गीत/नवगीत

गीत

आँसू ख़ुशी अमिय विष जो भी हिस्से आया है। ये सब कुछ अपने कर्मों से स्वयं कमाया है। सार्वभौम है सत्य यही है गीता की वाणी जिसने जैसा बीजा फ़ल भी वैसा पाया है।। ईर्ष्या द्वेष क्रोध मद पसरा है जिसके मन में बाँध लिया है जिसने ख़ुद को माया बंधन में। भौतिक संसाधन में […]

कविता

विजय वरण का मंत्र

विजय वरण का मंत्र निहित है आत्म शक्ति में और लगन में है असफ़ल होने का मतलब कमी रही है श्रम साधन में। जैसी करनी वैसी भरनी विधि का सकल विधान अटल है कामयाब या असफ़ल होना मानव की करनी का फ़ल है।। कठिन समय में करते हैं जो चिंता छोड़ चित्त में चिंतन देता […]

गीत/नवगीत

बैठ मत यूँ मुश्किलों से हार कर

बैठ मत यूँ मुश्किलों से हार कर। उठ चुनौती वक्त की स्वीकार कर।। कौन जाने भाग्य में विधि ने लिखा है क्या किसी के। क्या पता किस पल बदल जाएं बुरे पल आदमी के।। हार से मत बैठ यूँ मन मार कर… उठ चुनौती वक्त की स्वीकार कर… मुक्त हो जा तोड़ कर पग रोकते […]

मुक्तक/दोहा

दोहा

इस जीवन का प्राण से, है जैसे संबंध। सच्चाई से शांति का, वैसे ही अनुबंध।। अंतस में जिस भाव के, बीजे गये विचार। देगी ख़ेती कर्म की, वैसी पैदावार।। बीज रहे हम आज जो, कुंठाओं की फस्ल। काटेंगी हर हाल में, आने वाली नस्ल।। मिलने का मौका मिला, जिससे जितनी बार। अलग अलग आनन मिले,अलग […]

गीत/नवगीत

रंग मंच के पात्र निभाकर…

रंग मंच के पात्र निभाकर, निज किरदार चले जाएंगे। कौन यहाँ रहने वाला है, सब उस पार चले जाएंगे।। मिलन वियोग प्रेम रुसवाई, जगमग उजियारे गहरा तम। जीवन में सब कुछ आना है, आँसू हँसी महफिलें मातम।। जीत यहाँ पर सब कुछ आख़िर, सब कुछ हार चले जाएंगे… कौन यहाँ रहने वाला है, सब उस […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

मर्ज़ी यार चलाओगे तो सब खो दोगे घर से बाहर जाओगे तो सब खो दोगे केवल संयम साध बचा पाओगे ख़ुद को मुश्किल में घबराओगे तो सब खो दोगे ले सकती है जान ज़रा सी लापरवाही ये सच यदि झुठलाओगे तो सब खो दोगे घर में जीवन है बाहर पसरा है जोख़िम जोख़िम आप उठाओगे […]

गीतिका/ग़ज़ल

अना सम्मान लहजा और तेवर छीन लेती है…

अना सम्मान लहजा और तेवर छीन लेती है ग़रीबी क़द्र क्या दस्तार क्या सर छीन लेती है पदों पर बैठने वालों न देखो सिर्फ़ अपनो को ये ख़ुदगर्जी हुनरमंदों के अवसर छीन लेती है हुकूमत पूछती है प्रश्न जब प्रश्नों के उत्तर में रियाया के लबों से प्रश्न अक्सर छीन लेती है दिखाकर भाषणों से […]

गीतिका/ग़ज़ल

रियाया इससे पहले की बग़ावत पर उतर आए..

रियाया इससे पहले की बग़ावत पर उतर आए अमीरे शहर से कह दो शराफ़त पर उतर आए दिया क्या साथ हमने मुफ़लिसों की हक़परस्ती का हमारे दोस्त ही हमसे अदावत पर उतर आए तुम्ही से थी हमें उम्मीद दोगे साथ हर हालत मगर ये क्या हुआ तुम भी शिकायत पर उतर आए तुम्हें माना रियाया […]

गीत/नवगीत

पतझर के बाद बहारों का, मौसम आता है आएगा…

बगिया में ठूठ हुई शाखों, को देख निराश न हो माली। पतझर के बाद बहारों का, मौसम आता है आएगा।। दुख देते हैं पीड़ा के पल, उल्लासित करता हर्ष कभी। सबके जीवन में आता है, अपकर्ष कभी उत्कर्ष कभी।। परिवर्तन का है नियम अटल, कोई भी रोक न पाएगा… पतझर के बाद बहारों का, मौसम […]

मुक्तक/दोहा

मुक्तक

टीस किसी बेबस की जिस दिन निज मन में महसूस करोगे उस दिन एक नया सा जीवन जीवन में महसूस करोगे। त्याग मुखौटे आड़म्बर के जिस दिन ख़ुद से मिल लोगे तुम रब को बैठा अपने मन के आँगन में महसूस करोगे।। और किसी की बात न सुनकर अपने मन की बात करेगा होकर मद […]