भाषा-साहित्य

हमारे पसीने से बू आती है तुम्हें !

अक्सर हम कई के बारे में सोचते हैं, कई पहलुओं पर सोचते हैं, अर्थात यह भी कि- “यह कानून बना दी जाय- जो आजीवन या 60 की आयु तक कुँवारे रहेंगे, वे ही चुनाव लड़ पाएंगे ! तब देखिएगा, कोई भी नेता बनना नहीं चाहेंगे !” तभी तो– “भारत सरकार आगामी 10 साल के लिए […]

संस्मरण

माननीय राज्यसभा उपसभापति से पूर्व मुलाकात

एक संस्मरण…. हरिवंश सर को बधाई ! फरवरी 2007, राँची में हुई थी मुलाकात… मैं तब फ्रीलांसर था, राजस्थान के एक साप्ताहिक में काम कर चुका था तथा कुछ अंकों का सम्पादन किया था । दैनिक हिंदुस्तान के पटना कार्यालय में 3 माह कार्य किया है । इसी क्रम में अत्यल्प समय के लिए BBC […]

संस्मरण

मायाजाल और अहंकार

प्यारे ‘रईश जावेद’, सादर नमस्कार ! तुम्हारी चित्रकारी अद्भुत थी ! ‘थी’ पर इसलिए जोर है, क्योंकि आजकल ‘मेरी यह जान’ व्यवसायी हो गए हैं ! मैंने अपनी ज़िंदगी का 3 वर्ष ‘नारायणपुर’ में बिताया है, जहाँ ‘रईश’ का घर है और रईश ने उन दिनों इतने ही वर्ष ‘नवाबगंज’ में बिताए, जहाँ मेरा घर […]

भाषा-साहित्य

देहाती दुनिया और उनके लेखक

आचार्य शिवपूजन सहाय के जन्मदिवस पर सादर नमन ! दुनिया को ‘आँचलिकता’ से रूबरू करानेवाले हिंदी के पहले उपन्यासकार शिवपूजन सहाय थे। उनकी औपन्यासिक कृति ‘देहाती दुनिया’ की प्रथम पांडुलिपि लखनऊ में गायब हो गई थी, फिर उन्होंने ‘देहाती दुनिया’ की दूसरी पांडुलिपि लिखा, किन्तु संतुष्ट नहीं होने के बावजूद 1926 में यह उपन्यास प्रकाशित […]

विविध

‘अंग्रेजी’ भारत कब छोड़ेंगे ?

अंग्रेजों ने भारत छोड़ दिया, हम ‘अंग्रेजी’ को कब छोड़ेंगे ? ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन’ का 78 वां वर्ष है, यह दुनिया का पहला देशव्यापी आंदोलन था, जो नेतृत्वविहीन था। अंग्रेजों ने तो भारत छोड़ दिया, किन्तु ‘अंग्रेजी’ अब भी हावी है। ‘डॉक्टरी’ पूर्जा से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अब भी अंग्रेजी […]

लघुकथा

शादी यानी बर्बादी

एक पुरानी कहावत है ‘शादी यानी बर्बादी’ …. लेकिन फिर भी दोनों पार्टी इन्हें अपने गलें में वर मालों के रूप ‘अदला-बदली’ करते है ! सामाजिक दवाब के कारण भी और सबसे बड़ा कारण …’एक रात का आनंद यानी सुहागरात’ के मस्तियों के कारण …. यदि ‘इस रात के आनंद के कारण’ को हम साइड […]

लघुकथा

सच्ची शुभकामना

आनंद गाँव के उत्साही युवक हैं । ज्ञात हो, भारत के प्राय: गाँव-क़स्बे में कोई न कोई सैनिक अथवा सैन्याधिकारी के परिवार रहते हैं । हमारे तरफ से उनके परिवार को प्रत्येक पर्व-त्यौहारों में हस्तलिखित सुन्दर-से स्केचिंग कर शुभकामना-सन्देश रजिष्ट्री-डाक से भेजे जाय, ताकि सैनिक परिवार इसे फ्रेमिंग कर रख सके और रजिष्ट्री शुल्क के […]

लघुकथा

इलियाशनामा

अगर गालियों के कारण फ़िल्म हिट होते हैं, तो मेरे गाँव में एक है ‘इलियाश’ , ऐसे तो सब उसे पागल कहते है , पर गालियां वो मस्त बकता है, उसपर एक फ़िल्म बन सकता है । छोटका निर्देशक को इसके लिए आमंत्रित करता हूँ । हाँ, मेरा गाँव ऐतिहासिक है, जब सब एक-दूसरे-तीसरे से […]

विविध

महिलाएँ लिपस्टिक क्यों लगाती हैं ?

पुरुष ‘स्टिक’ से ‘लिप’ लगाई महिलाएं बन जाती ‘लिपस्टिक’ ! जीवन में ऐसी अवस्था भी आती है, जो चाहे तो आँखों में नींद ही नींद ला दे या यह अवस्था अगर किसी घूरन-चक्कर में है, तो किसी की आँखों से नींद ही चुरा ले । नींद तब अलार्म के कोहराम से टूटती थी। अब भी […]

विविध

मेरी दादी की बहन

बाबूजी (पिताजी) कहते हैं, ‘उनकी मौसी अत्यंत स्वादिष्ट सब्जी बनाती थी ।’ किन्तु मेरी माँ जो सब्जी बनाती है, उसकी कोई सानी नहीं ! माँ है, इसलिए बड़ाई कर रहा हूँ, ऐसी बात नहीं है ! क्योंकि माँ के पक्ष में आलोचना भी है, गोकि वह मेरी नानी की तरह सब्जी नहीं बना पाती है। […]