लघुकथा

सूनी होली

मोहन को होली की मस्ती बचपन में कुछ ज्यादा ही रहती थी ।पापा से उसका रंग और पिचकारी के लिए जिद्द करना। माँ का डाटना यानि कपडे बिस्तर परदे आदि ख़राब न कर दे और घर के बाहर जाकर रंग खेले की हिदायत मिलना तो आम बात थी ।मोहन बड़ा हुआ तो दोस्तों के साथ […]

कविता

फागुन

पहाडों पर टेसू ने रंग बिखेरे फागुन में हर कदम पर बज रहे ढोल फागुन में ढोल की थाप पे थिरकते पैर फागुन में महुआ लगे झुमने गीत सुनाये फागुन में बिन पानी खिल जाते टेसू फागुन में पानी संग मिल रंग लाते टेसू फागुन में रंगों के खेल हो जाते शुरू फागुन में दुश्मनी […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

भगोरिया पर्व :लोक गीत,संगीत,नृत्य और प्रकृति का सौंदर्य

कई जिलों में जैसे झाबुआ में भगोरिया पर्व लेकर प्रशासन द्धारा विशेष तैयारी की जा रही जो कि प्रंशसनीय है. पर्व सुझाव मांगे गए पर्यटकों के लिए सभी सामग्री एक स्थान पर मिलना,सेल्फी पॉइंट बनाना,विधुत व्यवस्था झूला व्यवस्था नाश्ते के लिए स्टॉल, भोजन के लिए कक्ष, बड़े धर्मिक स्थलों पर जैसे उज्जैन, नासिक आदि पर […]

विज्ञान

क्या भविष्य में संसार रोबोटीय होगा

संसार का वर्तमान तो केश लेस ,फ़ास्ट फ़ूड ,बोतलों बंद पानी ,रिश्तों को दरकिनार सामाजिक परम्पराओं से दूर ,लोक संस्कृति ,शुद्ध भाषा -बोली को (अंग्रेजी) मिश्रित कर ही रहा है ।पाश्च्यात सभ्यता का लबादा ओढे हुए खुद की सभ्यता को भूल रहा ही । सन 3000 में तो इलेक्ट्रानिक युग अपनी चरम सीमा पर १००%रहेगा […]

कविता

मौसम

मोहब्बत को याद करों दिल फिर से जवां हो जाता ख़्वाब हो पुराने मगर आंखों में फिर चमक दे जाता बसंत के आने से मन गुनगुनाता प्यार का पंछी भी गीत गाता धड़कन ऐसी धड़कती की डालियों से पत्ता टूट जाता कहते वसंत ऋतु में ऐसे ही आता आमों पर लगे मोर फूल सुहाते ताड़ी […]

कविता

बेटी

निखर जाती है बेटी के हाथो की सुन्दरता में चार-चाँद लगाती जाए जब लगी हो हाथो में मेहंदी । मेहंदी ,रोसा और बेटी लगती जेसे बहन हो आपस में महकती ,निखरती जाए जब लगी हो हाथों में मेहंदी । मेहंदी भी जाती है बेटी के संग ससुराल में बाबुल की यादों के आंसू केसे पोंछे […]

कविता

बेटी बचाओ

बेटी बचाओ ओ दुनिया वालो बाबुल करता है अब ये गुहार दुनिया रहेगी जब होगी बेटी कहती है ये माँ की पुकार * खिल जाते है मन सभी के बिटियाँ हो हर घर सभी के दुःख दूर होगा सुख होगा पास बस करना तुम सबपे ये उपकार बेटी बचाओ ………………. * पायल बजेगे अब हर […]

समाचार

संजय वर्मा ‘दॄष्टि’ को कलम और ख्याल ‘सम्मान ‘

बीजू दत्ता रोउत को -फाउंडर और सी ई ओ के मुंबई द्धारा माह अक्टूबर में  वेब साइड “कलम और ख्याल “(हिंदी ) में लेख और कविता के सफल प्रतिभागी होने पर प्रमाण पत्र प्रदान किया गया |राष्ट्र भाषा के प्रचार -प्रसार के उदेश्य से रचनात्मक सहभागिता एवं साहित्य उत्थान में रचनात्मकता के निमित्त  सम्मान पत्र […]

कविता

नजदीक आए

नजदीक यूँ लब  थरथराने लगे तुम जो मेरे नजदीक आए महकती खुशबू जो महका गई तुम जो मेरे नजदीक आए नजरें ढूंढती रही  हर दम  तुम्हे तुम जो मेरे नजदीक आए प्रेम के बोल, बोल भी न  पाए तुम जो मेरे नजदीक आए इजहार तो हो न सका प्रेम का तुम जो मेरे नजदीक आए प्रेम […]

हास्य व्यंग्य

पहले आदत बनी, अब जिए कि मरे

एक मोबाइल कंपनी ने शुरुआत में सुविधाओं का अंबार लगा दिया बाद में लोग इसकी आदत में ढल गए।फिर धीरे से अन्य काल पर वृद्धी कर दी।अब लोग बाग सोच में पड़ गए जिए की मरे।ऐसा लगता कि फिर से मिस कॉल मारने के दिन आगये।कहते हैकि रुखडे के भी दिन पलटते है लेकिन यहाँ […]