गीतिका/ग़ज़ल

गजल

ख़फा ख़फा से हैं सब अपने बेगाने मेरे यही इनआम की है मुझको अदा ने मेरे इश्क उसने भी किया है वो मजे लेते हैं वो तो बरबाद किया मुझको वफ़ा ने मेरे दिया रकीब को कुछ ऐसे तआऱुफ मेरा शहर में दो चार ही हैं ऐसे दिवाने मेरे ख़त उनके जला आया तर्क उल्फत […]

गीत/नवगीत

गीत

तोड़ा न जाए इक बिरहन से ये अश्रु का अनुबंध नयन से ठहरी है पलकों पर , न ढ़लके बिन्दु में सिन्धु , किन्तु न छलके व्रत वेदिका पर वाहित व्यथाएँ कहती है करुणा दारुण कथाएँ रुदन से वर्जित रुठी शयन से ये अश्रु का अनुबंध नयन से कुल गौरव की भेंट चढ़ीं है विधि […]

गीतिका/ग़ज़ल

वफ़ा ने मेरे

वफ़ा ने मेरे ———————————————— ख़फा ख़फा से हैं सब अपने बेगाने मेरे यही इनआम की है मुझको अदा ने मेरे इश्क उसने भी किया है वो मजे लेते हैं वो तो बरबाद किया मुझको वफ़ा ने मेरे दिया रकीब को कुछ ऐसे तआऱुफ मेरा शहर में दो चार ही हैं ऐसे दिवाने मेरे ख़त उनके […]

कविता

अनुबंध

प्रेम के संदर्भ में जब अनुबंध की बात होती है तो मुझे अनायास ही याद आती है ” उर्मिला ” की। अहा ! कैसा निर्मम अनुबंध , वियोग लेना है और उस पर नहीं रोने की शर्त । क्या कोई व्रत , तपस्या , हठयोग इस अनुबंध से कठिन हो सकते हैं ???? इसी भाव […]

कविता

हास्य व्यंग्य कविता – नववर्ष संकल्प

कैलेंडर तो बदल दिया , खुद में भी कुछ रंग भरना है कंबल में दुबका सोच रहा , नए साल में क्या करना है सोच रुकी सेहत पे जा के उदर कमर के बाहर झाँके वजन मुइ मँहगाई बनी है लगे शतक की ओर ठनी है सोच रहा कुछ करुँ उपाय क्युँ ना कसरत ही […]

कविता गीत/नवगीत

मन्नत के ताले

मन्नतके ताले सीमा पर पदस्थ पति की सुरक्षा के लिए पत्नी श्रीकृष्ण से मन्नत माँगते हुए धागे में एक ताला लगाती है कि पति के आने पर उनके साथ ये ताला खोलेगी । सुनो हे मोहन ! मूरलीवाले दीन हीन जन के रखवाले लगा दिए हैं तेरे आसरे मन्नत के धागों पर ताले मन मेरा […]

कविता

कौन हो तुम ??

शिलालेख सी अबुझ पहेली सन्मुख , किन्तु मौन हो तुम व्याधि सी मन की आतुरता सच बतलाना , कौन हो तुम तुम प्रभव , प्रात की अंगड़ाई या सरस सांझ का यौवन हो दिवस की चढ़ती धूप धवल या निविड़ निशा मनभावन हो स्वप्नों के विलगित प्राङ्गण की तुम कोरी कल्पना कौमारी या असित सत्य […]

कविता

मेरे अंधेरे

१. मैं चाहता था तेरा वो आइना किरदार मेरी इसी चाहत ने तुझे पत्थर बना दिया २. तेरी आरजू में गुमराह हुआ हूँ मैं अपनी राह चलूँ भी तो कैसे ३. बुरा होके अब अच्छा नहीं लगता अच्छा होता कि मैं बुरा नहीं होता ४. यही सोच खुद को मैं आहूत नहीं करता गिरे हुए […]

कविता

तुम बिन

# तुम बिन बिन फूल-पात की डाली सी मैं तुम बिन खाली खाली सी जिसके आगे है घना अंधेरा मैं ढ़लती सांझ की लाली सी यादों में खोजूँ खुशबू रंगत एक बिखरे बाग के माली सी दिल्ली भी जिससे हलाकान उस जलती हुई पराली सी ना कहा जाए ना सहा जाए किसी राजा की कंगाली […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

गज़ल _____________________________ सलीके से छुपा रहीं हर अज़ाब आपका हैं ये मुस्कुराहटें या हिजाब आपका शाद हुस्न बेरहम क़यामती निगाह है कत्ल कर गया मेरा ये शबाब आपका इकअदा में है कज़ा इक अदा में जिंदगी आपका है इख्तियार इंतखाब आपका मेरे जह्नो-जान भी मिल्कियत है आपकी शब मेरी मेरी निगाह और ख्वाब आपका अलम […]