हास्य व्यंग्य

शाब्दिक व्यंग्य  : जिनावर का जिन्न

जिनावर , यह शब्द मैंने लगभग बारह- तेरह वर्ष की आयु में सुना था और इसका अर्थ जानवर या पशु से लगाया था । ज्यों- ज्यों मेरी उम्र बढ़ी, त्यों- त्यों समझ आते-आते मुझे यह निश्चित हो गया कि ‘ जिनावर ‘ का अभिप्राय ‘ जानवर ‘ से  नहीं है ; ना आदमी से ही […]

हास्य व्यंग्य

क्या हो रा’ है  का खटराग !

“क्या हुआ ; क्या हुआ ;  क्या हो रा’ है “- एक साँस में वह तीनों लघु वाक्य बोल गया था! आंखों में घोर कौतूहल ; सब कुछ जान लेने की आतुरता और भीतर ही भीतर एक क्रूर मज़ा, वह मेरे बिल्कुल पास खड़ा था और मेरी ही तरह तीन छत छोड़कर होते हंगामे को […]