गीतिका/ग़ज़ल

खूं की जद में अब आसमाँ आया है

समन्दर  में  जब  तूफ़ान  आया  है कश्तियों   का  इम्तहान   आया  है उजड़  गए जब सारे बाग़  – बगीचे टहलता  हुआ तब बागबाँ  आया है पंख क़तर के अमन कायम कर दी फिर बहेलिए को इत्मीनान आया है सारे बस्ती जलती रही तो कुछ नहीं अपना मकाँ  जला तो जुबां आया है जब हिम्मत […]

राजनीति

महामारी और रास्ता

COVID-19 महामारी ने दुनिया भर के देशों में तबाही मचा दी, जिसके कारण तालाबंदी करना पड़ा। देशव्यापी लॉकडाउन 25 मार्च 2020 से लागू हुआ। लॉकडाउन के दौरान, आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को प्रदान करने वाले और कृषि कार्यों में शामिल लोगों के अलावा सभी प्रतिष्ठानों को बंद कर दिया गया है। आवश्यक वस्तुओं में भोजन, […]

गीतिका/ग़ज़ल

क्या-क्या छुपाने लगे हो तुम

कितना मुश्किल है तन्हा जीना, बताने लगे हो तुम जिस तरह से हर घड़ी अब याद आने लगे हो तुम तुम्हें कहाँ याद आती होंगी अब मिट्टी  की खुशबू मेरे बेटे, क्या करें शहर में जो कमाने लगे हो तुम कैसे जी पाओगे इत्मीनान से , दो – चार  दिन भी क्यों ज़माने भर का […]

भाषा-साहित्य

लेखन-सरल या जटिल

लेखन एक जटिल और अक्सर रहस्यमय प्रक्रिया है। हालाँकि हम इसे पृष्ठ पर अक्षरों और शब्दों को व्यवस्थित करने से बस थोड़ा अधिक सोचने जैसा लगता है, लेकिन कुछ क्षणों के प्रतिबिंब से पता चलता है कि यह इससे कहीं अधिक है। एक ओर, लेखन एक कला है – हम यह नहीं कहते कि शेक्सपियर […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

इंतज़ार करने से भी सब हासिल नहीं होता जो दरिया है , वो  कभी  साहिल नहीं होता ज़िन्दगी भले  ही हो  रोज़ नज़्र-ए-मसाइल* खुदाया , ये  दिल कभी बोझिल नहीं होता वो मुझ तक आता  है और  गुज़र जाता है बसा है नैनों में, रूह में शामिल नहीं होता कैसे मानें कि बेहद कुछ अच्छा […]

राजनीति

मीडिया और महिला

इस तथ्य से कोई इनकार नहीं करता है कि भारतीय प्रेस में महिलाओं की बढ़ती उपस्थिति पिछले एक दशक में पहले से कहीं अधिक स्पष्ट हो गई है। उन्हें हर जगह स्पॉट किया जाता है – जहां भी समाचार उत्पन्न होता है, समाचार डेस्क को संभालना, संस्करणों की निगरानी करना और न्यूज़रूम में चारों ओर […]

सामाजिक

मृत्युदंड

मृत्युदंड का मतलब है कि  एक अपराधी को फांसी की सजा जिसमें अक्षम्य अपराध के लिए कानून की अदालत द्वारा दोषी ठहराया जाता है। कानून की उचित प्रक्रिया के बिना किए गए अतिरिक्त सजा से मृत्यु दंड को अलग किया जाना चाहिए। मृत्युदंड का उपयोग कभी-कभी “कैपिटल पनिशमेंट” के साथ किया जाता है, हालांकि जुर्माना […]

गीतिका/ग़ज़ल

बुरा मत कहो

वो  बदगुमान  है बुरा मत कहो आखिर इंसान है बुरा मत कहो औरों पे क्या असर होगा, छोड़ो अपनी जुबान है  बुरा मत कहो पैसों से सब खरीदने वाले लोग बहुत नादान हैं  बुरा मत कहो उससे निभ न पाया,तुम समझो अभी परेशान है  बुरा मत कहो बद्दुआएँ दूर तलक  जाती हैं कहीं रमज़ान है […]

राजनीति

नागरिकों को नैतिक होने के लिए सूचित करने की आवश्यकता है

गांधी ने महसूस किया था कि शिक्षा से न केवल ज्ञान में वृद्धि होनी चाहिए बल्कि हृदय और साथ में संस्कृति का भी  विकास होना चाहिए। गांधी हमेशा से और हित चरित्र निर्माण के पक्ष में थे। चरित्र निर्माण के बिना शिक्षा उसके अनुसार शिक्षा नहीं थी। उन्होंने एक मजबूत चरित्र को एक अच्छे नागरिक […]

गीतिका/ग़ज़ल

अब बचा लो तुम

मुझे नहीं, इस बारिश को अब बचा लो तुम सालों से बेलिबास हैं, गले इसे लगा लो तुम कहते हैं कभी पूरे शबाब पे हुआ करती थी अब दिखती भी नहीं, फिर इसे बुला लो तुम ये सूखे पेड़, ये प्यासे पंछी और ये गर्म हवाएँ जो आस में हैं, उस बारिश को मँगा लो […]