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  • काश ये आता समझ हर आदमी को…

    काश ये आता समझ हर आदमी को…

    काश ये आता समझ हर आदमी को रंजिशें देती नहीं खुशियाँ किसी को झूठ की हमदर्दियाँ डँसने लगी हैं नाग बनकर ज़िन्दगी की आजिजी को देखता है हर कोई मुस्कान लब की देखता है कौन आँखों...