एक मात्र नियम है, सभी वस्तुओं का प्रारम्भ व अंत […]

कविता

कैसे कहूँ शुक्रिया!

कैसे कहूँ शुक्रिया, मेरे जीवन में रंगों को वापस लाने के लिए! कैसे कहूँ शुक्रिया, एक नया इंद्रधनुष बनाने ले लिए! कैसे कहूँ शुक्रिया, अंधकार में अनगिनत दीपक जलाने के लिए! कैसे कहूँ शुक्रिया, एक अनमोल फूल खिलाने के लिए! कठोर पगडंडियों से चलते हुए, आँधियों से लड़ते हुए, जीवन गुज़र रहा था; कैसे कहूँ […]

कविता पद्य साहित्य

हमारा परिवार

सभी सदस्यों में प्रेम व स्नेह अपार; कुछ ऐसा है हमारा परिवार! बड़ो का आशीष और छोटों का प्यार; कुछ ऐसा है हमारा परिवार! साथ मिलकर मनाएँ, हम सारे त्योहार; कुछ ऐसा है हमारा परिवार! रूठना- मनाना तो है रिश्तों का आधार; कुछ ऐसा है हमारा परिवार! मुस्कुराते हुए करते, कठिनाईयों को पार; कुछ ऐसा […]

कविता पद्य साहित्य

भारत वर्ष: राष्ट्रीय एकता दिवस

कल दशहरा मनाया था, आज ईद मनाएँगे; कल खीर खिलाई थी, आज सिवाईयाँ खिलाएँगे; कभी गुरुपर्व, कभी क्रिसमस की बधाई देने आएँगे; सारे त्यौहार मिलजुल कर मने, तभी तो सच्चे हिंदुस्तानी कहलाएंगे!   वेदों की ऋचाओं सा हो हमारा विश्वास, कुरान की आयतों सी हो हर आस, गुरबानी हो या प्रेयर, या हो महारास, किस […]

कविता पद्य साहित्य

शक्ति रूप

नवजीवन का सृजन वो करती, स्नेह से सबका जीवन भरती; परन्तु उसके लिए ही क्यों घनघोर मेघ की गर्जना थी, ये कैसी विकट मन्त्रणा थी! ‘या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण’ मंत्र बोल पूजते उसको, पुष्पांजलि व अर्क देते उसको; आज उस माँ के मन मे कंपना थी, एक विकट व भीषण जंत्रणा थी! अब शक्ति […]

बाल कविता बाल साहित्य

आज मेरी बुआ की चिट्ठी आई है!

आज मेरी बुआ की चिट्ठी आई है मोती की तरह सुंदर, उनकी लिखाई है, परिवार की हर बेटी को उन्होंने आगे बढ़ने की राह दिखाई और सिखाई है! दादी- बाबा ने कभी रोका न टोका, जब भी उन्होंने पढ़ने की इच्छा जताई है! गर्व है हम सबको उनपर, हर क्षेत्र में उन्नति उन्होंने पाई है! […]

कविता

जीवन 

जीवन का ये पथ कुछ विचित्र है, कभी ये लगता ममतामयी मर्म स्पर्श है! कभी दृढ़ और सशक्त बन, सारी चुनौतियों को झेलता सहर्ष है! नरंतर बदलाव एवं समय की अनुकूलता से बनती उसकी परिभाषा उत्कर्ष है! कभी मीठे स्वप्न की तरह लगता, कभी लगता एक अत्यंत कठोर संघर्ष है! स्मृतियाँ का आकर्षण व अनुकर्षन […]

कविता

बाबा – दादी

आज बाबा के घुटनों में दर्द था,क्योंकि मौसम थोड़ा सर्द था!उन्होंने पड़ोस वाले काका को बुलाया,बस वही तो उनका हमदर्द था! दादी की तबियत भी कुछ खराब थी,उनको आशा थी एक जवाब की!अपनी शर्तों पे जीती थी वो,उनको न आदत थी किसी दबाव की! आँखें नम और मन दोनों का उदास था,किसको बताएँ, कोई भी […]