भाषा-साहित्य

मातृभाषा को संभालने की जरूरत

यूनेस्को ने 21 फरवरी को ‘मातृ भाषा दिवस’ मनाने का निश्चय करने के बाद भारत सरकार ने  भी  इसका फरमान जारी किया है और इसके आयोजन के निर्देश दिए हैं. शैक्षिक संस्थानों द्वारा आयोजित किए जाने वाले कृत्यों की सूची में अब यह भी शामिल है. ऐतिहासिक रूप से यह दिन पड़ोसी बांग्ला देश में […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

हार के आगे ही जीत है – आचार्य शिवम्

‘हार के आगे ही जीत है’ – यह बात अक्सर सुनने को मिल जाती है। अब प्रश्न उठता है कि– ‘क्या जीत का रास्ता हार से होकर जाता है?’, ‘क्या हार जीत का मार्ग प्रशस्त करती है?’, ‘क्या हार को जीत मान लिया जाय?’, ‘क्या हार होने पर हार से सबक लेकर जीत जाने के […]

इतिहास

महाराजा सूरजमल जाट

पं० मदन मोहन मालवीय ने सन् 1932 में दिल्ली में एक भव्य मन्दिर बनवाने की सोची। जिसे हम लक्ष्मी नारायण मन्दिर के नाम से आज जानते हेँ। इसकी आधारशिला के अवसर पर भारत वर्ष के राजा-महाराजाओं को पधारने का न्यौता दिया गया। काफी राजा महाराजा सज-धजकर इस अवसर पर दिल्ली पहुंचे। जब आधारशिला रखने की […]

संस्मरण

ढह गया यादों का एक और स्तंभ ।

मुंबई के प्रसिद्ध चर्चगेट स्टेशन के निकट न्यू सीजीओ बिल्डिंग में वस्त्र आयुक्त का कार्यालय है। वहीं छठी मंजिल पर एक कमरा हिंदी प्रशिक्षण के लिए हमारे कार्यालय को मिला हुआ था। लंबे समय तक कामिनी ने वहां पर कक्षाएं लीं। उसी दौरान कुछ समय तक पास की ही बिल्डिंग, ओल्ड सीजीओ बिल्डिंग में मैंने […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

चर्च का घिनौना चेहरा और मिडिया

क्या आपको बालीवुड की वे फिल्मे याद हैं जिनमे फादर को दया और प्रेम का मूर्तिमान स्वरूप दिखाया जाता था तो हिन्दू सन्यासियों को अपराधी. जो मिडिया आशाराम पर पागल हो गया था वह आज चुप है. केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा ने अपनी आत्मकथा लिखी है। इन्होंने ही बलात्कार आरोपित पादरी फ्रैंको मुलक्कल […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

कौन कहता है कि द्रौपदी के पांच पति थे 200 वर्षों से प्रचारित झूठ का खंडन : द्रौपदी का एक ही पति था- युधिष्ठिर

जर्मन के संस्कृत जानकार मैक्स मूलर को जब विलियम हंटर की कमेटी के कहने पर वैदिक धर्म के आर्य ग्रंथों को बिगाड़ने का जिम्मा सौंपा गया तो उसमे मनु स्मृति, रामायण, वेद के साथ साथ महाभारत के चरित्रों को बिगाड़ कर दिखाने का भी काम किया गया। किसी भी प्रकार से प्रेरणादायी पात्र – चरित्रों […]

इतिहास

महान राष्ट्रवादी जाट नेता-श्री बच्चू सिंह

(30 नवंबर जन्मदिवस पर विशेष रूप से प्रकाशित) बच्चू सिंह भरतपुर रियासत के राजकुमार थे। भरतपुर के महाराजा किशन सिंह के यहाँ 30 नवंबर 1922 को हुआ हुआ। बच्चू सिंह देशभक्ति, समर्पण , धर्म के प्रति अनुग्रह प्रेरणादायक हैं। 1. बच्चू सिंह एक देशभक्त के रूप में- उस समय राजपरिवारों के युवकों के लिए ब्रिटिश […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मनुस्मृति पर फैला भ्रम और उसकी सच्चाई

स्वतंत्र भारत में पहले तो हम ने महान शास्त्रों को शिक्षा से बाहर कर दिया। फिर उस पर जिस किसी की नासमझी या राजनीति-प्रेरित निन्दा से प्रभावित होते रहे। मनुस्मृति की नियमित भर्त्सना इस का एक उदाहरण है। जबकि यदि शीर्षक हटाकर मनुस्मृति को किन्हीं भी शिक्षित व्यक्तियों को पढ़ने कहें, तो अधिकांश उसे महान […]

राजनीति

अम्बेडकर और उनके झूठ

अम्बेडकर द्वारा मनु स्मृति के श्लोको के अशुद्ध अर्थ करके उनसे विरोधी निष्कर्ष निकालना (अम्बेडकर का छल) अशुद्ध अर्थ कर मनु को ब्राह्मणवादी कह कर बदनाम करना – (क) सेनापत्यम् च राज्यं च दंडेंनतृत्वमेव च| सर्वलोकाघिपत्यम च वेदशास्त्रविदर्हति||(१२.१००) डा. अम्बेडकर का अर्थ – राज्य में सेना पति का पद, शासन के अध्यक्ष का पद, प्रत्येक […]

इतिहास

गांधी और ख़लीफत (भाग – 4) – खलीफत आंदोलन की परिणती थी देश विभाजन

खलीफत-समर्थन से शुरू हुई अवसरवादी राजनीति की ही परिणति 1947 ई. का देश-विभाजन था। इस की सैद्धांतिक स्वीकृति गाँधीजी ने कम से कम दस-ग्यारह वर्ष पहले ही दे दी थी। यह कह कर कि “यदि 8 करोड़ मुसलमान न चाहें तो उन्हें साथ बनाए रखने का कोई अहिंसक तरीका मैं नहीं जानता’’ और, किसी ‘‘घर […]