पर्यावरण लेख

मानसूनी किचकिचाहट

मानसून आ गई और आँधी-तूफान और मूसलाधार बारिश में ने मिट्टी के घर गिरा दिए, टीन के घरों को उड़ा दिए । पक्के मकानों की वेंटिलेशन को तोड़कर पानी सोते के ऊपर उड़ेल दिए ! खेतों में लगे फसल यथा- गेहूँ, मकई आदि और कटे फसल को तबाह कर दिए । कई हजार पेड़ों को […]

क्षणिका

कामायनी की श्रद्धा की खोज !

स्कूल में जब पढ़ता था सह-शिक्षा की परंपरा थी साथ थी छात्राएँ तब जमीन पे नजर गड़ाएं रहती थी वो कामायनी की श्रद्धाएँ और लज्जाएँ थी ! आज न लज्जा है, न श्रद्धा ! मोबाइल के कॉलिंग में मुर्गा नम्बर वन, टू, थ्री लिख रखी हैं !

क्षणिका

विस्फोटक काव्यरस

ऐसे काव्यरस की सर्जना करूँ बीते सालों के यौन-रसीले सेक्स-बुखारे भी कथावाचक, संपादक, और कानून के साहब, साहित्यकार भी उन्मत्त हाथी के मानिंद एकसाथ चिंघाड़ उठे- मोगेम्बो खुश हुआ !

कविता

शर्म करो नवयुवकों

लड़कों में उच्च शिक्षा पाए कितने साथी हैं हमारे क्या हमारी चादरों की लंबाई पाँव से बाहर होकर आवारागर्दी करने में है हम शॉर्टकट चाहते हैं, सामने की अट्टालिका निहारते हैं स्वयं तो कुछ करते नहीं, बस स्वयं को समाजसेवी कह दूसरे की छाती और नितंब ही निहारेंगे, शर्म करो !

कविता

अंतरात्मा की आवाज

कह दो हिमालय से अरुणिमा सिन्हा ने कर दी है अभिमान वो तेरा चूर-चूर ! हे ओलंपिक ! देवेन्द्र झाझरिया कर दिया है तेरा दो-दो बार मर्दन ! दीपा मल्लिक जिनके पास है पचास से ज्यादा विविध पदक ! मंत्री जयपाल रेड्डी को कैसे भूल सकते हैं, लोग ! और आदरणीय करुणानिधि जी फिर इधर […]

कविता

यह मेरा-तेरा क्या है

एक दोस्त की वो बातें हमेशा याद आती है कि मैं कहता हूँ फटा है, पुराना है, पर मेरा बिहार महान है ! पर वो कहती है मेरा बिहार नहीं, लाख परेशानी हो यहाँ, फिर भी कोई प्रान्त नहीं, अपितु भारत महान है, भारत महान है !

कविता

बिजली कट जाने के बाद

बिजली कट जाने के बाद चुन्नू पढ़ने नहीं बैठते हैं मैडम खाना नहीं बनाती है, मोबाइल चार्ज नहीं हो पाती है, इस्त्री नहीं हो पाता है, रातभर नहीं आए बिजली, तो….. रात का भोजन बंद, क्योंकि मैडम की सीरियल जो नहीं चली ! ढिबरी युग से हम काफी आगे निकल चुके हैं यानी बिजली गुल, […]

भाषा-साहित्य लेख

हिंदी लेखकों को खुलकर लिखने नहीं दिए जाते !

मुझे आश्चर्य इस बात की है कि लेखकों से हिंदी और देवनागरी लिपि की अपेक्षा रखनेवाली एक पत्रिका ने मुझे जो मेल भेजे हैं, वो अंग्रेजी और रोमन लिपि में है ! डॉ. गुणाकर मुळे ने कहा है कि हिन्दी भाषा का विकास सिर्फ कविता और कहानियाँ लिखने से ही नहीं होगी, हिंदी माध्यम से […]