राजनीति

बिखर गई पंचायतें, रूठ गए है पंच

आजकल हमें ऐसी ख़बरें सुनंने और पढ़ने को मिल रही है कि देश के अमुक गांव के सरपंच ने कर्ज के चलते आत्महत्या कर ली। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? भारत की पंचायती राज प्रणाली में गाँव या छोटे कस्बे के स्तर पर ग्राम पंचायत या ग्राम सभा होती है जो भारत के स्थानीय […]

सामाजिक

विकलांग व्यक्तियों के लिए गरिमापूर्ण जीवन के हो प्रयास

विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार, “विकलांग व्यक्ति” का अर्थ दीर्घकालिक शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या संवेदी हानि वाला व्यक्ति है, जो बाधाओं के साथ बातचीत में, दूसरों के साथ समान रूप से समाज में उनकी पूर्ण और प्रभावी भागीदारी में बाधा डालता है। आज भारत में करोड़ों लोग विकलांग हैं। 2011 की जनगणना […]

राजनीति

बेरोजगारी के दौर में युवा शक्ति कौशल और शिक्षा

युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिये देश की व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रणाली को सशक्त बनाना होगा। कोरोना ने देशवासियों को ऐसे स्थान पर लाकर खड़ा कर दिया है जहां पर अनेक लोगों को कौशल की आवश्यकता है । इस समय हर वर्ग के व्यक्ति को एक सभ्य आजीविका की जरूरत है। कौशल एवं व्यवसायिक […]

पुस्तक समीक्षा

‘तितली है खामोश’ : पुरातन और आधुनिक समन्वय का सार्थक दोहा संकलन

सत्यवान सौरभ हरियाणा के जुझारू एवं जीवटवाले लेखक और कवि हैं। खुशी की बात है कि उनका रचनाकार जिंदगी के बढ़ते दबावों को महसूस करता हुआ, उनसे लड़ने की ताब रखता है, उनसे संघर्ष करता है। हाल ही में उनका ‘तितली है खामोश’ दोहा संकलन प्रकाशित हुआ है। 725 दोहों का यह संकलन अनूठा है […]

सामाजिक

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हैं स्वयं सहायता समूह

एक स्वयं सहायता समूह एक गाँव-आधारित वित्तीय मध्यस्थता समिति है, जिसमें आम तौर पर 10-20 स्थानीय महिला या पुरुष शामिल होते हैं। जब औपचारिक वित्तीय प्रणाली जरूरतमंदों की मदद करने में विफल हो जाती है, तो छोटे समूह सूक्ष्म पैमाने पर पैसे इकट्ठा करने, बचाने और उधार देने के द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर लोगों […]

राजनीति

राजनीतिक लाभ के लिए सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग

समकालीन भारतीय राजनीति की महान त्रासदियों में से एक हमारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की स्वायत्तता का ह्रास है। यह शायद 70 के दशक के मध्य में आपातकाल के समय का है, जिसके बाद से हर राजनीतिक दल ने इस अस्वास्थ्यकर अभ्यास को अलग-अलग डिग्री के हठधर्मिता के साथ जारी रखा है। इन एजेंसियों की स्वतंत्रता […]

पर्यावरण

कुदरत की पीर, जोशीमठ की तस्वीर

जोशीमठ में उभरता संकट विकासात्मक परियोजनाओं की योजना बनाने और उन्हें क्रियान्वित करने के दौरान नाजुक हिमालयी पर्वतीय प्रणाली की विशेष और विशिष्ट विशेषताओं और विशिष्टताओं का सम्मान करने में विफलता की बात करता है। उत्तराखंड के इस शहर में 600 से अधिक घरों में कथित तौर पर दरारें आ गई हैं, जिससे कम से कम 3,000 लोगों की जान […]

इतिहास

सुरक्षा के साथ मानवता का धर्म निभा रही कांस्टेबल सोनिया

जीवन में सबके अपने सपने होते हैं लेकिन उन सपनों  को अगर किसी भी माध्यम से देश की सेवा के साथ-साथ किसी गरीब, असहाय के मदद से जोड़ सके तो सोने पर सुहागा, जी हाँ कुछ ऐसा ही कर रही भारत की बेटी सोनिया जोशी जो अभी उत्तराखंड पुलिस में कार्यरत हैं। ड्यूटी के साथ- […]

मुक्तक/दोहा

गुरुवर जलते दीप से

दूर तिमिर को जो करें, बांटे सच्चा ज्ञान। मिट्टी को जीवित करें, गुरुवर वो भगवान।। जब रिश्ते हैं टूटते, होते विफल विधान। गुरुवर तब सम्बल बने, होते बड़े महान।। नानक, गौतम, द्रोण सँग, कौटिल्या, संदीप। अपने- अपने दौर के, मानवता के दीप।। चाहत को पर दे यही, स्वप्न करे साकार। शिक्षक अपने ज्ञान से, जीवन […]

राजनीति

महोत्सव के बाद अमृत बनाये रखने की चुनौती

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र जल्द ही पृथ्वी पर सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने वाला है। इसलिए, स्वतंत्रता के 75 वर्ष का उत्सव व्यक्तिगत और सामूहिक स्वतंत्रता के संरक्षण और प्रचार में वैश्विक मानकों को स्थापित करने के लिए एक विशेष जिम्मेदारी लाता है। इस ऐतिहासिक अवसर पर हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि […]