गीतिका/ग़ज़ल

अना सम्मान लहजा और तेवर छीन लेती है…

अना सम्मान लहजा और तेवर छीन लेती है ग़रीबी क़द्र क्या दस्तार क्या सर छीन लेती है पदों पर बैठने वालों न देखो सिर्फ़ अपनो को ये ख़ुदगर्जी हुनरमंदों के अवसर छीन लेती है हुकूमत पूछती है प्रश्न जब प्रश्नों के उत्तर में रियाया के लबों से प्रश्न अक्सर छीन लेती है दिखाकर भाषणों से […]

गीतिका/ग़ज़ल

रियाया इससे पहले की बग़ावत पर उतर आए..

रियाया इससे पहले की बग़ावत पर उतर आए अमीरे शहर से कह दो शराफ़त पर उतर आए दिया क्या साथ हमने मुफ़लिसों की हक़परस्ती का हमारे दोस्त ही हमसे अदावत पर उतर आए तुम्ही से थी हमें उम्मीद दोगे साथ हर हालत मगर ये क्या हुआ तुम भी शिकायत पर उतर आए तुम्हें माना रियाया […]

गीत/नवगीत

पतझर के बाद बहारों का, मौसम आता है आएगा…

बगिया में ठूठ हुई शाखों, को देख निराश न हो माली। पतझर के बाद बहारों का, मौसम आता है आएगा।। दुख देते हैं पीड़ा के पल, उल्लासित करता हर्ष कभी। सबके जीवन में आता है, अपकर्ष कभी उत्कर्ष कभी।। परिवर्तन का है नियम अटल, कोई भी रोक न पाएगा… पतझर के बाद बहारों का, मौसम […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

टीस किसी बेबस की जिस दिन निज मन में महसूस करोगे उस दिन एक नया सा जीवन जीवन में महसूस करोगे। त्याग मुखौटे आड़म्बर के जिस दिन ख़ुद से मिल लोगे तुम रब को बैठा अपने मन के आँगन में महसूस करोगे।। और किसी की बात न सुनकर अपने मन की बात करेगा होकर मद […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

चल रहा ये पतझरों का दौर जाएगा ज़रूर ज़िन्दग़ानी का गुलिस्तां मुस्कुराएगा ज़रूर उसकी रहमत और ख़ुद के कर्म पर विश्वास रख मुश्किलों के बाद अच्छा वक्त आएगा ज़रूर शोर कितना साथ लेकर डोलती है ख़ामशी मौन से भी भेद मन के ख़ोलती है ख़ामशी ख़ामशी को कान से सुनना नही मुमकिन मगर दिल सुने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

रात को रात बोलता हूँ मैं लोग कहते हैं सिरफ़िरा हूँ मैं इम्तिहां ख़ूब लीजिये मेरा मुश्किलों में पला बढ़ा हूँ मैं मंज़िलों के करीब जाने को टीस ख़ारों की सह चला हूँ मैं एकला मुझको मानने वाले गौर से देख काफ़िला हूँ मैं दौरे नफ़रत की धुँध में गुम हूँ चाह का लापता पता […]

गीत/नवगीत

सो जाती है न्याय व्यवस्था

पीड़ित को दे तारीखें जब, सो जाती है न्याय व्यवस्था। तब कानून कबीलों वाले, जनता को भाने लगते हैं।। कुछ सत्ता की उदासीनता, कुछ शाशन का नाकारापन। नही सुनिश्चित कर पाता जब, तय कानूनो का अनुपालन।। राजनीति रक्षित अपराधी, जब आश्रय पाने लगते हैं… तब कानून कबीलों वाले, जनता को भाने लगते हैं… बरसों बरस […]

कुण्डली/छंद

मधुशाला

केवल श्रम की चाबी से ही, खुलता किस्मत का ताला कर्तव्यों से ही मिलती है, अधिकारों वाली हाला। जो साहस के साथ मथेगा, कठिनाई के सागर को उसके जीवन में छलकेगी, सुख सपनों की मधुशाला।। चलने का साहस करते जो, पावों में सहकर छाला मंजिल पर जाकर भरते हैं, कामयाबियों की हाला। जो सच्चाई से […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

दर्द के तन्हाईयों के उलझनों के दौर में कौन किसका साथ देता है ग़मों के दौर में है यही बेहतर जबां खामोश रक्खे आदमी बोलना अपराध सा है बंदिशों के दौर में टूट जाएगा किसी दिन किरचियों में देखना आईना बन जी रहा है पत्थरों के दौर में मै उसे पागल कहूँ या हिम्मतों की […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

फ़िरका परस्तियों की साज़िशों के बावज़ूद ज़िन्दा है प्यार बढ़ती नफ़रतों के बावज़ूद रख हौसला मिलेंगी मंज़िलें भी एक दिन मुश्किल सफ़र तमाम गर्दिशों के बावज़ू्द सच हारता नही है जानता हूँ मैं, तभी टूटा नही हूँ इतनी मुश्किलों के बावज़ू्द हैं साथ आपकी दुआ तभी तो ये चराग रोशन है गर्दिशों की आँधियों के […]