मुक्तक/दोहा

गणितीय मुक्तक

बिंदु-बिंदु रखते रहे, जुड़ हो गयी लकीर। जोड़ा किस्मत ने घटा, झट कर दिया फकीर।। कोशिश-कोशिश गुणा का, आरक्षण से भाग- रहे शून्य के शून्य हम, अच्छे दिन-तकदीर।। * खड़ी सफलता केंद्र पर, परिधि प्रयास अनाथ। त्रिज्या आश्वासन मुई, कब कर सकी सनाथ।। छप्पन इंची वक्ष का निकला भरम गुमान- चाप सिफारिश का लगा, कभी […]

गीतिका/ग़ज़ल

हिंदी ग़ज़ल : छंद दोहा

राष्ट्र एकता-शक्ति का, पंथ वरे मिल साथ। पैर रखें भू पर छुएँ, नभ को अपने हाथ।। अनुशासन का वरण कर, हों हम सब स्वाधीन। मत निर्भर हों तंत्र पर, रखें उठाकर माथ।। भेद-भाव को दें भुला, ऊँच न कोई नीच। हम ही अपने दास हों, हम ही अपने नाथ।। श्रम करने में शर्म क्यों?, क्यों […]

भाषा-साहित्य

दोहा है रस-खान

दोहा विश्व साहित्य का सर्वाधिक पुरातन और प्रभावी छंद है​। यह अतिशयोक्ति नहीं सत्य है कि दोहा ने संभावित युध्दों को रोका है, संकटग्रस्त नारी की अस्मिता बचाई है, पथ-भटके जनों को राह दिखाई है, प्रेमियों को मिलाया है, दरिद्र पिता को बेटी ब्याहने की सामर्थ्य प्रदान की है और शत्रु के कैद में बंद […]

कुण्डली/छंद

होली के रंग छंदों के संग

हुरियारों पे शारद मात सदय हों, जाग्रत सदा विवेक रहे हैं चित्र जो गुप्त रहे मन में, साकार हों कवि की टेक रहे हर भाल पे, गाल पे लाल गुलाल हो शोभित अंग अनंग बसे मुॅंह काला हो नापाकों का, जो राहें खुशी की छेंक रहे 0 चले आओ गले मिल लो, पुलक इस साल […]