कविता

यादें

यादों के झरोंखो में झांकने लगी आज, सपनों में खोने लगे झंझावातों भरें राज। उड़ान भरी, लगाई एक लम्बी सी छलांग, पहुंची बीते कल में जो था मेरा अभिमान। सुहाने दिन थे और रातें सपनों में थी कटती, उंगलियों की कलाकारी दीवारों पर सजती। इतनी सी इच्छा किसी का दिल न दुख जाए, फूल हूं […]

कविता

बेटी हैं अनमोल धरोहर

बेटी   हैं   अनमोल   धरोहर, संस्कृति  और   समाज  की। यदि सभ्यता सुरक्षित रखनी, सींचो  मिल  सब   प्यार  से। मां  के  पेट  से  बन  न आई, नारी    दुश्मन    नारी    की। घर  समाज  से  सीखा उसने, शिक्षा    ली      दुश्वारी    से। इच्छाओं  को  मन  में  अपने, एक   एक   कर   दबा  रही। एक […]

कविता

गुणगान करें सब नारी का,

गुणगान  करें सब  नारी का, सम्मान    करें    न     जानें। लक्ष्मी कहलावे  जो घर की, लक्ष्मी   के   हित   तरसावे। भोर  पहर  जो त्याग  शयन, सूरज  से  प्रथम  उठ  जावे। ध्यान  रखें  सबके सुख  का, उसका  दुख  समझ न पावे। अर्द्ध दिवस उपवास में बीते, सबके  हित   भोज  पकावे। जेवन  बैठे  सब  लोग  जहा, […]

कविता

मेरी पूजा मेरी मां

चूल्हे पर  जलती  हांडी सी, पल  पल  जलती  मेरी  मां। भीतर भीतर बल्के फिर भी, कभी  न   छलके   मेरी मां। अपनी पायलकी रूनझुन से, सुबह   जगाती  सबको मां। अवसादों   के   घोर  अंधेरे, अंतर्मन   में    छुपाती   मां। संघर्षों की कठिन डगर पर, दिनकर बनकर  चलती मां। भीतर भीतर बल्के फिर भी, कभी  न  छलके   मेरी  […]