लघुकथा

प्रीत की रीत

मोहन और लसिका साथ एक ही कॉलेज में पढ़ते है । मोहन को कूची, रंगों से प्यार है तो लसिका को उसके चित्रों से । मोहन के बनाये हर चित्र लसिका के साथ औरों को भी बरबस अपनी ओर खिंचते है । दोनो के बीच एक समझ है जो बिना कहे ये लोग एक दूसरे […]

कविता

मेरे भाई

दुनिया की भीड़ में तुम , भाई कहाँ खो गए हो , जहाँ तक मेरी आवाज़ , नही आ रही तुम तक । भाई बड़ा हो या छोटा, होता बहन का प्यारा, उस पर हर पल , प्यार लुटाती बहन है । हमारा वो प्यार अनोखा, बचपन वाला , आज खान खो गया , तुम […]

कविता

क्यों,कब तक

आखिर क्यों ,कब तक , हमको कोसोंगे आप , कसूर क्या है हमारा ???? हम सैनिक है शायद, यही बड़ा कसूर है हमारा । हम आपके लिए खड़े है, रात दिन देखे बिना सीमा पर। यही कसूर है हमारा शायद। आप रहते हो परिवार संग, हम छोड़ अपना परिवार, आपके लिए ही खड़े है सीमा […]

कविता

कहाँ से कहाँ जा रहे है….

क्या हो रहा है हमको ??? कहाँ से कहाँ जा रहे है हम ?? शायद आधुनिक हो रहे है। हम ही खुद को बदल रहे है , नाम लेते आधुनिकता का, आज के युग में खुद ही, अपनी अलग पहचान चाहते है । हम सुबह सवेरे सब को , राम राम कहते थे प्रणाम कर, […]

लघुकथा

जन्मदिन

सुदर्शन को कितनी मुश्किल से उसको सिर्फ दस दिन की छुट्टियां मिली है ।अपने जीवन का खास दिन वो जीवन देने वाली मां, जीवन के पथ पर साथ देने वाली संगिनी ओर जीवन का आधार उसके प्यारे प्यारे बच्चों के साथ बिताना चाहता था।लेकिन उसकी छुटी उसी अहम दिन से शुरू हुई है ,वो हजारों […]

कविता

विदाई

तुम जा रहे हो ,नही रोकती तुमको, सुनो जाते जाते एक काम करना ।। सबके गम ले जाना संग , मुस्कान दे जाना सबके मुख पर ।। सारी बाधा सबकी संग ले जाना , मेहनत करने वाले को सफलता मिले ।। जो थे अब तक परेशान , हैरान , खुशी के पल कुछ दे जाना […]

लघुकथा

कहानी इश्क की

” हाय .. ” हाय…. ” कैसी हो, आपने मुझे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी जानती हो क्या मुझे …….? “नही जानती पर कॉमन दोस्त बहुत है कुछ तो मेरे करीबी रिश्तेदार”। ” ओह्ह मुझे नहीं मालूम था इतने करीबी रिश्तेदार कॉमन फ्रेंड है “। ” ओहो, तब तो ठीक है नही तो ……….,मैं अनजान को दोस्त […]

कविता

मेरी तन्हाई

मैं जब अपनी तन्हाई के साथ,अकेला जब भी होता हूँ ,क्यो तुम चली आती हो , मेरी खामोश आंखों में, क्यो तुम झाँक कर इनमें, अपनी झील सी आंखों में , मुझे डुबोना चाहती हो उनमें । मेरी खामोश हुए लब , जो कुछ न कहते कभी, अपने लबों को उन पर टिका, बोलने को […]

लघुकथा

बलि

  मां का लाडला इंजीनियरिंग कर अच्छी जगह लग गया बड़े शहर में । उसके लिए बड़े बड़े शहर की लड़कियों के रिश्ते आने लगे ।गरीब खेतिहर मां बाप जिन्होंने बेटे को कैसे इस लायक बनाया वो देख फुले नही समा रहे । बेटा उनका अनोखा जो शादी को हाँ नही कर रहा । ” […]

कविता

अल्फ़ाज़

  अल्फ़ाज़ कागज़ कलम लिए आज हूँ, तुमको सोचती आज हूँ , ख्वाब से निकाल लूँ, तुमको साकार कर लूँ , तुम्हारे ख्याल को , शब्दों में ढाल लूँ , कहाँ से शुरू करूँ , कहाँ खत्म करूँ , समझ नही आता ।। तेरी हर अदा पर , प्यार आता है , तेरा रूठना भी […]