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  • प्रभात कामना

    प्रभात कामना

    # प्रभात कामना जगमग जागी रेशमी किरणें बीत गई है रात नवल भोर है लेकर आई खुशियों की सौगात जागो मेरे हिन्द के वीरों जागो मेरे यार देश धर्म की सेवा करने हो जाओ तैयार जो...

  • मित्रता दिवस

    मित्रता दिवस

    आज का दिन दोस्ती के नाम दोस्तों है दोस्ती को मेरा सलाम  दोस्तो ।। अगस्त का ये पहला रविवार खूब है ले के आया प्यार प्यार प्यार खूब है है कितना खूबसूरत ये रिश्ता जहां में...


  • सावन ( विन्यास )

    सावन ( विन्यास )

    विषय : सावन विधा : विन्यास __________________________________________ सा – सारा जग था विकल तपन से व – वट , तट , घट सूखे अकुलाये न – नव जीवन नव उल्लास लिए ” सावन ” जाने कब...

  • क्षणिकाएँ

    क्षणिकाएँ

    क्षणिकाएँ १ . लीची और भूख सत्ताओं का निर्बल से सदा यही व्यवहार जैसे लीची भूखे को हिं करती है बीमार ।। २ . चमकी लीची बता रही भइया जीव जीभ का रेट भरे पेट को...


  • नानी और ननिहाल

    नानी और ननिहाल

    गरमी अपने संग लाती लंबी छुट्टी हर साल छुट्टी आते हि याद आते नानी और ननिहाल बैठते हि छुक छुक गाड़ी मे दिखते अजब नजारे पीछे भागे पर्वत नदियाँ पेड़ और पौधे सारे पटरी का आपस...

  • परशुराम का संताप

    परशुराम का संताप

    # परशुराम का संताप यह संताप प्रबलतम् हृदय विशद का अमिट कलंक यह मुझ पर मातृ वध का सत्य है पितराज्ञा पाकर पातक व्यवहार किया था मैंने ममतामयी मात पर शस्त्र प्रहार किया था किन्तु सच...

  • बुद्धू कौन

    बुद्धू कौन

    ” बेटा , कथरीसाज आया है । पुरानी साड़ियाँ जो निकाली थीं लेकर आना जरा।” मेरी माँ बुला रहीं थी । ना ना ना , मुझे नही मेरी श्रीमति जी को। जी हाँ , वो उसे...

  • गजल

    गजल

    सहज लिखुँगा , सरल लिखुँगा भाव हृदय के , तरल लिखुँगा ।। बड़े सघन हैं , पीड़ सुपथ के किन्तु पन्नों पर , विरल लिखुँगा ।। अधरों पे रखी , झूठी तारीफें इनको नीति का ,...