इतिहास कविता

धोखा खाकर, जश्न मनाओ

जीवन-पथ जीवन पथ पर, पथिक है चलना।राह में राही, सबसे है मिलना।पथिक तो आते, जाते रहते,रूकना नहीं, है अविरल चलना। आधा जीवन बीत रहा है।नहीं, कभी संगीत रहा है।हमने सब कुछ लुटा दिया,फिर भी साथ न मीत रहा है। साथ में जो भी, मीत ही समझो।नहीं किसी से, कभी भी उलझो।जीवन तो है, भूल-भुलैया,सोचो, समझो […]

गीत/नवगीत

हर युग में, मैं छली गई हूँ

काली, दुर्गा, सरस्वती नहीं हूँ, मैं साधारण सी नारी हूँ। हर युग में, मैं छली गई हूँ, प्रेम से कहकर प्यारी हूँ।। जिम्मेदारी, मुझ पर डालीं। काम सौंप दिया, कह घरवाली। अधिकार सब, रखे पुरूष ने, कर्तव्यों की, थमा दी, प्याली। संस्कृति का भी भार बहुत है, थामो तुम, मैं हारी हूँ। हर युग में, […]

गीत/नवगीत

तेरी चाहत दूरी है

तेरे बिन, मैं रहा अधूरा, प्रेमी संग तू पूरी है। संग साथ की चाहत मेरी, तेरी चाहत दूरी है। प्रेम का तूने, राग अलापा। अकेलापन मुझको है व्यापा। षडयंत्रों को पूरा करने, कोर्ट में जाकर, किया स्यापा। प्राणों पर आघात किया, फिर कहती मजबूरी है। तेरे बिन, मैं रहा अधूरा, प्रेमी संग तू पूरी है।। […]