कविता

कविता – वो लेखिका नहीं थी

वो लेखिका नहीं थी… वो कवियत्री भी नहीं थी न जाने कब अपने भावो को सरल सहज आकार देने लगी कागजों पर । वो नहीं जानती थी कि क्या लिखती है पर जो जीती थी लिखती थी अपने लिए न कोई भय न संकोच न मात्रा देखती थी न व्याकरण समझती थी गिनती तो दुर […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

टपकते आंसुओं को खारा पानी न समझो, हो गई बात यूँ ही , आनी जानी न समझो। आहत मन के आह से बरसेगा तेजाब , इसी मोड़ पर खत्म ये कहानी न समझो । दुष्कर्म तुम्हारा, मर्यादा नारी की कुचली? इतनी तो बेमोल ज़िंदगानी न समझो । नहीं खत्म इसी बात पर ये बात होगी […]

कविता

कविता

चुप्पी चुभती हैं मन मूक है ऐसे वार किया है विवशता ने चौंक कर चीख उठी है अंतरात्मा । बिंध गए हैं सारे सवाल संग्राम हृदय और मस्तिष्क में है । भावो भरी प्रत्यंचा खालीपन लिए तरकश में सहमा सहमा शिथिल कांधे पर झूल रहा है। व्यथित विडंबना कि मौन से ही घायल मौन औंधा […]

लघुकथा

लघुकथा – विदा का वक्त

   शाम गहरा रही थी। दोनों का एक दुसरे से विदा लेने का वक्त आ चुका था। राजीव अमेरिका जाने के निर्णय पर अडिग था जब कि विभा अपनी माँ को छोड़कर जाने को तैयार नहीं हो रही थी । हो भी कैसे ? माँ का उसके अलावा दुनिया में था कौन।       […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

क्यों करें ‌कोई शिकायत दोस्तों है बुरी रोने की आदत दोस्तों जो कभी कहते थे खुद को बावफा सामने है अब हक़ीक़त दोस्तों बेसबब ही खुद को उनपर वार के सह रहा है दिल मलामत दोस्तों जाओ अब मुझको अकेला छोड़ दो मत करो कोई सियासत दोस्तों हौसला है अब भी गिरकर मैं उठूं फिर […]

गीत/नवगीत

गीत – तुम बिन सावन आग लगाये‌

कैसे कहूं मुंह से कहा ना जाये कि तुम बिन सावन आग लगाये‌ । भीगा मौसम, भिगाये मन मेरा ठंडी हवाएं सिहराये तन मेरा बिजली तड़प कर मुझको डराये‌ कि तुम बिन सावन आग लगाये‌। बागों में अब पड़ गये झूले ओ जी पिया तुम कैसे ये भूले सखियों का संग मन को ना भाये […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

कभी मैं न रहूं, पीछे से मेरा नाम लेना तुम जो लम्हें साथ में गुजरे वो लम्हें थाम लेना तुम । कभी जब याद आऊं और तुम्हारी आंख भर आए हवाओं से, घटाओं से मेरा पैगाम लेना तुम ।। — साधना सिंह

लघुकथा

लघु कहानी – कब तक ?

बचपन से ही उसे डांस का बहुत शौक था । अक्सर छुप छुप कर टीवी के सामने माधुरी के गाने पर थिरका करती थी । जब वह नाचती थी तो उसके चेहरे की खुशी देखने लायक होती थी । मां भी बेटी के शौक के बारे में अच्छे से जानती थी .. कई बार मां […]

गीत/नवगीत

पानी …

बहते हुए पानी की बस इतनी कहानी है कि ये है तो हम है और हमारी जिंदगानी है । निर्झर कल-कल, छल-छल है जल इससे पल्लवित पोषित नभ-थल कितना पावन है ये जिसका रंग आसमानी है। हरी है घरती और भरा गगन है पानी है तो जन जीवन है , पर अर्जित अमृत व्यर्थ खो  […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल – तपती दुपहरी

तपती दुपहरी है, उसपे बेरहम तन्हाई है, दिल को बहलाने तुम्हारी याद चली आई है । तुम नहीं, लेकिन तुम्हारा एहसास मेरे पास है बेवजह ही आंख मेरी किसलिए भर आई है ? गर्म हवाओं ने भी ना जाने क्या जादू किया कि, हुआ यूं महसूस जैसे वही खुशबू  तुम्हारी आई है । मन बड़ा […]