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  • अनमोल यादें

    अनमोल यादें

    सांझ की सरगोशी में लिपटे हुए ये अनमोल यादें ,,,,,, आज भी सुरक्षित हैं किसी बेशकीमती नगीने की तरह ……….. अक्सर जब बारिश की बूंदों संग लहराती है मदमस्त पवन दिल के हर कोने में बज...

  • लुप्त होते साझे चूल्हे

    लुप्त होते साझे चूल्हे

    भारतीय सभ्यता और संस्कृति की नायाब पहचान ‘संयुक्त परिवार’,जिसमें बुजुर्गों की छत्र- छाया  होती थी और उस छत्रछाया  के अंदर पनपता था हमारा संस्कार,हमारी पहचान | पर आधुनिकता व प्रगतिशीलता की अंधी दौड़ में हमसे यह...


  • मैंने देखा है

    मैंने देखा है

    तुम्हारी आँखों में मैंने देखा है ,एक उम्मीद शायद बहुत ही करीब से जब मैं गुजरी हूँ तुमसे होकर ….. और ही बहुत ही ऐसे मोड़ जो दुख और उदासी के डगर से होकर जाती ही...