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  • बोलती ही नहीं !!!

    बोलती ही नहीं !!!

    ये ख़ामोशी सिर्फ बोलती ही नहीं लड़ती भी है और कई बार जंग भी हो जाती है बिना किसी गोली बारूद के और सब ख़त्म हो जाता है ख़ामोशी से !!!!   परिचय - सीमा सिंघल...


  • उत्सव मनाना तुम !!!!

    उत्सव मनाना तुम !!!!

    स्वतंत्रता दिवस का उत्सव मनाना तुम तिरंगा भी फहराना पर शपथ मत लेना उसके नीचे आन बान शान की तुम्हारे शब्दों की ये गुलामी वो सह नहीं पायेगा साये में उसके छल होता तो है पर...

  • उगता हुआ सूरज !!!

    उगता हुआ सूरज !!!

    बुज़दिल होने से अच्छा है मन को ताकतवर बनाया जाये कुछ घूँट हौसले के उम्मीद से भरकर जिन्दगी को रोज़ उगता हुआ सूरज दिखाया जाये — सीमा सिंघल ‘सदा’ परिचय - सीमा सिंघल 'सदा' जन्म स्थान...

  • मन का भूगोल !!!

    मन का भूगोल !!!

    जिंदगी के जोड़ घटाने में रिश्तों का गणित अक्सर जरूरत के वक़्त जाने क्यों शून्य हो जाता है और मन का भूगोल सब समझ कर भी कुछ नया खोजने लग जाता है। परिचय - सीमा सिंघल...


  • रुको मत !

    रुको मत !

    ये खटपट वाले रिश्ते भी जब मौन होते हैं तो मन को छटपटाहट होती है जाने क्या हुआ इनका लड़ना-झगड़ना ही साबित करता है जिंदगी में बाकी है अभी बहुत कुछ करना किसी को मनाना है...

  • जब माँ साथ होती है !!!!

    जब माँ साथ होती है !!!!

    जाने कहाँ छिप जाती है उदासी, ख़ामोशी, और तन्हाई जब माँ साथ होती है !!! … सारी मुस्कराहटों को पता होता है माँ की धड़कनों से हर कोना हँसता है और दीवारें जगमगाती हैं !!! परिचय...

  • मरहम के साये में !!!

    मरहम के साये में !!!

    कड़वे शब्द कठिन समय में बस मरहम होते हैं जख्मो की ज़बान होती तो वो चीखते शोर मचाते आक्रमण करते मरहम के साये में दर्द नम होकर यूँ पसीज हिचकियाँ ना लेते!!!! … छलनी होती रूह...