पर्यावरण लेख विज्ञान

असम्बद्ध वस्तुस्थितियों के अध्ययन से ‘भूकम्प’ पर भविष्यवाणी संभव ?

मोबाइल फोन के 2 सिम्पल सेट में एक को हम sound वाइब्रेशन में रखकर उसे पृष्ठ भाग के सहारे सपाट प्लास्टर की हुई बरामदे पर रखते हैं, दूसरे मोबाइल फोन से वाइब्रेशन वाले मोबाइल सेट पर फोन लगाते हैं, तो यह एन्टी-क्लॉक गति से घूमने का प्रयास करती है, वहीं मोबाइल के स्क्रीन साइड को […]

लेख विविध

कक्षा- प्रथम से विश्वविद्यालयीय छात्रों और शिक्षकों के हितार्थ

विश्वविद्यालय में छात्रों के पहुँचने के 1 या 2 साल के बाद ही वो बालिग हो जाते हैं, इसलिए विश्वविद्यालयीय छात्रों के लिए खास चिंता की बात नहीं हैं । वैसे भी महाविद्यालय व विश्वविद्यालय में काफी स्पेस व जगह होती हैं, जो कि फिजिकल डिस्टेंसिंग की फॉर्मेलिटीज पूर्ण करने के लिए पर्याप्त हो सकते […]

लेख विज्ञान

1 से 1,00,000 तक की संख्याओं का वर्गमूल निकालने की आसान विधि

1 से 1,00,000 तक की संख्याओं का वर्गमूल निकालने की आसान विधि विधि (1.) 3 अंकों की संख्याओं का वर्गमूल निकालने के लिए संख्या के प्रथम अंक को इस दृष्टि से उपयोग में लाते हैं, ताकि वह किसी पूर्ण वर्ग में या उसके सन्निकट आ जाए । फिर मौखिक रूप से उक्त गुणन के दोनों […]

समाचार

कविता पुस्तक ‘तुम ही तुम’ का विमोचन के सालभर बाद

‘तुम ही तुम’ नाम्नी कविता-संग्रह व गीत-संग्रह प्रकाशित होने में 30 साल लग गए ! मैंने सुरेश सर (श्रीमान सुरेश चंद्र ‘सरस’) से ‘तुम ही तुम’ सीरीज की पहली कविता व गीत 1989 में उन्हीं के श्रीमुख से सुना था, जब मैं सर जी को अपनी कहानियाँ सुनाया करता था ! ‘तुम ही तुम’ की […]

कविता

उपसंहार

अंतिम – पात्र  प्रवीर सुधन्वा को, धन्ना – धन से कोई मेल नहीं, सन्तातिथि  सेवक  होकर  भी , भगवान को पाना खेल  नहीं । दृढ़-प्रतिज्ञ अटल सुधन्वा  ,  द्वार पर भगवान लाना चाहता था, तप  की  प्रतिगमन से आज , नहीं मौका छोड़ना चाहता  था  । सुधन्वा     जब      देखा    वहाँ ,  तो   कृष्ण   नहीं   थे    […]

कविता

एक गांडीव

गाण्डीव    धरा,  अर्जुन    चला  ,  रथ    पर   हो   सवार  , अश्वमेध   का   घोड़ा   आगे ,  पीछे    में  सैनिक   हजार  । विजयी – विजयी  की  नाद , बात  बहुत – ही  पुरातन  थी , घोड़ा  हिन्  – हिन्  कर  ठहरा , चम्पकपुरी भी पुरातन थी । अर्जुन  के  रथ  पर अर्जुन  केवल, न मातालि, न  कृष्ण […]

कविता

परमेश्वर की संतान !

सर्व   सिद्धांत   व  नियम  का ,  पालन    किया   यीशु  , तू     पिता ,    परमेश्वर    के    पूत , मैं     तेरा    शिशु । यीशु  है प्रभु , पिता ,पूत , नीति – रीति, युद्ध – शान्ति है, गाँधी  औ’  मार्क्स – विचार ही, महाबुद्ध  –   क्रान्ति  है । मठ  – मस्ज़िद  या श्री  गिरजा में, न  रहता  […]

कविता

परीक्षा घड़ी

शंख,  लिखित दो  ऋषि भाई थे,  हंसध्वज  के राज में , थे राजगुरु, राज-पंडित औ’ शास्त्र, ज्योतिष, काज में  । वक्ता शंख, संतलेखक लिखित – दोनों थे लिपिबद्धकार, पर मंथरा  –  सी कटु – कर्म, कटु – नारद थे निर्बन्धकार। कथानक ,  चरित्र  –  चित्रण   और   संवाद  के  प्रेमी थे , शैली,  देश,  काल,  उद्देश्य- […]

कविता

समय चक्र

दिन, सप्ताह, मास, वर्ष  तो  प्रथम  सभ्यता  प्रतीक   है , यूरेशिया  या  रोम-रोम  अपभ्रंश , भारतवर्ष  से  दिक् है। चैत्र जहाँ मार्च माह, सम्राट मार्स  वा  मार्च थे युद्ध-देवता , अप्रैल है वैशाख अमोनिया-एपरिट , है प्राक्  शुद्ध देवता। हिंदी – अँग्रेजी  की  साम्यता  में,  विक्रमी  ईस्वी  सन्  है , एटलस-तनुजा-रूप मई है जेठ, तो […]

कविता

सत्यार्थ युद्ध

समाचार  यहाँ ,   घोड़ा  यज्ञ  का ,  नगर  –  प्रवेश  किया  है , पकड़ो  –  पकड़ो  का  आदेश  ,  हंसध्वज  महेश  किया  है । स-अक्षर   के   साक्षर   पुत्र,   पंच   पुत्र  थे  पांडव    समान , एक  –  एक  बल  –  आज्ञाशाली, वे  किशोरवय   के  जवान । सुगल  ज्येष्ठ  पुत्र  थे  ताकतवर , ब्रह्मास्त्र   वह   पाया   था  […]