सामाजिक

क्या प्रेम से अलगाव संभव नहीं?

कल प्राप्त एक समाचार के अनुसार मेरे एक साथी अध्यापक की भांजी की वैवाहिक विवादों के कारण हत्या कर दी गयी। उसकी शादी दो वर्ष पूर्व ही हुई थी। उसके एक वर्ष का एक बेटा है, जो शायद यह भी नहीं जानता होगा कि माँ क्या होती है? और उससे माँ का आँचल क्यों उठ […]

मुक्तक/दोहा

कोरोना के काल में

कोरोना के काल में, आवागमन है बन्द। मंद-मंद जीवन चले, बाजार हुए है मंद।। घर सबको अच्छा लगे, घर में बैठे धाय। घर तब तक ही चलत है, बाहर से कुछ आय।। लाॅकडाउन ने किया, सबको घर में बंद। कुछ तो मस्ती लेत हैं, कुछ धंधे बिन अंध।। वाइरसों का कहर है, दी है गहरी […]

कविता

बहुत याद आती हो!

आँखों के खुलते ही। भोर में उठते  ही। तुम से ही रोशनी, बाहर निकलते ही। कोयल ज्यों गाती हो। बहुत याद आती हो।। अनपढ़ भले ही तुम। सब कुछ अभी भी तुम। पास भले आज नहीं, पास ही खड़ी हो तुम। पचास का हो गया, बच्चे सा बहलाती हो। कोयल ज्यों गाती हो। बहुत याद […]

कविता

सृष्टि का आधार हो

नारी! नहीं केवल श्रद्धा हो, सृष्टि का आधार हो। शक्ति रूपिणी, माँ दुर्गा हो, प्रेम की पारावार हो। शहनशक्ति की सीमा हो तुम। परिवार हित, बीमा हो तुम। तुम ही प्रेयसी, भगिनी, माता, सहधर्मिणी, वामा हो तुम।। गृहलक्ष्मी तुम, धन की देवी, ज्ञान को देती धार हो। नारी! नहीं केवल श्रद्धा हो, सृष्टि का आधार […]

गीत/नवगीत

तेरे बिन, मैं रहा अधूरा

तेरे बिन, मैं रहा अधूरा, प्रेमी संग तू पूरी है। संग साथ की चाहत मेरी, तेरी चाहत दूरी है। प्रेम का तूने, राग अलापा। अकेलापन मुझको है व्यापा। षडयंत्रों को पूरा करने, कोर्ट में जाकर, किया स्यापा। प्राणों पर आघात किया, फिर कहती मजबूरी है। तेरे बिन, मैं रहा अधूरा, प्रेमी संग तू पूरी है।। […]

कविता

संग साथ की इच्छा

संग साथ की, इच्छा थी, पर, कोई भी साथ निभा न सकी। नहीं, चाह थी, रूप रंग की, मन की प्यास, बुझा न सकी।। सीधे-सच्चे पथ पर चलना। नहीं चाहिए, कोई छलना। सब कह ले, सब कुछ सुन ले, बाहों में उसके, चाहूँ मचलना। प्रेम राह, मिल चलना चाहा, कोई भी, राह दिखा न सकी। […]

कविता

साथ तेरा बस, मिल जाए तो

  साथ तेरा बस, मिल जाए तो, और न कुछ हमें पाना है। तू ही, दिल में बसती, प्यारी, तू ही प्रेम, तू गाना हैैै।। हमको धन की चाह नहीं है। पद की भी कोई आह नहीं है। तुझको कुछ पल, सुख दे पाऊँ, दुनिया की, परवाह नहीं है। भटकता फिरता, अनाड़ी था मैं, तुझसे […]

कविता

आई लव यू की व्यापारी

  हम तो पागल प्रेमी हैं, बस, पल-पल गाते प्रेम के गाने। दुनिया पागल कहती, कह ले, सुन लेंगे, जग दे ले ताने।। प्रेम हैं हम, प्रेम पुजारी। प्रेम सवार है, प्रेम सवारी। प्रेम के बदले, ना कुछ पाना, प्रेमी हैं हम, ना व्यापारी। जहाँ रहो तुम, सुखी रहो बस, गा लेंगे हम, गीत पुराने। […]

कविता

कानूनों में, प्रेम न पलता

नहीं कोई, गन्तव्य निर्धारित, पथिक हैं, पथ पर जाना है। चंद कदम है, मिला साथ बस, साथी! साथ निभाना है।। जात-पाँत, कोई, भेद नहीं है। धोखा खाया, हमें, खेद नहीं है। पथ की धूल, कभी, गयी न लूटी, प्रेम तुम्हारा, कभी, ध्येय नहीं है। आघात किया, अब, साथी जाओ, घायल ही हमें जाना है। चंद […]

कविता

किसी के लिए खास!

काश! हम भी होते, किसी के लिए खास! कोई, हमारे लिए भी, करती अरदास। कोई, हमें भी, करती पसंद, डालती हमें भी, प्रेम की गुलाबी घास। मिलाती, हमारे साथ छन्द, नहीं रहने देती, हमें स्वच्छन्द। काश! हमारा भी करती कोई इंतजार उमड़ता हमारे लिए भी, थोड़ा सा प्यार, बनती, जीवन का आधार। काश! कोई, हमें […]