लघुकथा

अस्तित्व

अस्तित्व ” माँ, तुमने तो कहा था मेरी विदाई पर कि मेरे मायके में मेरे अस्तित्व को हमेशा बनाये रखोगी पर आज मात्र कुछ साल में ही ………” ” बेटा मेरा ही अस्तित्व नहीं रहा अब तो तेरा कैसे बनाये रखती ? सारिका औदिच्य

कविता

क्या यही प्यार है

  यह प्यार नहीं तो क्या है तू जो नहीं दिखती, दिल मेरा होता बेचैन, यह प्रेम नहीं तो क्या है ? तू जो नहीं बोलती कुछ भी, कान मेरे तरसते है सुनने को, यह प्रेम नहीं तो क्या है? तुम जो रूठ जाती हो, दिल मेरा होता उदास, यह प्रेम नहीं तो क्या है? […]

लघुकथा

बस यही है दोस्ती

बस यही है दोस्ती ” दीपा, सुन तो”। ” हाँ, बोल श्रुति, क्या हुआ”? ” कल मैंने तुमको सायरा के संग किसी बाबा की बात करते सुना था। तुम भी बाबा की तारीफ कर रही थी तो क्या तुम भी बाबाओं में विश्वास करती हो”? ” हाँ जिन बाबा की बात हम कर रही थी […]

कहानी

मेरी प्रेरणा

मेरी प्रेरणा ” अब हम प्रकाश को इनकी बहादुरी और शांति कायम रखने के लिए “अशोक चक्र ” से सम्मानित करते हुए अपार हर्ष की अनुभूति महसूस कर रहे है। इन्होंने नक्सली संगठन का बहादुरी से खात्मा करते हुए बहादुरी का परिचय दिया , साथ ही इन्होंने अपने किसी भी साथी को आँच भी नहीं […]

कविता

ख्वाब

एक ख्वाब जो कभी देखा था, उस अल्हड़ उम्र में जब सभी, एक ख्वाब से दूसरे ख्वाब में, खेलते दौड़ते रहते थे अक्कसर, उसी ख्वाब को देख लिया था, इन आँखों ने अपने ख्वाबों में, आज वही ख्वाब निकल गया, मंजिल अपनी पाने के लिए, जब ख्वाब हो साकार होगा, सामने ऐसे जैसे मिला “कोहिनूर” […]

कहानी

एक फूल दो माली

पुराने समय की बात है, मेवाड़ के नगर सेठ का पुत्र “नीर ” बहुत सुंदर साहसी और कार्य में कुशल था। कोई भी कन्या उसको एक नज़र देखे तो मोहित जो जाये और उसको निहारती ही रहे। नगर सेठ को उसके विवाह की चिन्ता रहती थी। उसको कोई भी कन्या पसंद नहीं आती। नीर को […]

कविता

बेटी सिर्फ बेटी है

  बेटी पर एक कविता माँ मैं तेरी चिड़िया हूँ प्यारी, ऐसा तुम कहती रहती हरदम, तुम सोच सोच कर रोती हो कि , एक दिन मैं पराए घर चली जाऊँगी, तुम मुझे चाह कर रोक न सकोगी , सूना सूना हो जाएगा तेरे घर का आँगन , कोने कोने में बसी है मेरी यादें […]

कविता

मिलन

सूर्य देव चले आहिस्ता आहिस्ता, अस्ताचल को करके अपना काम, संध्या तक रही है राह उनकी, कुछ देर में होगा उनका मिलन, संध्या रानी से , तब खिलेगी संध्या, वातावरण होगा अद्भुत रमणीय, इधर चंदा भी है आतुर आने को, चांदनी को संग ले कर चमकने को, चांदनी भी कर रही है इंतज़ार चंदा का, […]

कविता

दो आँखे

वो एक जोड़ी दो आँखे, तकती रहती दरवाजे को, हर एक आहट पर वो , उठ जाती उधर दरवाजे पर, लेकिन हर बार होती निराशा, जब देखती मुझे दरवाजे पर, खुशी से चुपके चुपके वो , बहती होले से नज़र चुरा सभी की, खुशी झलकती शब्दो में, आँखों से बहता पानी खुशी का , मेरे […]

कविता

मामा

हम तो खाली हाथ नहीं जाएंगे , तेरे घर आये है, तो खीर पूरी खाएंगे, मामा का दुलार , मामी का प्यार लेंगे, घर आ मां को, किस्सा सारा सुनाएंगे, सम्पर्क टूट गया तो क्या, उम्मीद है बाकी मैं तो उतर गया , कर हिम्मत पूरी आज, मामा के आँगन में आज देखो दुनिया वालों, […]