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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    इक यही मंजर दिखाई दे रहा है हर तरफ़ बस ड़र दिखाई दे रहा है हो रहा है मजहबों के नाम पर जो सिर्फ आड़म्बर दिखाई दे रहा है कह रहे हैं आप आलीशान जिसको घर...

  • साहिबे दस्तार होने चल दिए

    साहिबे दस्तार होने चल दिए

    साहिबे दस्तार होने चल दिए फूल भी अब ख़ार होने चल दिए यूँ बने रिश्ते तिजारत, आपसी मस’अले अख़बार होने चल दिए भावनाएं इस कदर बिकने लगीं धर्म भी बाज़ार होने चल दिए वो जिन्हें औजार...

  • गीत

    गीत

    बरस दर बरस फूँक रहे हैं, सदियों से जिनके पुतले हम। बरस दर बरस उनका कुनबा, और अधिक बढ़ता जाता है।। आदर्शों की लीलाओं का, मंचन मंचों तक सीमित भर। धर्म साधना मंदिर मस्जिद, ढ़ोंग प्रपंचों...

  • सामने वो अगर नही आता

    सामने वो अगर नही आता

    सामने वो अगर नही आता चैन फिर रात भर नही आता कुछ किये बिन बुलंदियाँ पा लूँ मुझको ऐसा हुनर नही आता मुफ़लिसी का पता चला जबसे कोई अपना इधर नही आता जोहते बाट थक गयीं...

  • ऐ ख़ुदा ऐसा नही जेहाद आए

    ऐ ख़ुदा ऐसा नही जेहाद आए

    साथ जिसके धार्मिक उन्माद आए ऐ ख़ुदा ऐसा नही जेहाद आए भूल कल कोई हुई होगी यक़ींनन आज फिर से ख़्वाब में अजदाद आए बस इसी में ज़िन्दगी गुजरी हमारी कौन पहले कौन किसके बाद आए...


  • धूप को चाँदनी नहीं लिखते

    धूप को चाँदनी नहीं लिखते

    धूप को चाँदनी नहीं लिखते आँसुओं को खुशी नहीं लिखते जो कलमकार हैं किसी हालत रात को दिन कभी नही लिखते इश्क जो रूह तक नही पहुँचे हम उसे आशिकी नहीं लिखते उनको कैसे अदब नवाज...


  • चिंता छोड़ करो चिंतन…

    चिंता छोड़ करो चिंतन…

    कुछ भी नही असम्भव जग में, जब करने की ठाने मन। चिंता छोड़ करो चिंतन बस, चिंता छोड़ करो चिंतन।। जीवन के पथरीले पथ पर, कष्ट सहन कर चलते रहना। काली अँधियारी रातों में, दीपक बन...

  • उद्घोष करना है जरूरी…

    उद्घोष करना है जरूरी…

    हाकिमों का दंभ बढ़कर आसमां छूने लगे जब। देश में जन क्राँति का उदघोष करना है जरूरी।। भूल कर जब धर्म सत्ता, हो विमुख कर्त्तव्य पथ से न्याय कुचला जा रहा हो, हर घड़ी जब राज...