कहानी

रोटियाँ

“चाची,रोटी क्या इतनी भी गोल हो सकती है,मानो कि पूनम का चाँद हो जैसे और वो भी बिना किसी दाग के। अगर तुम ऐसी ही रोटियाँ मुझे खिलाती रही तो मैं तो पूरे महीने का राशन एक दिन में खा जाऊँगा।” कौशल चाची की तारीफ करते-करते न जाने कितनी रोटियाँ खा चुका था। चाची बोली […]

गीतिका/ग़ज़ल

इस जहाँ में ख़लिश मैं ही हूँ दीवाना

इस जहाँ में ख़लिश मैं ही हूँ दीवाना या रात की ख़ामोशी सुनता है कोई और भी आसमान के नीदों में चहलक़दमी करके धरती के ख़्वाब बुनता है कोई और भी हवा के ज़ुल्फ़ों से बिखरे आफ़ताबों को ओंस की डाली में चुनता है कोई और भी धूप के टुकड़ों से सिली मख़मली चादर जिस्म […]

लघुकथा

तुम चलोगी क्या

“तुम चलोगी क्या?” क्षितिज ने जूतों के फीते बाँधते हुए रसोई में व्यस्त रश्मि से पूछा। कुकर की सीटी में क्षितिज की आवाज़ कहीं दब गई और सवाल जस का तस वहीं खड़ा रहा। जब कुछ देर तक कोई जवाब नहीं आया तो उसने फिर पूछा-“रश्मि,तुम चलोगी क्या?” उसकी तेज़ आवाज़ सुनकर मानो रश्मि किसी नींद […]

गीतिका/ग़ज़ल

गज़ल – ये किसी शायर की खुशनुमा शायरी नहीं

गुनहगारों का गुनाह क्या असर लाता है कि सारा शहर ही बियाबां नज़र आता है जो कदम गई यहाँ से वो धूल बनके लौटी वो गाँव टूटी टहनी वाला शज़र कहाता है जो बेटा गया तो माँ ताउम्र सो ही न सकी सिरहाने के भीगे तकिए का बसर बताता है गेहूँ, धान,मक्का,चना सब दफ़्न हो […]

कविता

कविता

क्या सुनाना था तुम महफ़िल में ये क्या सुना आए अगले शायर का कद शायद तुम्हें मालूम नहीं है बस एक ही वस्ल की उम्र थी तुम्हारे इंतज़ार की इश्क़ करनेवालों की हद शायद तुम्हें मालूम नहीं है दरिया का उमड़ना देखा है समंदर का तूफाँ बाकी है सरफिरे मौजों का जद शायद तुम्हें मालूम […]

कविता

कविता

मैं पीने को तो समंदर भी उठा लाता तेरी निगाहों से क्यों रिहाई नहीं मुझे महफ़िल झूम उठा है तेरी झलक से वो तस्वीर तेरी क्यों दिखाई नहीं मुझे वो नज़्म तेरे ही गाके मशहूर हो गया दिलकश तराने क्यों सुनाई नहीं मुझे चर्चे थे  हमारे  ही  नाम के ज़माने में ये राज़ कभी भी […]

कविता

कविता : कभी मिलना 

कभी मिलना उन गलियों में जहाँ छुप्पन-छुपाई में हमनें रात जगाई थी जहाँ गुड्डे-गुड़ियों की शादी में दोस्तों की बारात बुलाई थी जहाँ स्कूल खत्म होते ही अपनी हँसी-ठिठोली की अनगिनत महफिलें सजाई थी जहाँ पिकनिक मनाने के लिए अपने ही घर से न जाने कितनी ही चीज़ें चुराई थी जहाँ हर खुशी हर ग़म […]