कविता

कहां मिली आज़ादी हमको

कहां मिली आजादी हमको, हम तो अभी तक परतंत्र हैं, ब्रिटिश शासक चले गए, चेलों को अपने छोड़े हैं। सर्वधर्म समभाव के भारत को, जाति – धर्म में तोड़े है, भारत विश्व गुरु बन जाता, पर नापाक कुछ बंदे हैं। सत्तर साल बाद भी हमारी, दुखी सारी प्रजातंत्र है। कहां मिली आजादी हमको, हम तो […]

कविता

जानते हैं सब

क्या है इस संसार में, जानते हैं सब। एक ही मालिक है सबका, ईश्वर, कहो या रब गर है भाई हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई फिर ये आपस में हैं करते क्यों प्रतिदिन जंग क्या है इस संसार में, जानते हैं सब।। भाई – भाई से करता, तकरार क्यो है ? रिश्ते – नाते छोड़, धन […]

भजन/भावगीत

हे मां मुझे आशीष दो

हे ज्ञानदायिनी माता देती रहना आशीष सदा। हे मां तेरे चरणों में ही झुकता रहे यह शीश सदा, मैं छोड़ सकू सभी अवगुण दे दो मां ऐसी शक्ति, ऐसा मुझको वर दे दो मां तेरा सदैव करूं मैं भक्ति। हे मात दया कर अज्ञानी मैं मेरे झोली में यह वर रख दो, मैं जब तुम्हारा […]

कविता

हृदय छिन्न – भिन्न हो रहा

नहीं चाहते शिक्षा – दीक्षा, हमको अज्ञानी रहने दो, भूखे हैं हम गरीब भी है, हमें इसी हाल में रहने दो। बहुत दिनों से नहीं कह पाए, रहे हृदय में ही दबाए। हर बार भरोसा दिया हमको, पर जन्म से ही है सताए। हृदय छिन्न भिन्न हो रहा, नहीं रही अब सहनशक्ति। नहीं करना है […]

कविता

प्यार बढ़ाने आया हूं

व्यक्ति – व्यक्ति का भेद मिटाने, मैं यहां पर आया हूॅ प्यार बढ़ाने आया हूॅ, मैं प्यार बढ़ाने आया हूॅ। जाति – धर्म के बढ़ती खाई को, मैं पाटने आया हूॅ, प्यार बढ़ाने आया हूॅ, मैं प्यार बढ़ाने आया हूॅ।। आप सभी इस बात को समझे, यही बताने आया हूॅ।। जाति – धर्म के नाम […]

कविता

तुम जानते नहीं मैं कौन हूं

मैं धरती का सबसे विकसित प्राणी हूं, सोच, समझ, और बोल भी सकता हूं। मैं देख, सुन, अनजान भी बन सकता हूं, सब कुछ जानकर भी, क्यो मैं मौन हूं।। तुम जानते नहीं, मैं कौन हूं।। इस धरती का सारा काम, मैं कर सकता हूं, एक – दूसरे को लड़वा, मैं खुद नहीं लड़ सकता […]

कविता

अब कितना विकास करोगे

हर पांच साल में होता है, विकास कुछ दिन, सत्तर साल बाद भी, सड़कों पर सोते कुछ दीन। गए सोने पर सोते नहीं, रात बितती तारें गिन – गिन, वादा ऐसा करते हैं, जो ना हो मुमकिन। हर पांच साल में होता है, विकास कुछ दिन।। अशिक्षा, कुपोषण, चिकित्सा और बाल मजदूरी पर, आज भी […]

कविता

कैसे – कैसे लोग पहुंच गए हैं संसद में

भारत के संविधान का अपमान करते हैं संसद में, खाते हैं शपथ, बचाऊंगा भारत की लाज हर हालत में। पर अफसोस, लानत है, उस प्रतिनिधि नरेश का, जो करता इज़्ज़त तार – तार, बैठ भरी उसी संसद में। कैसे – कैसे लोग पहुंच गए हैं संसद में भारत के वीर सपूत पर हुए दुर्व्यवहार को सही बताते […]

कविता

हाय – हाय ये मजबूरी

मौसमी बरसात में मेढक मदारी हो गए। दुराचारी थे रात मे, प्रातः पुजारी हो गए, चार ही साल तो हुए ,दिखायी क्या हमने एकता , जालीदार टोपी पहनने वाले, मंदिर जाने को बाध्य हो गए, मौसमी बरसात में मेढक मदारी हो गए।। जो पहले कभी हिंदू को आतंकवादी कहते थे, मंदिर का तो नाम सुनते […]