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  • कातिल निगाहों को उठाइए जरा

    ये बच्चा सच बहुत बोलता है,यहाँ जी नहीं पाएगा ज़माने के मुताबिक इसे झूठ भी सिखलाइए जरा बेशुमार खुशी बयाँ कर दी सरे-महफिल आपने हर एक खुशी में छिपा दर्द भी दिखलाइए जरा ये सारे नए...

  • आना कभी मेरे गाँव

    आना कभी मेरे गाँव

    अच्छी नौकरी,चमचमाती गाड़ी,आलीशान बंगला फिर भी बेचैन से रहते हैं कुछ तो था मेरी उस टूटी झोपड़ी में कि सूखी रोटी से भी काम चल जाता था सब कुछ पाकर भी साफ हवा,शुद्ध पानी,स्वच्छ निबाले को...


  • सामने वाली खिड़की में

    सामने वाली खिड़की में

    मेरे मोहल्ले में दिवाली सी ही रौनक रहती है सामने वाली खिड़की में साँवली लड़की रहती है सँवर के आए अप्सरा से और आईना न देखे वो शायद अपने ही नर्गिसी रूप से डरती है ज़ुल्फ़...

  • काजल करने के लिए ताज़ा खूँ चाहिए

    काजल करने के लिए ताज़ा खूँ चाहिए

    इन आँखों को नूर नहीं जुनून चाहिए काजल करने के लिए ताज़ा खूँ चाहिए गीत,ग़ज़ल,कविता,नज़्म सब बोलती हैं जिससे हज़रात क़त्ल हो,मजमून चाहिए जिस्म में गर्मी,लबों पे आग,अदाओं में चुभन इन्हें अब दिसम्बर में भी जून...




  • गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो

    गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो

    गर हो आज तुम्हारी इजाज़त मुझे तो आसमाँ पे तुम्हारी इबारत लिखना चाहता हूँ तमाम दौलतें एक तरफ और तुम्हारी एक मुस्कान मैं तुम्हारी मुस्कान पर भरे बाज़ार बिकना चाहता हूँ रात की चादर हटे और...