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  • मन का बोझ-

    मन का बोझ-

    अस्पताल के कॉरिडोर में स्ट्रेचर पर विवेक कराह रहा था | डॉक्टर से उसके जल्द इलाज की मिन्नतें करता हुआ एक अजनबी, बहुत देर तक डॉक्टरों और नर्सों के बीच फुटबॉल बना हुआ था। बड़ी मुश्किल...

  • सीमा –

    सीमा –

    “माँ! ऐसे गुमसुम बाहर क्यों बैठी हैं ? चलिए अंदर, टीवी पर आपका पसंदीदा नाटक आ रहा है |” “क्या नाटक देखूं बहू, घर में ही नाटक होता देख रही हूँ |” “कहना क्या चाह रही...

  • लघुकथा- आत्मग्लानि

    लघुकथा- आत्मग्लानि

    “चप्पल घिस गयी बेटा, एक लेते आना | मैं थक गया हूँ, अब सोऊंगा |” “पापा! दो साल से प्रमोशन रुका पड़ा है | दे दीजिये न बाबू को हजार रूपये | आपकी फ़ाइल आगे बढ़ा देगा | बिना दाम के, कहीं काम होते...

  • परिवर्तन

    परिवर्तन

    मम्मी! “ऑन लाइन आर्डर कर दूँगा, या चलिए मॉल से दिला दूँगा| वह भी बहुत खूबसूरत-बढ़िया दीये। चलिए यहाँ से| इन गँवारो की भाषा समझ नहीं आती, ऊपर से रिरियाते हुए पीछे ही पड़ जाते हैं|”...

  • मन का डर

    मन का डर

    उमेश रोज प्रिया से निधि की बड़ाई करता और हर बार की तरह उसकी आँखों में ईर्ष्या देखने की कोशिश करता था। पर अफ़सोस कि प्रिया की आँखों में कहीं कुछ नजर नहीं आता था। जैसे...

  • तड़प

    तड़प

    “कुछ साल पहले तुमने मुझसे कहा था कि कुछ भी चित्रकारी करना परन्तु मासूमियत को अपने चित्रों में मरने मत देना | फिर यह सब क्या है सुरेखा ?” नाराजगी जताते हुए आज का अख़बार डायनिंग...

  • कैसे हो सुखद जहाँ

    कैसे हो सुखद जहाँ

    आज मचा है हो हल्ला (शोरगुल ) अजीब सी शांति होगी कल होते है रोज बलात्कार जागती नहीं मगर सरकार ………… त्राहिमाम-त्राहिमाम का उठता शोर बहस छिड़ जाती कानून है कमजोर सुरक्षित होती इससे लड़कियां कहाँ...



  • चोट

    चोट

    “ये क्या कर रहे हो दोनों बरसात में ? भीगकर बीमार पड़ जाओगे?” “दादी, रेन कोट पहने हैं हम दोंनो, भीगेंगे नहीं | ” “इस बूंदाबांदी में भी कोई वृक्ष की जड़ों में पानी डालता हैं...