हास्य व्यंग्य

फेसबुकिया वैराग्य

लॉकडाउन में फेसबुक लाइव का दौर जमकर चला। हमारे चन्द्रप्रकाश चंचल उर्फ चंदू भैया ने भी दिन के पन्द्रह घंटे किसी न किसी कवि या कवयित्री का लाइव देखा और प्रति मिनट किसी न किसी लाइन को कोड करके वाह और लाजवाब लिखा तो, कभी तालियों वाली इमोजी लगा कर अपने भी ऑनलाइन होने का […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य- चलो, फुर्सत हो गई अब मर जाओ

एक समय था, जब आदमी कहता था कि मरने की फुर्सत नहीं है, आदमी का ये जुमला सुन कर ही लगाता है कि कोरोना आदमी के फुर्सत से मरने की व्यवस्था करने आया है। लॉकडाउन लगवाकर सबको फुर्सत करवा दी और कह रहा है- लो मरो, अब फुर्सत है। पर मारना कोई नहीं चाहता हर […]

सामाजिक

समाज और परिवार की जागरुकता से रुक सकती हैं आत्महत्याएँ

सुशांतसिंह यह नाम हर जुबां पर है। शायद जो लोग उस प्रतिभा सम्पन्न लड़के को पहले नहीं जानते थे। वे भी आत्महत्या के बाद उसे जानने लगे। उसके काम की तारीफ करने लगे और आत्महत्या को घिनौना काम बताते हुए दार्शनिक अंदाज में आत्महत्या को कायराना हरकत बता कर अपने संवेदनशील होने का प्रमाण दे […]

पर्यावरण

पर्यावरण पर लॉकडाउन के पड़े हैं सकारात्मक प्रभाव

पर्यावरण की चिंता करने वाले और उसे लेकर अपने स्तर पर लगातार प्रयास करने वाले लोगों और संस्थाओं के लिए विश्व पर्यावरण दिवस ( 5 जून) लॉक डाउन के कारण स्वच्छ हुई प्रकृति को निहारते हुए आंतरिक खुशी प्रदान करने वाला है। स्वच्छ नदी, स्वच्छ हवा और वातावरण में आया यह बदलाव भाग-दौड़ भरे जीवन […]

हास्य व्यंग्य

हिंदी साहित्य के इतिहास में तालाबंदी काल

हिंदी साहित्य के इतिहास पुनर्लेखन का समय फिर से एक बार निकट आता दिखाई दे रहा है। वीरगाथा काल से शुरु होकर भक्ति काल, रीति काल और आधुनिक काल तक लिखे गये इतिहास में अब तालाबंदी (लॉकडाउन) काल को जोड़ना पड़ेगा। लॉकडाउन का सही उपयोग किसी ने किया तो वह हिंदी के रचनाकारों ने किया। […]

सामाजिक

डिजिटल मिडिया के लिए विश्वसनीयता बड़ी चुनौती

कोराना के कारण हुए देशव्यापी लॉकडाउन से अन्य व्यवसायों की तरह प्रिंट मीडिया भी इन दिनों संकट से जूझ रहा है। तमाम अखबारों और पत्रिकाओं का सर्कुलेशन प्रभावित हुआ है, और कई पत्रिकाओं को तो अपने प्रिंट एडिशन फिलहाल बंद करने पड़े हैं, या डिजिटल रूप में लाने पड़े है। डिजिटल प्लेटफार्म पर दर्शकों-पाठकों की […]