ई-बुक कविता पद्य साहित्य

ऐसा नहीं कि इन को दर्द नही होता

लड़के रोते नही तो क्या उन को दर्द नही होता। होता तो बहुत है पर वो उस को जाहिर नही करते। सिर्फ बेटियां विदा ही नही होती घर से। बेटे भी अकेले विदा हो जाते है घर से। बस उन की विदाई में बारात नही होती। उन की विदाई का अहसास दुनियां को नही होता। […]

कविता

वो यमुना किनारा

बहुत याद आता है मुझको वो यमुना किनारा। वो नीला सा पानी,वो बहती सी धारा। वो पावन सी भूमि,वो मथुरा हमारा।। सुबह सवेरे वो मन्दिर को जाना, वो यमुना किनारे घँटों बिताना।। वो बचपन की मस्ती,वो बहता सा पानी।। बहुत याद आता है मुझ को यमुना किनारा। वो बहनों के संग में यमुना पर जाना,ठाकुर […]

कविता पद्य साहित्य भजन/भावगीत

हे शिव शम्भू अंतरयामी

हे सदा शिव, हे अंतरयामी हे महाकाल, हे त्रिपुरारी हे शशि कपाल धारक हे प्रभु कष्ट निवारक हे नागेश्वर, हे रुद्राय हे नीलकंठ, हे शिवाय हे शिव शम्भू, हे प्रतिपालक हे दयानिधि हे युग विनाशक हे गौरी पति,हे कैलाशी हे काशी वासी,हे अविनाशी हे पिनाकी ,हे कपाली हे कैलाशी, हे जगतव्यापी हे गंगाधराय, हे जटाधराय […]

सामाजिक

नैतिकता का गिरता स्तर

कहा जाता है कि धरती पर मनुष्य ही श्रेष्ठ है पर आज के हालात से तो लगता है कि वो सबसे निम्न है। जानवरों का मस्तिष्क इतना तेज नही होता कि उसे विवेक,धर्म,अधर्म और उचित वा अनुचित का बोध हो सकें। हम मनुष्यों में बुद्धि और विवेक दोनों है।हमारे अपने अपने धर्म है और सब […]

कविता पद्य साहित्य

तुम पर जब भी गीत लिखा

शब्द शब्द में सोचा तुम को फिर अक्षर अक्षर याद किया। प्रिय तुम्हारी खामोशी का ऐसे मैने एहसास किया।। तुम पर जब भी गीत लिखा। उस को लिखकर चुम लिया।। प्रिय तुम्हारी यादों को फिर अंतस मन से याद किया।। जहाँ मिले थे हम तुम पहले उस पल को फिर आबाद किया।। ज्यूँ पवन ने […]

पद्य साहित्य भजन/भावगीत

हे माँ प्रचंड रूप धर आ जाओ

हे माँ धरती पर प्रचंड रूप धर आ जाओ। हो रहा अत्याचार मासूमों पर माँ, बिलख रही किलकारी है माँ। ले कर के खड्ग और त्रिशूल माँ, दुष्टों के शीश भेट चढ़ा जाओ। हे माँ प्रचंड रूप धर आ जाओ।। तब कोख में मरती थी कन्या अब तो जन्म के बाद उजड़ती है । पैदा […]

कविता

ब्रज की होली

ब्रज की होली होरी आयी ,होरी आयी बूढे ,बच्चे सब पर मस्ती छायी। रंगों की हो रही बौछार। आया आज खुशियों का त्यौहार। गुजिया,मठरी बहुत बनाये। ठाकुर जी को भोग लगाये।। आज घर पर बनेगी ठंडाई। जम के चले आज पुरवाई। उस पर चढ़ा भांग का रंग। मस्ती करेंगे सब के संग। ब्रज की होरी […]

कविता

अभिनंदन

अभिनंदन का अभिनंदन है। दुश्मन के बल का मर्दन है। छिपा सका कब कोई भला दिनकर के अखंड तेज को।। सत्य झुकता नही चाहे हो कितनी कठिन परिस्थितियों में। शेरों के शमशेर है हमारे सैनिक हरा नही सकता पाक घेरे में भी।। रण हो या फिर हो दुश्मन की भूमि हारते नही थकते नही सच्चे […]

कविता

शहीद दिवस मनाना है

प्रेम दिवस पर गद्दारों ने जो प्रेम जताया , उस का जोश अभी दिखाना है। हमे अब प्रेम दिवस नही शहीद दिवस मनाना है। आज जो हुआ उस से दिनकर का भी ह्रदय भी विचलित हुआ होगा। देख कर ये खूनी होली, उस का भी दिल रोया होगा। कैसे फिर दुश्मन ने घात लगाई है। जब […]

कहानी

प्यार एक अहसास

रवि नोएडा मैं रहता था ।वहाँ पर वह एक प्राइवेट जॉब करता था ।रवि मूलनिवासी आगरा का था और अक्सर  छुट्टियों में अपनी मां से मिलने आगरा आता रहता था। रवि इस बार भी जब 2 दिन की छुट्टी पर आगरा आया तो देखा,पास के प्लॉट पर भवन निर्माण का कार्य चल रहा था।उस ने […]