कविता

जाते हुए पल को !!!

ये सच है आज वर्ष का अंतिम दिन है नहीं टूट रहा शब्‍दों का मौन किसी तरह से, नहीं ठहराव मिला अश्‍कों को बहने से क्‍या फ़र्क पड़ता है, सांत्‍वना के दो शब्‍द कहने से दर्द आंचल में सुबक रहा माँ के सन्‍नाटा भी चीत्‍कार करता है हिचकियों का स्‍वर जब गले में आकर रूँधता […]

कविता

सारे हल आज एकजुट थे !!

पापा कोई जादू तो नहीं है मेरे पास, है तो बस निष्ठा जो उम्मीद भरी आँखों में विश्वास और धैर्य की उँगली थाम के जब चलती है तो लगता है आप साथ हैं तो बस मुश्किलें भी घबरा जाती हैं बुरा वक़्त देकर दस्तक़ लौट जाता है ! एड़ी चोटी का ज़ोर लगाया था चुनौतियों […]

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जन्मदात्री बन !!

मन्नतों के धागे कच्चे सूत से भले ही बने होते हैं पर जब तक पूरी न हो फ़रियाद ये हवा धूप पानी सब सहकर भी रब की चौखट में हर पल सज़दे में रहते हैं ! … इनका बंधे रहना गठानों का ना खुलना सबूत है बड़ी ताकतवर है ये आस्था सम्बल,भरोसा,विश्वास और धैर्य पिता, […]

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बचत का सलीका !!

माँ तुम जौहरी तो नहीं थीन ही कोई व्यापारी पर परखने का तरीक़ाबचत का सलीकाकब कहाँ कैसेखर्च करना है शब्दों कोकहाँ किसी टूटे औऱकमज़ोर का सहारा बनकरउसे ताकतवर बना देना हैये हुनर बखूबी सिखाया है तुमने हमें !

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कविता

शब्दों को मन की गीता का मनन करने दो तो सुनने वाला और कहने वाला दोनो ही चख लेते हैं अमृत निकल जाता है पथिक दुर्गम राह से भी शब्द जो निकलते हैं मन की गीता का मनन करते हुए !!!

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उत्सव के रंग !!!!

उत्सव के रंग से रंगी हो द्वार की रंगोली माँ लक्ष्मी के मङ्गल चरण हों ड्योढ़ी पर शुभ लाभ का निवास हो स्वास्तिक प्रतीक के संग उत्सव का आनन्द हो घर के कोने-कोने में दीपावली की शुभकामनाओं का प्रकाश अन्तर्मन को सदा यूँ ही आलोकमय रखे ! — सीमा ‘सदा’

कविता

माँ की ममता से !!!

माँ तुम्हारे शब्दों की विरासत मेरी हथेलियों को देती है ताक़त मन को संबल कदमों को हौसला मस्तिष्क को कभी हार कर भी नहीं हारने देना सोचती हूँ शब्दों में इतनी हिम्मत पहले तो नहीं थी जरूर तुमने अभिमंत्रित किया होगा इन्हें अपनी ममता से सुना है कि माँ की ममता से कोई पार नहीं […]