Author :


  • छल-कपट का पाशा फेंकते रहिए

    छल-कपट का पाशा फेंकते रहिए

    जब तक देख सकते हैं, देखते रहिए दूसरे की आग पर रोटी सेकते रहिए बाज़ी किसकी होगी ,किसको पता है पर छल-कपट का पाशा फेंकते रहिए अपनी -अपनी छतें और ऊँची कर लें जितना हो सके,आसमाँ...

  • ग़ज़ल – बहार लेके चलते हैं

    ग़ज़ल – बहार लेके चलते हैं

    जब वो चले तो अदाओं में बहार लेके चलते हैं कभी गुलमोहर तो कभी गुलनार लेके चलते हैं जिधर देखें उधर वो ही नज़र आए हैं दफ़अतन वो अपने जिस्म में क्या खुमार लेके चलते हैं...




  • ज़मीर में सलामत  मुआमला रखिए 

    ज़मीर में सलामत  मुआमला रखिए 

    हर रिश्ते में थोड़ा फासला रखिए अभी से ही सही ये फैसला रखिए दूरियाँ खलेंगी लेकिन खिलेंगी भी अपने अहसासों पर हौसला रखिए हर कोई तो ख़ुशी का कायल नहीं हर घडी कोई नया मसअला रखिए...