मुक्तक/दोहा

हारा-थका किसान !

बजते घुँघरू बैल के, मानो गाये गीत ! चप्पा चप्पा खिल उठे, पा हलधर की प्रीत !! ———————————— देता पानी खेत को, जागे सारी रात ! चुनकर कांटे बांटता, फूलों की सौगात !! ———————————— आंधी खेल बिगाड़ती, मौसम दे अभिशाप ! मेहनत से न भागता, सर्दी हो या ताप!! ————————————— बदल गया मौसम अहो, हारा-थका […]

राजनीति

सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर लगाम ही आएगी काम

सोशल मीडिया संचार, सहयोग, शिक्षा जैसे विषयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और परिणामस्वरूप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को सार्वजनिक और सरकारी अधिकारियों की भागीदारी की तरह इसे महत्वपूर्ण मानते हैं. आज हमें सोशल मीडिया को सुरक्षित और संरक्षित रखने की जिम्मेदारी को समझने की जरूरत है  ताकि यह समाज के लिए एक प्रगतिशील उपकरण के […]

मुक्तक/दोहा

दादी का संदूक !

स्याही-कलम-दवात से, सजने थे जो हाथ ! कूड़ा-करकट बीनते, नाप रहें फुटपाथ !! बैठे-बैठे जब कभी, आता बचपन याद ! मन चंचल करने लगे, परियों से संवाद !! मुझको भाते आज भी, बचपन के वो गीत ! लोरी गाती मात की, अजब-निराली प्रीत !! मूक हुई किलकारियां, चुप बच्चों की रेल ! गूगल में अब […]

सामाजिक

बुजुर्ग हमारे वजूद हैं न कि बोझ  

हमारे देश में बुजुर्ग तेजी से बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन उनके लिए उपलब्ध संसाधन कम होते जा रहें  हैं। ऐसे में हम सबकी जिम्मेवारी बनती है कि उन्हें  एक तरफ रखने के बजाय उनकी  शारीरिक और मानसिक देखभाल करने के लिए समुदायों के जीवन में एकीकृत किया जाना चाहिए, जहां वे सामाजिक परिस्थितियों को […]

राजनीति

भारत को नए साल में नए सिद्धांत और क्षमता की आवश्यकता है

(चीन एक बढ़ती और आक्रामक महाशक्ति भारत के लिए बड़ा रणनीतिक खतरा है और पाकिस्तान के साथ चीन के कंटेनर भारत की रणनीति के लिए खतरा है। इसे देखते हुए, भारत के लिए दो-मोर्चे के खतरे के लिए तैयार रहना समझदारी होगी। ) वर्ष 2020 तक चल रहे कोरोनावायरस महामारी के कारण कई मोर्चों पर […]

राजनीति

ख़बरों के पीछे दौड़ती पत्रकारिता को रैड लाइट की जरूरत

आज  के दौर में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच मीडिया के लिए विश्वसनियता की अहमियत पहले से ज्यादा बढ़ गई है। आज देश भर के चैनलों और अख़बारों में खबर जहां जल्दी पहुंचाने पर जोर है, वहीं समाचार में वस्‍तुनिष्‍ठता, निष्पक्षता और सटीकता बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। इंटरनेट और सूचना के […]

मुक्तक/दोहा

किससे करे गुहार !

सच्चे पावन प्यार से, महके मन के खेत ! दगा झूठ अभिमान से, हो जाते सब रेत !! किस से बातें वो करे, किस से करे गुहार ! भटकी राहें भेड़ जो, त्यागे स्व परिवार !! मंत्र प्यार का फूँकते, दिल में रखते घात ! रिश्ते क्या बेकार है, करना उन से बात !! नेह-स्नेह […]

राजनीति

लव जिहाद और राणा जैसे बयान दो समुदायों के बीच नफरत पैदा करते हैं

रात हलाला नेक है, उठते नहीं सवाल ! राम नाम की दक्षिणा,पर क्यों कटे बवाल !! वर्तमान दौर में ये बात अक्षरश: सही साबित हो रही है कि कुछ दक्षिणा लेकर भी बदनाम हो गए, कुछ पूरी रात हलाला कर भी नेक निकले. बहुत से कवियों ने, शायरों, साहित्यकारों ने इस देश से पैसे और […]

मुक्तक/दोहा

बैठा नाक गुरूर

नई सदी ने खो दिए, जीवन के विन्यास । सांस-सांस में त्रास है, घायल है विश्वास ।। रिश्तों की उपमा गई, गया मनों अनुप्रास । ईर्षित सौरभ हो गए, जीवन के उल्लास ।। कहाँ हास-परिहास अब,और बातें जरूर । मिलने ना दे स्वयं से, बैठा नाक गुरूर ।। बोये पूरा गाँव जब, नागफनी के खेत […]

सामाजिक

क्यों बदल रहे हैं मनोभाव और टूट रहे परिवार?

आज सभी को एक संस्था के रूप में पारिवारिक मूल्यों और परिवार के बारे में सोचने-समझने की बेहद सख्त जरूरत है और साथ ही इन मूल्यों की गिरावट के कारण ढूंढकर उनको दुरुस्त करने की भी जरूरत है। इसके लिए समाज के कर्णधार कवि/लेखकों/गायकों/ नायक/नायिकाओं/शिक्षक वर्गों और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ-साथ राजनीतिज्ञों को एक […]