कुण्डली/छंद

कुण्डलिया छंद

अंतस में नैराश्य का, जब जब पले विकार निंदा रस की गोलियाँ, सहज सरल उपचार सहज सरल उपचार, जगाती उर्जा मन में बिना लगाए दाम, भरें ख़ुशियाँ जीवन में कह बंसल कविराय, लगे जब जीवन नीरस निंदा से आनंद, अनंत पाएगा अंतस।। जीवन में यदि आपको, पाना है सम्मान चाटुकारिता कीजिये, जी भर के श्रीमान […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

कोहरा फैलती गर्द हट जाएगी हर घड़ी बढ़ रही धुंध छँट जाएगी दीप जिस पल हृदय में जला आस का तीरगी रास्तों की सिमट जाएगी धर्म ईमान श्रृद्धा वफ़ा की तरह प्राणमय देह में चेतना की तरह है तमन्ना रहें एक दूजे में हम देह में देह की आत्मा की तरह जब जहाँ जिस तरह […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

कली के मुस्कुराने हुस्न के श्रृंगार के दिन हैं करे जो चाह चाहत से उसी इज़हार के दिन हैं नही अब ख़्वाब से होता गुज़ारा रू-ब-रू आओ मुहब्बत से मुहब्बत की हँसी तकरार के दिन हैं निगाहों का निगाहों से हुआ पहला मिलन जब से निगाहों में बसा है रूप का खिलता चमन तब से […]

गीत/नवगीत

गीत

परिवर्तन है नियम प्रकृति का यूँ ही चलता रहता है नये रंग में नये रूप में जीवन ढ़लता रहता है। दुख जीवन में आया है तो सुख भी निश्चित आएगा कब रहता है सदा एक सा वक्त बदलता रहता है।। कौन यहाँ पर ऐसा है जो विधि विधान से बाध्य नही लेकिन यथा योग्य श्रम […]

गीतिका/ग़ज़ल

कोरे सपने देख विजय का जश्न मनाने वाले लोग

कोरे सपने देख विजय का जश्न मनाने वाले लोग पछताते हैं सच्चाई से आँख चुराने वाले लोग किस्मत से यदि मिल जाएं तो दिल में धड़कन से रखना मुश्किल से मिलते हैं सच्चा प्यार निभाने वाले लोग वक्त निकलने पर राहों में ख़ार बिछाने लगते हैं वक्त पड़े स्वागत में अपनी आँख बिछाने वाले लोग […]

गीतिका/ग़ज़ल

ज़रूरी वक्त पर कुछ फ़ैसला करने नहीं देता

ज़रूरी वक्त पर कुछ फ़ैसला करने नहीं देता बशर का ड़र बशर को कुछ नया करने नहीं देता समझते ख़ूब हैं क्या है सही क्या है ग़लत लेकिन मियाँ ये लोभ वाजिब तब्सिरा करने नहीं देता रगों में बह रहा ये ख़ानदानी खूँ कभी हमको हमारे फ़र्ज़ से कोई दगा करने नहीं देता धरम का […]

गीतिका/ग़ज़ल

भाषणों से विष हवाओं में मिलाया जाएगा

भाषणों से विष हवाओं में मिलाया जाएगा धार्मिक उन्माद को फिर से जगाया जाएगा नफ़रतों की आग में गुलशन जलाया जाएगा फिर सियासत का तवा उस पर चढ़ाया जाएगा है यही हथियार सबसे कारगर तुम देखना जीतने को रण रियाया को लड़ाया जाएगा कद बहुत घटने लगा है फ़िक्र है बेहद उन्हें चाहियें लाशें, बिछाकर […]

गीत/नवगीत

जितना पूजा पाठ कीजिये, माला जपिये नाम की

जितना पूजा पाठ कीजिये, माला जपिये नाम की। जब तक मन में द्वेष रहेगा, भाव भक्ति किस काम की।। तन पर संतों वाला चोला, भौतिकता पसरी मन में। मानव होकर मानवता का, काम किया क्या जीवन में।। मन में चाहत रंगीनी की, मुख चर्चा ब्रज धाम की… जब तक मन में द्वेष रहेगा, भाव भक्ति […]

गीत/नवगीत

गीत

आँसू ख़ुशी अमिय विष जो भी हिस्से आया है। ये सब कुछ अपने कर्मों से स्वयं कमाया है। सार्वभौम है सत्य यही है गीता की वाणी जिसने जैसा बीजा फ़ल भी वैसा पाया है।। ईर्ष्या द्वेष क्रोध मद पसरा है जिसके मन में बाँध लिया है जिसने ख़ुद को माया बंधन में। भौतिक संसाधन में […]

कविता

विजय वरण का मंत्र

विजय वरण का मंत्र निहित है आत्म शक्ति में और लगन में है असफ़ल होने का मतलब कमी रही है श्रम साधन में। जैसी करनी वैसी भरनी विधि का सकल विधान अटल है कामयाब या असफ़ल होना मानव की करनी का फ़ल है।। कठिन समय में करते हैं जो चिंता छोड़ चित्त में चिंतन देता […]