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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    क्यों करें ‌कोई शिकायत दोस्तों है बुरी रोने की आदत दोस्तों जो कभी कहते थे खुद को बावफा सामने है अब हक़ीक़त दोस्तों बेसबब ही खुद को उनपर वार के सह रहा है दिल मलामत दोस्तों...


  • मुक्तक

    मुक्तक

    कभी मैं न रहूं, पीछे से मेरा नाम लेना तुम जो लम्हें साथ में गुजरे वो लम्हें थाम लेना तुम । कभी जब याद आऊं और तुम्हारी आंख भर आए हवाओं से, घटाओं से मेरा पैगाम...

  • लघु कहानी –  कब तक ?

    लघु कहानी – कब तक ?

    बचपन से ही उसे डांस का बहुत शौक था । अक्सर छुप छुप कर टीवी के सामने माधुरी के गाने पर थिरका करती थी । जब वह नाचती थी तो उसके चेहरे की खुशी देखने लायक...

  • पानी …

    पानी …

    बहते हुए पानी की बस इतनी कहानी है कि ये है तो हम है और हमारी जिंदगानी है । निर्झर कल-कल, छल-छल है जल इससे पल्लवित पोषित नभ-थल कितना पावन है ये जिसका रंग आसमानी है।...

  • ग़ज़ल – तपती दुपहरी

    ग़ज़ल – तपती दुपहरी

    तपती दुपहरी है, उसपे बेरहम तन्हाई है, दिल को बहलाने तुम्हारी याद चली आई है । तुम नहीं, लेकिन तुम्हारा एहसास मेरे पास है बेवजह ही आंख मेरी किसलिए भर आई है ? गर्म हवाओं ने...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    वह मेरे साथ है ….पर गैरो के मुक़ाबिल है .. मेरा महबूब भी दुश्मनों की तरह काबिल है । जान बूझ कर सताया करता है मुझको फिर कहता है, मेरे हाल से नही गाफ़िल है ।...

  • कविता – किताबें

    कविता – किताबें

    किताबें सबसे प्रिय मित्र ,संगी- साथी और मार्गदर्शक होते थे उन दिनों । बचपन में लोरी बन कर हमें हंसाते थे , गुदगुदाते थे , बहलाते थे , सुलाते थे । जवानी में लिपटकर सीने से...

  • कहानी – सरप्राइज

    कहानी – सरप्राइज

    “प्रीति ! कहां हो यार , देखो क्या सरप्राइज लाया हूं तुम्हारे लिए .. खुशी से झूम उठोगी”।  प्रतीक ने घर में घुसते ही आवाज लगाई ।    “आ रही हूं बाबा , यहीं हूं “। प्रीति...

  • कविता .. दलील

    कविता .. दलील

    अनजान बेचैनियों में लिपटे, मेरे ये इन्तज़ार लम्हें तुम्हें आवाज़ देना चाहते हैं.. पर मेरा मन सहम जाता है । तुम जानते हो क्यों? फिर सवाल… तुम हंस पड़ोगे , या तुम्हारे पास कोई लम्बी सी...