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  • मधुशाला

    मधुशाला

    केवल श्रम की चाबी से ही, खुलता किस्मत का ताला कर्तव्यों से ही मिलती है, अधिकारों वाली हाला। जो साहस के साथ मथेगा, कठिनाई के सागर को उसके जीवन में छलकेगी, सुख सपनों की मधुशाला।। चलने...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दर्द के तन्हाईयों के उलझनों के दौर में कौन किसका साथ देता है ग़मों के दौर में है यही बेहतर जबां खामोश रक्खे आदमी बोलना अपराध सा है बंदिशों के दौर में टूट जाएगा किसी दिन...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    फ़िरका परस्तियों की साज़िशों के बावज़ूद ज़िन्दा है प्यार बढ़ती नफ़रतों के बावज़ूद रख हौसला मिलेंगी मंज़िलें भी एक दिन मुश्किल सफ़र तमाम गर्दिशों के बावज़ू्द सच हारता नही है जानता हूँ मैं, तभी टूटा नही...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    एक नगर में आबो दाना कब होता है बंजारों का ठौर ठिकाना कब होता है जाते हैं सब लोग गुलों वाले मौसम में बगिया में पतझर में जाना कब होता है खुशहाली में साथ निभाता है...