धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

दीपावली पर पटाखे भारत की परम्परा नहीं मुगलों की देन है

भारतीय संस्कृति उत्सव प्रधान है और उत्सव की प्राचीन परंपरा उल्लास और उच्चता से जुड़ी हुई है, जब जीवन में उल्लास हो और तन और मन की उच्चता हो वह समय उत्सव है। दीपोत्सव की परंपरा अनादि काल से भारतीय संस्कृति की अक्षुण्ण पहचान है, वैदिक काल हो या उत्तर वैदिक काल हो दीपावली के […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

सौलह कलाओं से युक्त पूर्ण चन्द्रमा की रात शरद पूर्णिमा

अश्विन मास के शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा जो कि शरद पूर्णिमा कहलाती है इसका जितना महत्व धर्मिक दृष्टि से है, वैज्ञानिक दृष्टि से भी कम महत्व नहीं है। कहा जाता है इस दिन है चंद्रमा धरती पर अमृत की वर्षा करता है। इस दिन प्रेमावतार भगवान श्रीकृष्ण, धन की देवी मां लक्ष्मी और सोलह कलाओं […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

रावण प्रकाण्ड पंडित ही नहीं, वैज्ञानिक भी था

रावण को जन सामान्य में राक्षस माना जाता है। जबकि कुल,जाति और वंश से रावण राक्षस नहीं था। रावण केवल सुरों (देवताओं) के विरुद्ध और असुरों के पक्ष में था । रावण ने आर्यों की भोग-विलास वाली ‘यक्ष’ संस्कृति से अलग सभी की रक्षा करने के लिए ‘रक्ष’ संस्कृति की स्थापना की थी। इस संस्कृति […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

तंत्र साधना का आदर्श स्थान- पाण्डव कालीन बगलामुखी मंदिर

मध्य प्रदेश के आगर जिले की नलखेड़ा तहसील जिसकी पहचान पांडव कालिन पीताम्बरा सिद्ध पीठ मॉ बगलामुखी का मंदिर के कारण है। विश्व प्रसिद्ध पीताम्बरा सिद्ध पीठ मॉ बगलामुखी का यह मंदिर शक्ति एवं शक्तिमान के सम्मिलीत प्रभाव से युक्त है। यहॉ पर की जाने वाली साधना आराधना अनंत गुना फलप्रदा होती है। जब कभी […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

आत्म कल्याण की राह क्षमापना

जैन धर्म मे पर्युषण महापर्व को सभी पर्वों का राजा यानि पर्वाधिराज कहा जाता है। लौकिक जगत के जितने पर्व आते है, उनका मुख्य उद्देश्य भौतिक समृध्दि के लिए साधना करना होता है। लेकिन पर्युषण पर्व के दौरान लौकिक और भौतिक समृध्दि के लिए कोई साधना नहीं की जाती वरन आत्मकल्याण के लिए साधना की […]

हास्य व्यंग्य

व्यंग्य- सात दशक की स्वतंत्रता और चंदु भैया की शोध डायरी

हमारे चंदू भैया सामाजिक और साहित्यिक जीव है और उनका जन्म भी हमारी तरह स्वतंत्र भारत में हुआ इसलिए उनने भी बचपन में पुस्तकों में पढ़ा और अध्यापकों से सुन रखा था कि भारत स्वतंत्र है। तभी से उनको ये आभास होने लगा था कि भारत में रहकर वो जो मर्जी आए, कुछ भी कर […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

राम मंदिर की स्थापना के साथ राष्ट्र मंदिर की स्थापना

कलियुग के भगीरथ के हाथों राम की जन्मभूमि का पुनरुत्थान सन 1528 का वो दृष्य जिसे गोस्वामी तुलसीदास जी ने “दोहाशतक” में लिखा वो इतिहास में पढ़ते-पढ़ते भारत की लगभग 20 पीढ़िया परलोक चली गई। लेकिन हर आने वाली पीढ़ी को उस काले अध्याय को अंत करने की प्रेरणा भी देती गई। काल के प्रवाह […]

हास्य व्यंग्य

अख़बार रद्दी कर गया विकास

सुबह का अखबार शाम को रद्दी हो जाता है यह तय है पर इस बार अखबार सुबह-सुबह ही रद्दी हो गया। ये चंदू भैया के जीवन में किसी हादसे से कम नहीं है। पूरे चार रुपये का अखबार चंदू भैया को लेना पड़ रहा है। वो भी मजबूरी में। क्योंकि बचपन से ही चंदु भैया […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

कबीरदास के शब्दों में गुरु महिमा

गुरु पूर्णिमा 5 जुलाई पर विशेष… संसार में कोई भी तत्व गुरु के समान नहीं गुरु को केवल परलोक तक पहुचाने वाला ही नहीं वरन इहलौक याने वर्तमान को सुधार कर भविष्य बनाने वाला कहा गया है। भारतीय दर्शन में गुरु को केवल एक व्यक्ति या पद नहीं माना वरन एक तत्व माना गया है […]

हास्य व्यंग्य

फेसबुकिया वैराग्य

लॉकडाउन में फेसबुक लाइव का दौर जमकर चला। हमारे चन्द्रप्रकाश चंचल उर्फ चंदू भैया ने भी दिन के पन्द्रह घंटे किसी न किसी कवि या कवयित्री का लाइव देखा और प्रति मिनट किसी न किसी लाइन को कोड करके वाह और लाजवाब लिखा तो, कभी तालियों वाली इमोजी लगा कर अपने भी ऑनलाइन होने का […]