गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

अपना मन रखिए निर्मल ।। राम मिलेंगे निश्चय कल ।। ऐसी नहीं समस्या कोई,, जिसका ना हो कोई हल ।। कर्म प्रधान अगर है जीवन,, तो भविष्य निश्चित उज्जवल ।। अपने दाग किसे दिखते हैं,, दर्पण साथ में लेकर चल ।। अच्छा हो, यदि मन भी हो,, ऐसा जैसा, वस्त्र धवल ।। गैरों के संग […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

सुख की चाह अगर है तो फिर तपना पड़ता है ।। हर मौसम की हर सूरत को सहना पड़ता है ।। रिश्ता कायम रखने को सब सहना पड़ता है ।। कभी कभी सच्चा होकर भी झुकना पड़ता है ।। रिश्तों के दरमियां दरारें और न बढ़ पाएं,, अक्सर सब सुनकर भी बहरा बनना पड़ता है […]

समाचार

कन्नौज महोत्सव में स्थानीय कवि सम्मेलन

कन्नौज महोत्सव में स्थानीय कवि सम्मेलन में हास्य व्यंग,वीर रस की कविताओं पर खूब तालियां बजीं। एआरटीओ इज्जा तिवारी ने , पूछने आई मुझसे हवा,,खोई खोई कहां हो तुम सुनाकर श्रोताओं को लुभाया। अंजू दीक्षित ने नारी शक्ति पर रचना पढ़ी । अतिरिक्त मजिस्ट्रेट राकेश कुमार त्यागी ने जीवन के विविध सन्दर्भों को अपनी कविता […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

तोहमतें लग रहीं सबेरों पर ।। कुछ मेहरबान हैं अंधेरों पर ।। जोर देखेंगे अब हवाओं का रख दिए हैं दिये मुंडेरों पर ।। धन की मादकता का असर अक्सर चढ़ ही जाता है नव कुबेरों पर ।। सर्प पलते हैं आस्तीनों में और इल्जाम है सपेरों पर ।। — समीर द्विवेदी नितान्त

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

हद से ज्यादा करीबियां बढ़ कर ।। दूरियों में बदलतीं हैं अक्सर ।। आंधियों का नहीं कोई भी डर ।। दीप रक्खेंगे हम मुड़ेरों पर ।। ये भी है सोचना बहुत लाज़िम,,, किसका आशीष है तेरे सर पर ।। मेरी मंजिल की भी खबर हो तुम्हें,,, वाकई हो अगर मेरे रहबर ।। शेर की इक […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

इस दीवाली रोशनी का बोलबाला चाहिए ।। सबके घर मे सबकी छत पर दीपमाला चाहिए ।। दीप मेरे हाथ मे हो या तुम्हारे हाथ मे । फर्क क्या पड़ता है दुनिया को उजाला चाहिए ।। — समीर द्विवेदी नितान्त

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

घर में जाओ तो छोड़ दो बाहर ।। अपने दुख दर्द अपनी चिंता फिकर ।। उसको किस बात का भला हो डर ।। जिसका पक्का यकीन ईश्वर  पर ।। उसकी  मर्जी  है  तो  रवां  होगी,,, नाव  तूफान में भी  लहरों  पर  ।। वो भी निकले संभालने दुनिया,,, जिनसे खुद का नहीं संभलता घर ।। मान […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

ध्यान इतना रहे उड़ानों में रुक न पाओगे आसमानों में अक्सर अब होते ही नहीं हैं घर लोग रहते हैं अब मकानों में आनलाइन का दौर आया है अब कहां भीड़ है दुकानों में मुझसे ज्यादा अमीर कौन यहां दोस्त अनमोल हैं खजानों में खूब सुर्खी बटोरिए लेकिन यूं न भरिए जहर बयानों में ऐ […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

कैसे सीखें दुनियादारी । सीख नहीं पाए होशियारी।। मतलब छूटा रिश्ते छूटे यानी अब मतलब की यारी ।। खाली पेट हुआ ना करतब धरी रह गई सब फनकारी ।। नियम कायदे सर पर रख कर किस्मत घूमें मारी मारी ।। चन्द आवारा फिरें भेड़िया दहशत में है हिरन बेचारी ।। — समीर द्विवेदी नितान्त

समाचार

कवि सम्मेलन

75अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में स्वतन्त्रता दिवस की पूर्व संध्या पर जलालपुर सरबन में  विराट कवि सम्मेलन और मुशायरा का आयोजन किया गया। जिसमें कन्नौज और कानपुर के साहित्यकारों ने देशभक्ति की रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इसी आयोजन में माननीय मंत्री श्री असीम अरुण जी द्वारा साहित्यकारों को सम्मानित भी किया गया।