कविता

विजय दिवस

का = कायर शत्रु ने पृष्ठ घात करर र= रचा व्यूह कश्मीर पर गि = गिरिश्रृङ्गो की ओट से गीदड़ ल = ललकारा रण वीर पर वि = विपुल दामिनी दमक उठी ज = जब हिन्दुज ने हुँकार भरी य = यमग्रास हो गए पाक के पिल्ले दि = दिखी पराजय द्वार खड़ी व = […]

कविता

जो कर सको तो

मुझे भुलाने के तेरे दावे यकीन कर लो , जो कर सको तो न देखें मुझको , पलट के आँखें जहीन कर लो , जो कर सको तो मेरी सदा पे , न दिल ये धड़के मशीन कर लो , जो कर सको तो बेनूर से क्युँ , हैं लब तुम्हारे जरीन कर लो , […]

कविता

गालवान की गोद में

गिरकर जो हिमश्रृङ्गों से शौर्य शिखर पर उदित हुए तजकर स्थुल काया को कोटि हृदयों में जीवित हुए जो गालवान की घाटी में साहस के गौरव गान हुए जिनकी कीर्तिरश्मि में कुंद कोटि कोटि दिनमान हुए मैं उन भारत के वीरों का सादर अभिनंदन करता हूं उनकी पावन स्मृतियों में नत मस्तक वंदन करता हूं […]

कविता

बड़ी दूर थे तुम

‌जी चाहा कि पुकार लूं, पर क्या करते बड़ी दूर थे तुम ॥ आँखों में आकाश लिए इच्छाओं का पाश लिए कुछ करने की कोशिश में बिके हुए अवकाश लिए मशरूफ थे या मजबूर थे तुम फुरसत से मेरी बड़ी दूर थे तुम ॥ अपनी ही क्रीड़ाओं में सुखशोधित पीड़ाओं में घिरे हुए नटनागर से मुँहबोली […]

कहानी

टाइमपास

स्नेहा बालकनी में बैठी सुबह की रेशमी किरणों में अखबार पढ़ रही थी कि उसकी नजर अपने बेटे अमोल पर पड़ी जो मोबाइल में टकटकी लगाए मुस्कराए जा रहा था । उसके चेहरे पर चमक थी । मोबाइल पर उंगलियां फिरती और कुछ देर बाद फिर उसके चेहरे पर मुस्कान के नए रंग खिल जाते […]

लेख सामाजिक

दूरदर्शन

# दूरदर्शन लॉकडाउन अवधि के प्रथम दो सप्ताह में ‘दूरदर्शन’ का राष्ट्रीय चैनल सबसे अधिक देखा जाने भारतीय चैनल है । केवल बीस दिन पहले कोई यह बात कहता तो यह बात लगभग असंभव लगती। देश में संचार क्रांति और निजी चैनलों के आने के बाद से ही दूरदर्शन की दर्शक संख्या में निरंतर कमी […]

कविता

कुछ मैं लिखूं कुछ तुम लिखो

# कुछ मैं लिखुं , कुछ तुम लिखो मैं प्रेम लिखुं , तुम मिलन लिखो इस ढलती रात के तारों पर सरिता के शांत किनारों पर चंदा की झरती किरणों से इन कलकल निर्झर धारों पर मैं पुलक लिखूं तुम मयन लिखो मैं प्रेम लिखुं तुम मिलन लिखो व्याकुल मन की आशाओं में निज मौन […]

कविता

आशाओं के सेतू

# आशाओं के सेतू साथी ! चल मिलकर बाँधेंगे आशाओं के सेतू … तू व्यर्थ अकिंचन रोता है क्युँ साहस धीरज खोता है क्या रहा असंभव जग में जो हठ से संभव ना होता है हम साधन बल से हीन सही किन्तु उद्यम से क्षीण नहीं यह अविरल गंगा साक्षी है पौरुष विधि के आधीन […]

गीतिका/ग़ज़ल

गजल

ख़फा ख़फा से हैं सब अपने बेगाने मेरे यही इनआम की है मुझको अदा ने मेरे इश्क उसने भी किया है वो मजे लेते हैं वो तो बरबाद किया मुझको वफ़ा ने मेरे दिया रकीब को कुछ ऐसे तआऱुफ मेरा शहर में दो चार ही हैं ऐसे दिवाने मेरे ख़त उनके जला आया तर्क उल्फत […]

गीत/नवगीत

गीत

तोड़ा न जाए इक बिरहन से ये अश्रु का अनुबंध नयन से ठहरी है पलकों पर , न ढ़लके बिन्दु में सिन्धु , किन्तु न छलके व्रत वेदिका पर वाहित व्यथाएँ कहती है करुणा दारुण कथाएँ रुदन से वर्जित रुठी शयन से ये अश्रु का अनुबंध नयन से कुल गौरव की भेंट चढ़ीं है विधि […]