कविता

आँखों में आँखें डालकर !!!

वक़्त के पास इन दिनों मुश्किलों की लंबी कतार है … नित नये संक्रमणों के साथ, आँधी-पानी और तूफ़ान भी है ! कहती है उम्मीद तभी कानों के पास आहिस्ता से, डरकर भी लड़ी है, जंग कोई किसी ने संभल कर चलो, हिम्मत बनो किसी उदास मन को एक मुस्कान देकर, दुआओं के कुछ बोल […]

कविता

ईश्वर पर आस्था रखना !!!

तसल्ली भरे शब्दों के चेहरों पर मातम सा छाया देख दुआओं की पगडंडियों पर साथ चल रही उम्मीद कहती है … गुज़र जाएगा ये वक़्त ईश्वर पर आस्था रखना इस प्रार्थना के साथ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत। …

कविता

ज़िद्दी यादों से !!!

आँसू बहाये, पाँव भी पटके बड़ी देर तक ठुनकती भी रहीं पर मुझसे दूर न हुईं इनको भुलाने की फ़नकारी में मैं माहिर न हो सकी चाह कर भी ….. टूटता नहीं, रिश्ता मेरा इन ज़िद्दी यादों से !!!

कविता

उम्मीदों की पिटारी लिये !!

उम्मीदों के माथे पे कभी काला टीका भी लगा देना बड़ा बेरोक-टोक ये इसकी उसकी आँखों में उतर जाती हैं बन के अपनी सी ! …. जाने की तैयारी में है दिसंबर 20 का उम्मीदों की पिटारी लिये जनवरी 21 की दस्तक़ देने को आतुरता से शुभ क्षण, शुभ दिन को साथ लिए शुभकामनाओं भरा […]

कविता

एक चुटकी उम्मीद की !!

ये हौसला है न इसको मैंने नजरें उठाकर देखा भी नहीं, पर जितनी बार टूटती हूँ मैं उतनी बार इसे अपने आस-पास ही देखती हूँ ! … एक चुटकी उम्मीद की बजाना कभी उदासियां भी खिलखिलाकर गले लग जाती हैं खामोशियाँ बतियाने लगती हैं आपस में और मन चल पड़ता है एक नई डगर पे […]

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रिश्तों की उम्र लम्बी हो जाती है !!

आंकलन तेरा, तेरे बग़ैर तेरा जब भी किया सारी कमियों को, नजरअंदाज मन ने कर दिया बिना मेरे कहे ही सच तो यही है न, कि दिलों के रिश्तों में… दिमाग़ का दख़ल, न रखा जाये तो, रिश्तों की उम्र लम्बी हो जाती है।

कविता

आशीष की अभिलाषा लिए!!!

मन की नदी में तर्पण किया है पापा भावनाओं से, भीगा सा मन लिए … इस पितृपक्ष फिर बैठी हूँ आकर, भोर से ही छत पर, जहाँ कौए के कांव – कांव करते शब्द और सूरज की बढ़ती लालिमा के मध्य, निर्मल स्नेह भर अंजुरी में कर रही हूँ अर्पित, नेह की कुछ बूंदें गंगाजल […]

कविता

साधना जानती है वो ..

शब्दों को साधना जानती है वो, किस शब्द को कब कहाँ जगह देनी है बख़ूबी पता भी है.. कठोर से कठोर ज़िद्दी से ज़िद्दी शब्द, सब उसके एक इशारे पे नतमस्तक हो जाते हैं, सफ़ेद कागज़ पर काला लिबास सारे के सारे शांत ! … प्रत्येक पंक्ति में .. अपने अर्थों से परिचित होकर भी, […]

कविता

वक़्त बोल रहा है …

सब की बोलती बंद है इन दिनों, वक़्त बोल रहा है .. बड़ी ही ख़ामोशी से कोई बहस नहीं, ना ही कोई, सुनवाई होती है एक इशारा होता है और पूरी क़ायनात उस पर अमल करती है!!! … सब तैयार हैं कमर कसकर, बादल, बिजली, बरखा के साथ कुछ ऐसे वायरस भी जिनका इलाज़, सिर्फ़ […]