गीतिका/ग़ज़ल

सुनो किसी दयार में

कभी तो हमसे तुम मिलो,सुनो किसी दयार में कहो कभी मन की कही सुनो किसी दयार में।। जो बात दिल में है कहो ,कहो कहो न चुप रहो दिल टुकड़े टुकड़े हो रहा सुनो किसी दयार में।।  ये रात फिर न आएगी ये बात कह न पाओगे कसम वसम सब तोड़ दो सुनो किसी दयार […]

कविता

प्रेम

प्रेम एक अभिव्यक्ति जिसे व्यक्त नही किया जाता। प्रेम। एक आलौकिक अनछुआ अहसास जिसे छूआ नही बल्कि महसूस किया जाता है। प्रेम। एक समपर्ण, एक रिश्ता पवित्र व पावन। प्रेम। सिर्फ ईश्वरीय स्वरूप प्रेम। गंगा की निर्मलता अम्बर सी महानता धरा सी दानता जो सिर्फ देना जानता है पाने की अभिलाषा से दूर बहुत दूर। […]

कविता

गाँव की बेटी

बदल रही है साथ समय के गाँव की बेटी बड़ी भोली, बड़ी नादान दुनिया से नहीँ है अब अंजान गाँव की बेटी ! लीपती थी चूल्हा कभी जो आज जिंदगी के रंग उकेर रही है कैनवास पर… गाँव की बेटी ! घर के आँगन की दहलीज पर बना रही है खुशियों की रंगोली गाँव की […]

कविता

अथाह प्रेम

दिल लगाया भी तो तुमसे पत्थर से। खैर कहते हैं न कि प्रेम में वो ताकत होती है जो पत्थर को भी पिघला देती है और.. मेरे प्रेम की तासीर भी देखना खींचकर तुम्हें ले ही आएगी आगोश में । तुम पत्थर नहीं जानती हूँ तुम तो सागर हो ..हां सागर अथाह प्रेम का सागर। […]

कविता

रात चाँदनी गहरी-गहरी

रात  चाँदनी  गहरी-गहरी प्रेम-प्रीत क्यू ठहरी-ठहरी ॥ चलो आज चाँदनी छू लें हम कुछ मन की चाही कर लें हम i जीवन नैया कब रुकी-रुकी ग़म की नदियाँ गहरी-गहरी ॥ हम-तुम जाने फ़िर हों  ना हों ये मधुर-मिलने फ़िर हो ना हो ! दुनियाँ क्यों है ठहरी-ठहरी क्यों नज़रें हैं प्रहरी-प्रहरी ॥ चलो आज बाँध […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

प्यार के मोड़ पर ,तुम मिलों तो सही। प्रेम की बारिशों में तुम भीगो तो सही।। नैनों में प्रेम मदिरा भरके तो देखो। मैकदे के जरा से दूर हों तो सही।। आचमन अधरों का तुम करों तो सही। प्रीत की मिश्री मन मे भरो तो सही।। हमने देखा नही,कुछ भी जाना नहीं।। प्रीत के गीत […]

कविता

रिवाज़

रात भर… जलता रहा अलाव.. और खुलती रही बोतलों पर बोतलें… और वो हँस रहे थे .. बेहूदा और फूहड़ हँसी….. अजीब अट्टहास के साथ…ही वो मशगूल थे …. खाने मॆं चिकन ,मटन और….और जाने क्या-क्या अनाप-शनाप और ले रहे थे चटकारे….. यहीं तक होता तो ठीक था….. हालाँकि अखर रहा था , ये सब […]