पर्यावरण

प्रकृति का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है

आज इस इक्कीसवीं सदी तक पहुँचते-पहुँचते हम शिक्षित तो खूब हुए पर हमने प्रकृति को ध्वंस करने में कोई कसर नहीं छोड़ी |कभी-कभी तो यूँ लगता है कि हमारी सारी प्रगति और उन्नति के मूल में यह विध्वंस ही छिपा है |हमने प्रकृति का सारा संतुलन बिगाड़ कर रख दिया है |जब कभी सुनामी या उत्तराखण्ड […]

कविता

शिल्पकार

शब्दों  को गढ़ता बन शिल्पकार दिल के अंदर प्रेम के ढाई अक्षर सहंम सी जाती अंगुलियां हाथों की। उंगलियां बनी मोबाइल की दीवानी शब्दों को जाने क्यों लगता  कर्फ्यू अटक जाते शब्द उन तक पहुँचने में। नजदीकियां धड़कन की चाल बढ़ा देती जैसे फूलों सुगंध हवा में समां सी जाती लगने लगता उनको मुझसे प्यार […]

अन्य लेख

भारतीय वाद्य यंत्रों की कर्णप्रियता का आकर्षण

इलेक्ट्रानिक वाद्य यंत्रों ने भारतीय वाद्य यंत्रों को वर्तमान में पीछे छोड़ दिया है |शायद ,इलेक्ट्रानिक वाद्ययंत्रों ने इसके स्थान पर कब्ज़ा कर लिया हो वर्तमान में बाँसुरी की मधुर तान फिल्मों के संगीत से दूर जा रही है ।मधुर तान गीतों को  मधुरता प्रदान करती एवं कर्णप्रिय संगीत को बढ़ावा भी देती है  की […]

कविता

वृक्ष

वृक्ष हो चूका है बूढ़ा लेकिन बूढ़ा होना हरेक का कर्तव्य हो जैसे बांधी जाती मान -मन्नते लगाए जाते है फेरे लम्बी उम्र होने के वृक्ष से ही लोग आज भी बताते पते वृक्ष कुछ न कुछ हम सब को देता ही आया है ,पर माँगा न उसने हमसे कभी अंतिम पड़ाव का साथी बनकर […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

पुनर्जन्म का सच क्या अधूरी कामना है

विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद से लेकर वेद, दर्शनशास्त्र, पुराण, गीता, योग आदि ग्रंथों में पुनर्जन्म की मान्यता का प्रतिपादन किया गया है। इस सिद्धांत के अनुसार शरीर का मृत्यु ही जीवन का अंत नहीं है। परंतु जन्म जन्मांतर की श्रृंखला है।  पुराण आदि में भी जन्म और पुनर्जन्मों का उल्लेख है।  जीवात्मा पुनर्जन्म लेती […]

पर्यावरण

ताड़ी पेड़

ताड़ी का मुख्य मौसम दिसंबर से मई तक होता है। फरवरी से मार्च तक आने वाली ताड़ी को वांझिया ताड़ी तथा अप्रैल से मई तक मिलने वाली को फलनियां ताड़ी कहा जाता है। इसके अलावा अन्य महीनों में भी ताड़ी आती है, लेकिन उसमें वह बात नहीं होती। जून से अगस्त तक  स्वाद व सेहत […]

समाचार

संजय वर्मा “दृष्टि” को सम्मान

गोवा इकाई द्वारा संजय वर्मा “दृष्टि” को श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान साहित्य संगम संस्थान नई दिल्ली की गोवा इकाई द्वारा प्रदत विषय -खुशी से झूमता है मन पर  दिनांक21-11-2022 को आयोजित काव्य प्रतियोगिता में मनावर जिला धार मप्र निवासी संजय वर्मा “दॄष्टि” को गोवा इकाई द्वारा श्रेष्ठ सृजन किए जाने हेतु उन्हें श्रेष्ठ रचनाकार की सम्मानोंपाधि से विभूषित किया गया है |सम्मान पत्र राष्ट्रीय […]

अन्य लेख

कठपुतली कला को विलुप्त होने से बचाएँ

प्रत्येक वर्ष 21 मार्च 2003 से कठपुतली दिवस मनाना शरू हुआ। विश्व कठपुतली दिवस भी मनाया जाता है।कठपुतली कला में पुरुष,स्त्री,पक्षी,जानवर आदि के पात्रों का रूप तैयार कर दैनिक जीवन एवं समाज के अनेकानेक प्रसंगों का मंच पर संगीत संवाद के जरिए प्रस्तुति दी जाती है।काष्ठ से निर्मित होने से कठपुतली शब्द कहा जाता है।भले […]

भाषा-साहित्य

साहित्य संस्थाओं एवं लेखनियता के प्रति नजरिया सम्मानजनक हो

कई लोगो की सोच है कि सोशल मीडिया पर अनेक साहित्य मंच है जो सम्मान पत्र बाटने,एवं प्रतिभागी से सहयोग राशि लेते है। वे इसे एक व्यापार का पहलू मानते है।जबकि साहित्य मंच साहित्य को जीवंतता प्रदान करने में एक संस्था के जरिए प्रदत्त विषय पर या विभिन्न साहित्य विद्या के जरिए जैसे हायकू,तांका, पिरामिड,दोहे,छंद, […]

सामाजिक

ओवरलोडिंग सवारियों से दुर्घटना होने का खतरा

आदिवासी अंचल में सवारी वाहनों में ओवरलोडिंग से दुर्घटना का खतरा बढ़ता जा रहा है | ओवरलोडिंग सवारिया के नज़ारे अंचलों में देखे जा सकते है | स्कूल के छात्र छात्राएं ,मजदूरी पर जाने वाले,विशेषकर स्थानीय लगने वाले हाट बाजारों में खरीददारी कर वापस अपने घरों की और जाते समय छोटे वाहनों में इधर उधर […]