Author :



  • बचत का सलीका !!

    बचत का सलीका !!

    माँ तुम जौहरी तो नहीं थीन ही कोई व्यापारी पर परखने का तरीक़ाबचत का सलीकाकब कहाँ कैसेखर्च करना है शब्दों कोकहाँ किसी टूटे औऱकमज़ोर का सहारा बनकरउसे ताकतवर बना देना हैये हुनर बखूबी सिखाया है तुमने...

  • कविता

    कविता

    शब्दों को मन की गीता का मनन करने दो तो सुनने वाला और कहने वाला दोनो ही चख लेते हैं अमृत निकल जाता है पथिक दुर्गम राह से भी शब्द जो निकलते हैं मन की गीता...


  • उत्सव के रंग !!!!

    उत्सव के रंग !!!!

    उत्सव के रंग से रंगी हो द्वार की रंगोली माँ लक्ष्मी के मङ्गल चरण हों ड्योढ़ी पर शुभ लाभ का निवास हो स्वास्तिक प्रतीक के संग उत्सव का आनन्द हो घर के कोने-कोने में दीपावली की...

  • माँ की ममता से !!!

    माँ की ममता से !!!

    माँ तुम्हारे शब्दों की विरासत मेरी हथेलियों को देती है ताक़त मन को संबल कदमों को हौसला मस्तिष्क को कभी हार कर भी नहीं हारने देना सोचती हूँ शब्दों में इतनी हिम्मत पहले तो नहीं थी...

  • बोलती ही नहीं !!!

    बोलती ही नहीं !!!

    ये ख़ामोशी सिर्फ बोलती ही नहीं लड़ती भी है और कई बार जंग भी हो जाती है बिना किसी गोली बारूद के और सब ख़त्म हो जाता है ख़ामोशी से !!!!   परिचय - सीमा सिंघल...


  • उत्सव मनाना तुम !!!!

    उत्सव मनाना तुम !!!!

    स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाना तुम तिरंगा भी फहराना पर शपथ मत लेना उसके नीचे आन बान शान की तुम्हारे शब्दों की ये गुलामी वो सह नहीं पायेगा साये में उसके छल होता तो है पर...