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  • एहसास है तुम्हें….

    एहसास है तुम्हें….

    किस भाव में निज ज़िन्दगी एहसास है तुम्हें, उर में बहे पीड़ा-नदी एहसास है तुम्हें? है योग्य युवा फिर भी फिरे यार! दर-ब-दर, मिलती न उसको नौकरी एहसास है तुम्हें? जिस काम में तल्लीन था मैं...

  • अपने ही…

    अपने ही…

    आते थे कभी फोन मगर अब नहीं आते, अपने ही दोस्त अपने कगर अब नहीं आते! कुछ दिन से मेरा पर्स जो है तंग क्या हुआ, अपने ही मेरे दिल की डगर अब नहीं आते! करते...

  • हवन हो गई ज़िन्दगी

    हवन हो गई ज़िन्दगी

    मेरे सँग न कोई चलता अब दोस्तो, ऐंठी में मीत हर अड़ता अब दोस्तो! मैं जो उनको बधाई न देता अगर, उनका भी मुँह नहीं खुलता अब दोस्तो! जिनकी ख़ातिर हवन हो गई ज़िन्दगी, उनको जीवन...

  • साधना वर्षों की…

    साधना वर्षों की…

    तुम मुझे पहचानते हो खूब तो है, देख भौंहें तानते हो खूब तो है! मैं भले भाता नहीं तुमको मगर, रार मुझसे ठानते हो खूब तो है! साधना वर्षों की लेखन माँगता, मन-ही-मन तुम मानते हो...