कविता

बैंगन-टमाटर की रेसिपी

यह अज़ीब है न कि बैंगन-टमाटर की दोस्ती में ऐसा सेटिंग हुआ कि आलू-धनिये के साथ इम्लाई डकार दे बैठे ! कुछ तो विडम्बना है और ऐसा तो नहीं कि हम कुरूपों के अलग ईश्वर होते है ! हम गरीबों के अलग ईश्वर होते हैं ! आईएएस के अलग ईश्वर; तो पारा टीचरों के अलग […]

कविता

क्या सच्चा प्रेम एकतरफा होता है ?

क्या यह सच है या बिल्कुल ही झूठफुस कि तन का प्रेम ‘वासना’ है और मन का प्रेम ‘बौखलाहट’ ! आप भी अपनी पत्नी को प्रेम नहीं बल्कि ‘वासना’ के नजरिये से देखते हैं, क्योंकि अगर आपमें हिम्मत है, तो उनकी देह को भोगिये मत ! भोगना ही ‘वासना’ है, प्रेम नहीं ! ….और प्रेम […]

कविता

मोहब्बत आज भी चेहरों से शुरू होकर चेहरे पे खत्म होती है !

यह कहना कितना संदिग्ध है कि प्रेम ‘चीनी’ है, जिनके बिना ‘चाय’ बेमज़ा है और जिनके ज्यादा सेवन से डायबिटीज़ यानी ‘वासना’ तय है ! इसके परन्तुक स्त्री-पुरूष के बीच के प्रेम में वास्तविक प्रेम तो औरत ही करती है, पुरुष तो प्रेम का भोग करता है। यह सच है कि पुरुष में देने का […]

क्षणिका

दीदारे बेल

चौथे माह वेतन नहीं ! आर्थिक कड़की जारी ! आज दोपहर का यही है भोजन अपने पेड़ का बेल ! ×××× यूपी में सपा बसपा ! बिहार में भाजपा और क्षेत्रीय दल पूर्वोत्तर में भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय दल ! साउथेस्ट में क्षेत्रीय दल ! शेष भारत में फिफ्टी-फिफ्टी भाजपा-कांग्रेस ! ×××× ये आंडे-सांडे, साठक-फाटक […]

लघुकथा

दीगर बात

शशि मंडल सिंह सिन्हा श्रीवास्तव पुरी वर्मा शर्मा खान। मूल नाम ‘शशि’ ही है, पिता के उपनाम ‘मंडल’ है, माँ के उपनाम ‘सिंह’ है, सिन्हा तो नाना थे, श्रीवास्तव नानी थी, प्रथम पति पुरी जी, दूसरे पति वर्मा जी, तीसरे पति शर्मा जी और चौथे व वर्त्तमान पति खान साहब है। ‘शशि’ महिला है न, […]

कविता

एक दिन खुशी अवश्य लौटेगी !

न दाढ़ी बनाया हूँ, न बाल ! चाय, नाश्ता, दूध-मिठाई छोड़ दिया हूँ, ….बावजूद मित्रो की खोज-खबर लेता हूँ और रचनाकर्म से जुड़ा हूँ ! कहते हैं- कुछ न कुछ करते रहने से और मित्रो से संदेश आदान-प्रदान करने से दुःख बिसरा चला जाता है । आप घर में बड़े हैं और मेरे विचार से […]

क्षणिका

विपदाओं के बीच सुखद बारिश

घर पर न फ्रीज़ है, न इन्वर्टर, न एसी, न रंगीन टीवी, न मोटर साइकिल, न ही बंगला ! सही कम्युनिस्ट तो मैं हूँ, करात, बसु, येचुरी नहीं ! ×××× जनसंख्या वृद्धि और कोरोना वृद्धि रोकने के लिए आनेवाले दस वर्षों के लिए हर प्रकार की शादियों पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए ? ×××× […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

बुधवार और बुद्ध पूर्णिमा

बुधवार और बुद्ध पूर्णिमा ! यह सुखद संयोग ही कहा जायेगा कि 2021 में दिन के बुधवार है और दिवस के बुद्ध पूर्णिमा । हिन्दू राजकुमार सिद्धार्थ के कालांतर में गौतम बुद्ध और फिर महात्मा बुद्ध और अंततः भगवान बुद्ध हो निर्वाण हो जाना… 2,561 वर्ष पहले किनको पता था कि भारत के बिहार (यह […]

कविता

माँ के नाम से गाली बकनेवाले ‘कलंकित’ लोग

सभी स्वार्थी हैं, अन्यथा सिर्फ़ घर्षण के लिए शादी और अपने ही वीर्य के बच्चे क्यों चाहिए हमें ? ‘गोद’ लेकर अनाथ बच्चों का जनसंख्या कम कीजिए ! गाँवों ही नहीं, शहरों के दबंग और नेतानुमा लोग ‘माँ’ के नाम पर गाली बकते हैं, जैसे- मादर.. उस जैसे लोग ‘मदर्स डे’ के लिए कलंक हैं […]

कविता

प्लाज़् ‘माँ’ और ऑक्सी ‘जन’

अभी तो…. प्लाज् ‘माँ’ ऑक्सी ‘जन’ ! ज़रा सी बात है पर हवा को कौन समझाये, दीये से मेरी माँ मेरे लिए काजल बनाती है। माँ का अर्थ माँ मतलब कुंती भी, मरियम भी, द्रोपदी-गांधारी भी, कैकेयी भी, पुतली भी, कमला कौल भी, हीराबेन भी, चंबल के डकैतों की माँ भी, मंथरा की माँ भी, […]