कविता पद्य साहित्य

मन-मयूर, मन करेगा नर्तन

नर-नारी संबन्ध निराला। पत्नी, बेटी हो या खाला। इक-दूजे को देखे बिन, गले से उतरे नहीं निवाला। नारी को कहते घरवाली। कभी न रहती है वह खाली। घर ही नहीं, बाहर भी वह, नर की प्रेरणा डाली-डाली। इक-दूजे को बहुत सताते। इक-दूजे  के गाने  गाते। इक-दूजे की कमी निकालें, इक-दूजे बिन नहीं रह पाते। कोई […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

सृष्टि की रचना होती है

नारी उर में, दीप सजाती, नर बिखराता ज्योती है। प्रकृति-पुरुष के सम्मिलन से, सृष्टि की रचना होती है।। भिन्न प्रकृति है, भिन्न मही है। दोनों ही अपनी जगह सही हैं। दोनों मिल जब साथ में चलते, दानों की राह, आनन्द मयी है। नर भी सुख से जी नहीं सकता, नारी जब भी रोती है। प्रकृति-पुरुष […]

गीत/नवगीत

कुछ भी कहो, कुछ भी करो

बहुत है झेला, बहुत है भोगा, शेष रही कोई, चाह नहीं है। कुछ भी कहो, कुछ भी करो, किसी की कोई, परवाह नहीं है।। प्रताड़ना रूपी, प्रेम था पाया। अभावो ने भी था ठुकराया। तप्त धरा पर नंगे पाँव चल, हमने बसंत का राग सुनाया।। बचपन भूख से पल-पल खेला, जवानी काल कुछ याद नहीं […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

घर तो आखिर, घर होता है

हर प्राणी, चैन की नींद सोता है। घर तो आखिर, घर होता है।। कण-कण में, प्रेम है रमता। दादी दुलार में बचपन पलता। चंचलता अगड़ाई लेती जहाँ, सीमा टूटतीं, युवा मचलता। प्रेम के आँसू, जो रोता है। घर तो आखिर, घर होता है।। अभावों में भी जीवन खिलता। टूटे दिलों को, प्रेम है सिलता। मिट्टी […]

कविता पद्य साहित्य

उठकर आगे, बढ़ेंगे फिर से

हम अपनी ही राह चलेंगे। सुविधाओं को ना मचलेंगे। उठकर आगे, बढ़ेंगे फिर से, गलती से, यदि हम फिसलेंगे। धोखे अब तक बहुत ही खाये। सच के गान हैं, फिर भी गाये। हमने सब कुछ सौंप दिया था, तुमने छल के तीर चलाये। नारी का सम्मान है करते। नहीं किसी का मान है हरते। सहयोग […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

नर नारी का, मित्र स्वाभाविक

नर नारी का, मित्र स्वाभाविक, नर की कामना, नारी है। इक-दूजे के लिए बने हैं, फिर, रण की क्यों तैयारी है? शब्द ही युग्म है, नर-नारी का। पीड़ा हरे, आँचल साड़ी का। नारी, नर पर, हो न्यौछावर, नर है सजाता, पथ प्यारी का। भिन्न-भिन्न हों, राह भले ही, अटूट दोनों की यारी है। नर नारी […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

नहीं चाहिए, दुआ किसी की

नहीं चाहिए, दुआ किसी की, नहीं देवी का मान है। जन्मने दो,  शिक्षित होने दो,  नारी के अरमान हैं।। सहायता नहीं, सहयोग चाहिए। नहीं कोई,  हमें आन चाहिए। पथ अपना हम, खुद चुन लेंगी, नहीं कोई, व्यवधान  चाहिए। हमको क्या सुरक्षा दोगे? खतरों में तुम्हारी जान है। जन्मने दो,  शिक्षित होने दो,  नारी के अरमान […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

एक नारी ने, जन्म दिया था

एक नारी ने, जन्म दिया था, दूजी ने, मौत की राह दिखाई। विश्वासघातिनी ने सब छीना, पर, नारी से विश्वास न जाई।। जन्म दिया, और, नारी ने पाला। पिलाया पल पल प्रेम का प्याला। कपट जाल में, नर को फंसाकर, नारी ने ही,  मुँह  किया काला। प्रेम बहिन का, याद करूँ, या कुलटा की चाल, […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

हम सच के गाने गाते हैं

हम आजीवन, रहे अकेले, अब क्या साथ निभाओगी? हम सच के गाने गाते हैं, तुम कपट गान ही गाओगी।। जीवन में कुछ नहीं छिपाना। सच ही जीवन, सच अपनाना। छल-कपट का, जाल यूँ बुनकर, मुझे चाहतीं, तुम धमकाना। धन, पद, यश, संबन्ध चुरा लो, किन्तु साथ ना पाओगी। हम सच के गाने गाते हैं, तुम […]

गीत/नवगीत पद्य साहित्य

नारी नहीं अब घर तक सीमित

नारी नहीं अब घर तक सीमित, चहुँ ओर अब छायी है। लोरी गाते-गाते माँ ने, अब, तकनीक भी, अपनायी है।। अहिल्या बाई, आनन्दी बाई। इंदिरा नुई ने धाक जमाई। अंतरिक्ष की हुई कल्पना, टेसी थामस जग में छाई। दुर्गा भाभी को याद करें नित, मैरी काम हरषाई है। लोरी गाते-गाते माँ ने, अब, तकनीक भी, […]