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  • तमाशा मज़ेदार न था

    तमाशा मज़ेदार न था

    वो खरीद लेता था सबके आँसू बेधड़क वो इस ज़माने के लिए अभी समझदार न था कुछ तो कमी थी जो तू किसी की न हो सकी तेरा हुश्न कातिल तो था पर ईमानदार न था...





  • अकर्मण्यता

    अकर्मण्यता

    ये तुम्हारी जड़ता तुम्हारी अकर्मण्यता एक दिन उत्तरदायी होंगी तुम्हारे ह्रास का और कठघरे में खड़ी होंगी और जवाब देंगी सृष्टि के विनाश का परिस्थतियाँ खुद नहीं बदल जाती हैं या सम्भावनाएँ यूँ ही नहीं विकसित...


  • विचार कभी मर नहीं सकते

    विचार कभी मर नहीं सकते

    आज तुम मुझे नकार दोगे अपनी आत्म-संतुष्टि की भूख में गिरा दोगे मुझे मेरे शीर्ष से जो मुझे प्राप्त हुआ है मेरे अथक प्रयत्न से और तुम चोरी कर लोगे मेरे सारे पुरूस्कार जो मेरे हाथ...

  • मेरी कविताएँ

    मेरी कविताएँ

    मेरी कविताएँ नहीं होना चाहती शामिल निरर्थक आपाधापी में शेयर,लाइक,कमेंट्स की झूठी मक्कारी में जहाँ भाव,अर्थ सब नदारद हैं किसी शीर्ष स्थान की तैयारी में मेरी कविताऍं बात करना चाहती हैं उन सभी मुद्दों पर जिनको...