कविता

इजहार प्यार का

घने वाग – वगीचों के बीच एक नव निर्मल लड़की देखी बीच , उसके दाँत तारों से चमक रहे थे मुख मण्डल के बीच वह गिरी गिद्ध होकर सहसा मैंने उसे उठाया , नया जन्म सा उसने पाया इतने में उसका पागल प्रेमी आया  । आँख दिखाकर उसने पूछा यह मेरी प्रेमिका वेवफा है इसने […]

गीत/नवगीत

आया बसन्त

आया बसन्त आया बसन्त। फूल खिल गये अनन्त।। चहुँ और गन्ध बरषने लगी मन की क्यारी महकने लगी, पुष्प गन्ध हो अनन्त। आया बसन्त आया – – – – – मनुष्य मन हो हर्षित मनुष्य तन हो गर्वित, ऋतु आगमन में हो ऋतु राज कन्त। आया बसन्त आया – – – – – डाल -डाल […]

गीत/नवगीत

नव वर्ष का भोर

नव वर्ष का भोर आया है नये खग- कल गान लाया है धरा पे मधुर मकरन्द छाया है पुष्पित फूलों ने एक हार बनाया है। नव वर्ष का – – – – – – – – – – – – – – – – – – – – वहक़ रही है सव अन्तर धड़कन झूम […]

कविता

कविता : पक्षियों की मनोव्यथा

पहले तन मन की आजादी थी सुबह निकल घरों से घूमा करते थे मस्त वादियों में दाना चुगकर आ जाया करते थे घरोंको खुला छोड़कर, हम सब पक्षीजन जो मण्डल में चहका करते थे! प्यार से बुलाकर मानव पहले स्पर्श किया करते थे अपने खाने से पहले हमें खिलाया करते जब कहीं जाते थे वे […]

गीत/नवगीत

गीत : आया दीपों का पर्व निराला

आया मन भावन दीपों का पर्व निराला प्रकाश पुंज आलोकित हो, खुशियों का अमृत प्याला तेरे प्यार में प्रतिपद रचने को ये मन करता सुख-समृद्धि नव आशाओं से घर भर दे लक्ष्मी माता ! .. आया मन ……….. कष्ट प्रमाद , विषाद की हरिणी आशा , उल्लास , चेतना की तरभरणी , दया , सौभाग्य […]

कविता

घायल मन!

मन हार गया धन जीत गया ! धन हार गया जग जीत गया !! जो मन ने कहा मैं कर न सका, धन दौलत से घर भर न सका ! जीवन के अंतिम छण आये , अब पाृण हमारे घव राये !! क्या फिर से पुनर्जन्म होगा , क्या फिर से घायल मन होगा !! […]

गीत/नवगीत

गीत : तुम आ जाओ

  हो तुम जहाँ रहती हो साँसों में यादो के भोरे मडराने लगते है रातों में बनके चाँदनी तुम दिल में उतर जाओ हवा का झोंका बन तुम आजाओ दिल से लगी है दिल की लगन दिल में उगा दें प्यार की अगन हवाओं में फैली हैं मस्तियाँ बनके मोती तुम माला बन जाओ कली […]

कविता

कविता : वो यादें

जो संवारा था घर आँगन डूबा है विरह में खोजता-फिरता हूं दलहीज पर उन स्पर्शों को जब याद दिलाती वो यादें अच्छे थे मौसम कहावतों के उमड पडा सैलाब दु:ख दर्द बनकर. न जाने कहाँ था खडा असामान्य स्थिर हृदय गति होती है जब न्याय से चिल्लाती हैं वो यादें जन-जन रोता है पल-पल अच्छाई […]

गीत/नवगीत

गीत : हो तुम कहां ओ जाने जां…

ये नदियां ये बहारें और ये हुस्न परियां चारों ओर फूल कलियां और नजारे देख इनको याद आयी तुम्हारी सांझ सकारे हो तुम कहां ओ जाने जां… ये बुलबुल और तारे जमीं पे फैले अनगिनत सितारे वो खुशबू वो यादें जमीं पे उतारे वो इस तरह का चलना मचलना बार बार मन को संवारे हो […]