कविता

महक

अचानक से यह इत्र की आ गई महक दस्तक है यह किसी की लगता है कोई है पास 15 साल पुरानी यादें फिर से हो गई ताजा नहीं भूला तुम्हारी वह महक वैसे हटती नहीं हो मेरे जेहन से पर नाम मात्र लिया कि नहीं आ गई वही भीनी भीनी खुशबू सच बता यहीं हो […]

संस्मरण

वो शाम हंसीं

कोई सपना पूरा हो रहा है। यह बात कुछ साल पहले की है जब हमारा 20 सालों बाद स्कूल के सभी दोस्तों के साथ रियूनियन हुआ। सहसा पुराने सारे जज्बात हरे भरे हो गए। वो स्कूल के दिन याद आ गए, जब हम बाल्यावस्था से किशोरावस्था और यौवन की दहलीज पर पांव रखे थे। पढ़ाई […]

कहानी

एक अधूरी कहानी

निहारिका नाम था उसका। पता नहीं उस में ऐसी क्या बात थी, जो मुझे अपनी ओर पर बस आकृष्ट कर रही थी। हमारे ऑफिस से अक्सर वृद्धाश्रम, अनाथालय दिव्यांगों के यहां हर महीने दौरा करना होता था।उनका मनोबल बढ़ाने के लिए उनके हस्त से निर्मित वस्तुओं को बहुत बढ़ावा दिया जाता था। या यूं कह […]

कविता

इम्तिहान

विषय इम्तिहान विधा कविता जिंदगी का हर घङी है इम्तेहान जी लो जी भर के मिला जन्म हम हैं इंसान ८४ लाख योनियों में मिला हमको यह वरदान कल क्या हो सब हैं इससे अनजान। निशा हुई सो गए चैन से आएगी उषा सब है बेखबर से खुली नींद सलामत देखा खुद को इम्तेहान में […]

लघुकथा

नारी शक्ति

विषय नारी/वनिता विधा-आलेख/संस्मरण यूं तो इंसान अपने जीवन काल में ऐसे कई लोगों के संपर्क में आता है जो उसके प्रेरणा स्रोत बन जाते हैं घर की प्रथम पाठशाला की शिक्षिका मां स्कूल के शिक्षक शिक्षिका किंतु यह कहानी जो मैं आज आपके समक्ष प्रस्तुत कर रही हूं इस महिला दिवस की सशक्त उदाहरण है […]

कविता

कलम

दिनांक – २८ फरवरी 2021 विषय कलम विद्या कविता कलम है बड़ी अजीब तन्हाई जब रहे तो हो जाती और करीब। मौसम का जब बदलता रंग, चढ़ जाता उस पर यौवन, बसंत पंचमी की बेला में उस पर चढ़ा पितांबर रंग, मन में उठे कोई जज्बात, पन्नों पर बिखर जाता अल्फाज, इसका तो बस एक […]

कविता

सूरत

दिनांक 2८ फरवरी 2021 विषय सूरत विधा कविता कविता कहूं ग़ज़ल कहूं या संगमरमर का महल कहूं कवि की कल्पना कहूं या प्रेम पत्र की नायिका लिखूं शरद की पूर्णिमा लिखूं या इतराती फूल गुलाब लिखूं भोर की लालिमा लिखूं या पर्ण पर पड़ी ओस लिखूं जमी पर बिखरे श्वेत मोती लिखूं या नदी सी […]

कविता

काश तुम मेरे होते

काश तुम मेरे होते, जो देखे थे सपन सलोने, थे पूरे होने की दहलीज पर, ना जाने जिंदगी ने ली, ये कैसे करवट हो गए रास्ते जुदा, सुबह बिस्तर पर जो होता सिलवट, लगता शायद  तूने ली हो करवट, अपने बालों की छीटों से, तुम्हें प्यार से उठाते, काश जो तुम मेरे होते। हर सुहानी […]

कविता

सौगात

खास होते हैं कुछ बात, जुड़ा रहता उससे जज्बात, बिकता नहीं हजारों में, मिलता सिर्फ दुआओं में, शामिल रहता है हर पल खट्टी मीठी यादों में, बीते थे शादी के कुछ वर्ष, हंसी-खुशी सब थे समर्थ, गई दृष्टि फिर एक ही ओर कौन संभाले घर की बागडोर, खुसफुस होने लगी घरों में, सवाल रहता सबके […]