इतिहास लेख

शहीदों को सादर नमन

जिसतरह से कोई भी माँ हो, ‘माँ’ ही होती है, बावजूद ‘भारत माता’ की अलग ही महत्ता और पहचान है, उसी भाँति सभी शहीद समान सम्मान और आदर के वरेण्य पात्र होते हुए भी इन शहीदों में सरदार भगत सिंह की अलग महत्ता और विशिष्टता है । तभी तो इसे यूँ ही ‘शहीद-ए-आज़म’ नहीं कहा […]

लेख सामाजिक

यों नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते क्यों देवता ?

पूरी दुनिया 8 मार्च को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के रूप में मनाए जाने की परंपरा को जारी रखे हुए हैं । पहले तो नहीं, परन्तु अब जब यह सोचता हूँ, तो मुझे ताज़्ज़ुब होती है कि वर्ष के 365 दिनों में सिर्फ 1 दिन ही महिलाओं के नाम क्यों ? क्या एक दिन ही उनके […]

इतिहास स्वास्थ्य

महात्मा गांधी भी कुशल डॉक्टर थे !

महात्मा गांधी उर्फ़ गांधीजी, जिन्हें पूरा भारत ‘राष्ट्रपिता’ के नाम से पुकारते हैं, पर उन्हें मैं ‘बचपन’ से दादू कहती आयी हूँ, तो ‘दादू’ की रचना “आरोग्य की कुंजी” पढ़ी, जिसे पढ़ने में मात्र 40 मिनट लगी, लेकिन समझ अभी भी रही हूँ। गांधीजी जब 1942-44 के बीच ‘आगाखां महल, पुणे’ में नजरबन्द थे, तब […]

इतिहास राजनीति लेख

शोषित-वंचितों के मसीहा थे ‘कर्पूरी ठाकुर’

सिर्फ पिछड़े वर्ग के नहीं, हर धर्म-जाति में प्रताड़ित शोषित-वंचित लोगों के मसीहा थे- कर्पूरी ठाकुर । बिहार के दो बार मुख्यमंत्री बने और जनमानस में छा गए । वे पार्टी-पॉलिटिक्स से ऊपर की चीज हो गए, क्योंकि वे मानवता से प्यार करने लगे थे । तभी तो उन्हें ‘जननायक’ कहा जाने लगा था । […]

इतिहास राजनीति स्वास्थ्य

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस और भारतरत्न डॉ. विधानचंद्र राय

राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस यानी नेशनल डॉक्टर्स डे पर देश के चिकित्सकों को सादर अभिनंदन है । दरअसल पटना, बिहार के बाँकीपुर मोहल्ले में जन्मे भारतरत्न डॉ. विधानचन्द्र रॉय पश्चिम बंगाल के दूसरे मुख्यमंत्री थे, वे ताउम्र मुख्यमंत्री रहे, वो भी 14 वर्ष तक और उन्होंने डॉक्टरी शिक्षा यानी LMP और MD की डिग्री तब लिए, […]

इतिहास लेख

हिंदी फ़िल्म ‘फिल्लौरी’ के नायक की शहादत गाथा भी वह !

देश के ऐसे युवाओं को देश के प्रति ज़ज़्बा पैदा करने के लिए 13 अप्रैल 1919 की ऐतिहासिक व मर्मभेदी घटना को आत्मसात करने चाहिए । इस तारीख को यानी वैशाखी पर्व के दिन अमृतसर में जलियांवाला बाग में रॉलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सभा हो रही थी । इस सभा में […]

लेख विविध

कोई भी संविधान से ऊपर नहीं हैं !

मई 2017 में प्रकाशित आलेख “न्यायाधीश को सजा पर सवाल” (लेखक श्री विराग गुप्ता) में कई बिम्ब उभर कर आते हैं, बावजूद जो लोग भारतीय संविधान को लचीला और कमजोर मानते आ रहे थे, उन्हें किसी उच्च न्यायालय के कार्यरत न्यायमूर्ति को मिले 6 माह की जेल की सजा -से एक सबक जरूर लेना चाहिए […]

इतिहास लेख

सिख धर्म के 10 वें गुरु के जन्मदिवस ?

माननीय विधान पार्षद डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने अंग्रेजी तारीख का हवाला देते हुए 22 दिसम्बर को गुरु गोविंद सिंह साहब का जन्मदिवस बताया है, किन्तु सिख धर्म के 10 वें गुरु के जन्मदिवस को भारत सरकार, पंजाब सरकार और बिहार सरकार ने विक्रमी संवत के अनुसार माना है, जो कि पौष शुक्ल सप्तमी है […]

राजनीति लेख

चिह्नित स्थानों के प्रतिभाओं की अनदेखी !

बारह करोड़ बिहारी में पद्म अवॉर्ड की संख्या अत्यल्प क्यों ? उदाहरणतः ‘पद्म अवॉर्ड’ -2017 के लिए दिनांक-14 सितम्बर 2016 को मैंने दो महान् इंसान के नाम का nominate किया था, पहला नाम “दीपा मलिक” । याद है न आपको ! “रियो पैरालंपिक रजतपदकधारी”, जो 46 वर्ष की उम्र में कमर से नीचे शून्य और […]

इतिहास लेख

देश-दुनिया में विशिष्ट है बिहार की ऐतिहासिक संस्कृति

भारतवर्ष में बिहार एक राज्य है । ‘बिहार’ शब्द ‘विहार’ से अंतर्निहित हो न केवल अपनेपन का कारण है, अपितु यह बहुचर्चित शब्द पर-बोध लिए भी संसारवालों को गुदगुदाते हैं और फिर ‘बिहार’ से निःसृत अपत्यवाची-संज्ञा ‘बिहारी’ दुनिया की एकमात्र अस्मिता – संरक्षित ‘संस्कृति’ लिए आज भी चिरनीत हैं । बिहार सभ्यता-कालों से सनातन हिन्दू […]