कविता पद्य साहित्य

हारेगा कोरोना

दुखी है सारी दुनियां जापान से ले कर इंडिया ऑस्ट्रेलिया से ले कर अमेरिका बस फैला है कोरोना दुखी है सारी दुनियांदुखी है सारी दुनियां जापान से ले कर इंडिया ऑस्ट्रेलिया से ले कर अमेरिका बस फैला है कोरोना बंद है सारे गुरुद्वारे बंद है मंदिर सारे बस मस्जिद में नवाज हो ना तो फैले […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म लेख

धर्म आप की रक्षा के लिए है

  धर्म को अपनाये, धर्म आप की रक्षा के लिए बना है। कल तक जो सनातन धर्म को अन्धविश्वासी और पाखंडी बोल कर निंदा करते थे। कहते थे कि सब ढोंग है छुत अछूत मान कर दूसरों का अपमान करतें है। सच यह नही था, सच तो यह था कि हमारे धर्म मे शुद्धता और […]

कविता पद्य साहित्य

कोरोना का हव्वा

कोरोना से डरने की कोई बात नही है। छोटी सी बीमारी है इत्ती बडी बात  नही है। फैलायी चीन ने है बना दिया हव्वा। सादा सी सर्दी खासी हो तो डरने की बात नही है। गर्म पानी में अदरक ले उबाल घुट घुट कर पिये दिन में तीन बार। कपड़ो को धूप में सुखाकर रखें […]

विविध समाचार

नारी रत्न और पॉजिटिव वुमन सम्मान

अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर संध्या चतुर्वेदी को मिले नारी रत्न और पॉजिटिव वुमन सम्मान पत्र। सिद्धि -एक उम्मीद महिला साहित्यिक समूह  ने अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर महिला रचनाकारों  को सम्मानित किया,जिसमे समूह के आयोजक श्री शशि कांत अनमोल जी ने साहित्यिक योगदान के लिए समूह की महिला रचनाकारों को महिला दिवस के सुअवसर पर पॉजिटिव […]

कविता पद्य साहित्य

आक्रामक भीड़

आक्रमक भीड़ का कोई चरित्र नही होता। ये तो वो कठपुतली है जो नायक के इशारों पर नाचती है। पर्दे के पीछे डोर कोई और खिंचता है और ये आक्रामक हो जाती है। इस का कोई निजी मंसूबा भी नही होता। जिस के हाथ मे बस उसी की गुलाम। खुद गुलामी में दबी है और […]

ई-बुक कविता पद्य साहित्य

ऐसा नहीं कि इन को दर्द नही होता

लड़के रोते नही तो क्या उन को दर्द नही होता। होता तो बहुत है पर वो उस को जाहिर नही करते। सिर्फ बेटियां विदा ही नही होती घर से। बेटे भी अकेले विदा हो जाते है घर से। बस उन की विदाई में बारात नही होती। उन की विदाई का अहसास दुनियां को नही होता। […]

कविता

वो यमुना किनारा

बहुत याद आता है मुझको वो यमुना किनारा। वो नीला सा पानी,वो बहती सी धारा। वो पावन सी भूमि,वो मथुरा हमारा।। सुबह सवेरे वो मन्दिर को जाना, वो यमुना किनारे घँटों बिताना।। वो बचपन की मस्ती,वो बहता सा पानी।। बहुत याद आता है मुझ को यमुना किनारा। वो बहनों के संग में यमुना पर जाना,ठाकुर […]

कविता पद्य साहित्य भजन/भावगीत

हे शिव शम्भू अंतरयामी

हे सदा शिव, हे अंतरयामी हे महाकाल, हे त्रिपुरारी हे शशि कपाल धारक हे प्रभु कष्ट निवारक हे नागेश्वर, हे रुद्राय हे नीलकंठ, हे शिवाय हे शिव शम्भू, हे प्रतिपालक हे दयानिधि हे युग विनाशक हे गौरी पति,हे कैलाशी हे काशी वासी,हे अविनाशी हे पिनाकी ,हे कपाली हे कैलाशी, हे जगतव्यापी हे गंगाधराय, हे जटाधराय […]

सामाजिक

नैतिकता का गिरता स्तर

कहा जाता है कि धरती पर मनुष्य ही श्रेष्ठ है पर आज के हालात से तो लगता है कि वो सबसे निम्न है। जानवरों का मस्तिष्क इतना तेज नही होता कि उसे विवेक,धर्म,अधर्म और उचित वा अनुचित का बोध हो सकें। हम मनुष्यों में बुद्धि और विवेक दोनों है।हमारे अपने अपने धर्म है और सब […]

कविता पद्य साहित्य

तुम पर जब भी गीत लिखा

शब्द शब्द में सोचा तुम को फिर अक्षर अक्षर याद किया। प्रिय तुम्हारी खामोशी का ऐसे मैने एहसास किया।। तुम पर जब भी गीत लिखा। उस को लिखकर चुम लिया।। प्रिय तुम्हारी यादों को फिर अंतस मन से याद किया।। जहाँ मिले थे हम तुम पहले उस पल को फिर आबाद किया।। ज्यूँ पवन ने […]